The need for strictness : सरसंघचालक ने जताई चिंता: हिंदुओं की घटती जनसंख्या और घुसपैठियों पर सख्ती की आवश्यकता

हाल ही में समाज में बढ़ती चिंताओं के बीच सरसंघचालक ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या और देश में बढ़ती घुसपैठ की समस्या पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में धर्मांतरण के मामलों और अवैध घुसपैठियों के बढ़ते मामलों को रोकना अति आवश्यक है। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म में लौटने वाले लोगों का संरक्षण और पुनर्स्थापन भी प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी है।
बढ़ती घुसपैठ और धर्मांतरण की समस्या
सरसंघचालक ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में घुसपैठ और धर्मांतरण के कारण सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि कुछ लोग लालच और जबरदस्ती के माध्यम से धर्मांतरण कर रहे हैं, जिससे स्थानीय आबादी में असंतुलन पैदा हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके तहत जो लोग अवैध रूप से देश में रह रहे हैं, उन्हें डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना था कि अवैध घुसपैठियों को रोजगार देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और इस दिशा में सरकारी और सामाजिक प्रयासों को संगठित और तेज़ किया जाना चाहिए।
घर वापसी और संरक्षण
सरसंघचालक ने यह भी कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में वापस लौटना चाहते हैं, उनका घर वापसी का काम तेज़ होना चाहिए। यह सिर्फ उनके धर्मांतरण को रोकने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लौटने वालों का ध्यान रखना और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि घर वापसी और संरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी होनी चाहिए ताकि लोग अपने धर्म में लौटने में संकोच न करें। इससे सामाजिक संतुलन भी बना रहेगा और धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
घुसपैठियों को रोकने के उपाय
सरसंघचालक ने यह भी जोर दिया कि अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए केवल कागजी कदम पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें सख्त और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे उनका देश में बसना और लंबे समय तक रहना आसान हो जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि घुसपैठियों की पहचान, उनका डेटा और निगरानी प्रभावी तरीके से की जाए। इस दिशा में पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और प्रशासनिक एजेंसियों को संपूर्ण सहयोग और तकनीकी साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन
सरसंघचालक ने यह भी कहा कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। यदि किसी समुदाय की संख्या घटती है या उनकी पहचान कमजोर होती है, तो इससे सामाजिक संघर्ष और अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी समुदायों के लिए समान अवसर और संरक्षण सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन अवैध गतिविधियों और जबरदस्ती धर्मांतरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन और समाज की भूमिका
सरसंघचालक ने कहा कि इस दिशा में केवल सरकार या प्रशासन ही जिम्मेदार नहीं है। समाज और नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण के मामलों पर सजग रहें। उन्होंने कहा कि समाज को भी शिक्षा, जागरूकता और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से लोगों को मजबूत करना चाहिए ताकि वे अपने धर्म और संस्कृति के प्रति सजग रहें।
इसके अलावा उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि हिंदू धर्म में लौटने वाले लोगों के लिए पुनर्स्थापन योजनाएं बनाई जाएं। इसमें रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हों। इससे न केवल धर्मांतरण की घटनाओं को रोका जा सकेगा, बल्कि समाज में विश्वास और संतुलन भी कायम रहेगा।
निष्कर्ष
सरसंघचालक का संदेश स्पष्ट था कि देश में घुसपैठ, अवैध रोजगार और जबरदस्ती धर्मांतरण को रोकना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए कदम इस प्रकार हैं:
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घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना।
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हिंदू धर्म में लौटने वालों का घर वापसी का काम तेज करना।
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धर्मांतरण के मामलों पर सख्त रोक लगाना।
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अवैध घुसपैठियों को रोजगार न देना।
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समाज और प्रशासन मिलकर सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखना।
सरसंघचालक ने इस अवसर पर सभी से यह अपील भी की कि हमें केवल नकारात्मक घटनाओं पर ध्यान न देना चाहिए, बल्कि समाधान और पुनर्स्थापन पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की रणनीति से न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन स्थापित रहेगा, बल्कि देश में सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण भी होगा।
इस प्रकार सरसंघचालक ने अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज और प्रशासन दोनों के लिए मार्गदर्शन और सुझाव दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सख्त कार्रवाई, जागरूकता और घर वापसी की प्रक्रिया एक साथ लागू करने से ही देश में सामाजिक और धार्मिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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