The main demands were related to sugarcane payments : बजट से किसानों को बड़ी उम्मीदें, MSP से लेकर गन्ना भुगतान तक रखीं प्रमुख मांगें

केंद्र सरकार द्वारा संसद सत्र में प्रस्तुत किए
- जाने वाले आगामी बजट को लेकर किसानों में इस बार विशेष उत्साह और उम्मीद देखने को मिल रही है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के कांधला ब्लॉक क्षेत्र के भभीसा गांव में किसानों के बीच बजट को लेकर गहन चर्चा हुई। भभीसा गांव में आयोजित किसान बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और खेती-किसानी से जुड़ी अपनी प्रमुख समस्याओं व अपेक्षाओं को खुलकर सामने रखा। किसानों का साफ कहना था कि सरकार को इस बार उनकी आवाज़ सुननी चाहिए और उनकी मेहनत का सही मूल्य सुनिश्चित करना चाहिए।
- बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, लेकिन इसके बावजूद कृषि क्षेत्र की समस्याएं लंबे समय से अनदेखी का शिकार रही हैं। बढ़ती लागत, फसलों के उचित दाम न मिलना, समय पर भुगतान न होना और आधुनिक संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। ऐसे में आगामी बजट से किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद है।
- किसानों की सबसे प्रमुख मांग फसलों के लिए उचित और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने को लेकर रही। किसानों ने कहा कि मौजूदा MSP उनकी लागत और मेहनत के मुकाबले काफी कम है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ते। किसानों का कहना था कि अगर सरकार वास्तव में किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है, तो MSP को लागत के आधार पर तय करना होगा, ताकि उन्हें अपनी फसल बेचने पर घाटा न उठाना पड़े।
बैठक में उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर भी चर्चा हुई।
- किसानों ने मांग की कि खाद पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाए। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका बनी रहती है, जिससे किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता। यदि सब्सिडी सीधे खातों में पहुंचेगी, तो पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को वास्तविक लाभ मिलेगा।
- गन्ना किसानों ने इस बजट से विशेष उम्मीदें जताईं। किसानों ने गन्ने के दाम बढ़ाने और बकाया भुगतान को जल्द से जल्द कराने की जोरदार मांग की। किसानों का कहना था कि गन्ना एक प्रमुख नकदी फसल है, लेकिन समय पर भुगतान न मिलने से किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है। यदि गन्ना मूल्य समय पर घोषित किया जाए और भुगतान में देरी न हो, तो किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
- किसानों ने यह भी मुद्दा उठाया कि हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में गन्ने का मूल्य उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक है। ऐसे में किसानों ने मांग की कि पूरे देश में गन्ने का एक समान मूल्य तय किया जाए, ताकि किसी राज्य के किसानों के साथ भेदभाव न हो। उनका कहना था कि एक ही फसल के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मूल्य होना न्यायसंगत नहीं है।
- बैठक में शुगर मिलों द्वारा गन्ना क्रय केंद्रों पर ढुलाई किराए में की गई बढ़ोतरी को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों का कहना था कि ढुलाई किराया बढ़ने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ढुलाई किराया कम किया जाए या इसका भार शुगर मिलों पर डाला जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
- कई किसानों ने आधुनिक कृषि उपकरणों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने किसानों को बिजली मुफ्त दी है, उसी तरह आधुनिक कृषि यंत्रों और मशीनों को भी सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाए। इससे खेती की लागत कम होगी, समय की बचत होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। किसानों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के बिना आज के समय में खेती को लाभकारी बनाना मुश्किल होता जा रहा है।

इसके साथ ही किसानों ने सरकार से उन्नत और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की भी मांग की।
- किसानों का कहना था कि यदि उन्हें समय पर अच्छे बीज मिलें, तो पैदावार बढ़ाई जा सकती है और खेती अधिक लाभकारी बन सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण पर बजट में विशेष प्रावधान किया जाए, ताकि किसान नई तकनीकों से जुड़ सकें।
- भभीसा गांव के वरिष्ठ किसान नेताओं ने बैठक के दौरान कहा कि अब वक्त आ गया है जब सरकार को किसानों की आय बढ़ाने के वादे को जमीन पर उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की वास्तविक समस्याओं को बजट में शामिल किया गया, तो इससे गांवों में खुशहाली आएगी और किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
- किसानों का मानना है कि यदि MSP, गन्ना भुगतान, सब्सिडी, आधुनिक उपकरण और बीज जैसी मांगों को आगामी बजट में गंभीरता से लिया गया, तो यह किसानों के लिए आर्थिक राहत का बड़ा माध्यम बनेगा। बैठक के अंत में किसानों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें इस बार बजट से बड़ी उम्मीदें हैं और वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मेहनत, संघर्ष और योगदान को समझते हुए ठोस फैसले ले।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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