Unheard stories : था भारत का पहला झंडा? कितनी बार बदला तिरंगा? जानें राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी अनसुनी बातें

पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।
- आज जब हम केसरिया, सफेद और हरे रंग के बीच ‘अशोक चक्र’ वाले तिरंगे को शान से लहराते देख रहे हैं, तो यह न केवल हमारी आजादी बल्कि हमारे लोकतंत्र का सबसे बड़ा प्रतीक नजर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज जो तिरंगा हमारी पहचान है, वह इस रूप में आने से पहले कई बदलावों से गुजरा है?
- पिछले 120 वर्षों में भारत के राष्ट्रीय ध्वज ने 6 बार अपना स्वरूप बदला। कभी इसमें कमल के फूल थे, कभी चरखा, तो कभी अंग्रेजों का यूनियन जैक। आइए, इस गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगे के उस ऐतिहासिक सफर पर चलते हैं, जिसने गुलाम भारत से लेकर आधुनिक भारत तक की पूरी कहानी अपनी परतों में समेट रखी है।
1. साल 1906 में बना पहला ध्वज
- भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता पार्सी बागान चौक में फहराया गया था। इसमें हरे, पीले और लाल रंग की तीन क्षैतिज पट्टियां थीं। ऊपर की हरी पट्टी में 8 आधे खिले हुए कमल के फूल थे, बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग में ‘वंदे मातरम’ लिखा था और नीचे की लाल पट्टी पर सूरज और चांद के प्रतीक थे।
2. साल 1907: मैडम कामा का झंडा
- जर्मनी के स्टटगार्ट में मैडम भीकाजी कामा ने भारत का दूसरा झंडा फहराया। यह काफी हद तक पहले झंडे जैसा ही था, लेकिन इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर केवल एक कमल और सात तारे सप्तऋषि का प्रतीक थे।
3. साल 1917: होम रूल आंदोलन के दौरान
- एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने एक नया झंडा अपनाया। इसमें 5 लाल और 4 हरी पट्टियां थीं। इसके ऊपरी बाएं कोने पर अंग्रेजों का ‘यूनियन जैक’ भी था, जो उस समय के राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता था।

4. साल 1921: गांधी जी का चरखा
- बेजवाड़ा जो अब विजयवाड़ा है में एक युवक जिनका नाम पिंगली वेंकैया था ने गांधी जी को एक झंडा भेंट किया। इसमें लाल और हरा रंग था (हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए)। गांधी जी ने इसमें सफेद पट्टी बाकी समुदायों के लिए और प्रगति के प्रतीक के रूप में ‘चरखा’ जोड़ने का सुझाव दिया।
5. साल 1931: तिरंगे को मिली आधिकारिक पहचान
- यह साल तिरंगे के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। कराची कांग्रेस कमेटी में एक प्रस्ताव पारित कर तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। इसमें केसरिया, सफेद और हरा रंग था और बीच में गांधी जी का चरखा।
6. साल 1947: वर्तमान तिरंगा (अशोक चक्र)
- 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। रंगों का महत्व वही रहा, लेकिन चरखे की जगह सम्राट अशोक के ‘धर्म चक्र’ जिसे न्याय का प्रतीक माना जाता है को जगह दी गई।
>> राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी 5 अनसुनी बातें <<
- डिजाइनर : वर्तमान तिरंगे का डिजाइन आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था। कपड़ा : कानूनी रूप से तिरंगा केवल ‘खादी’ (हाथ से काता गया सूत) का ही बना होना चाहिए। सिल्क या अन्य कपड़ों का प्रयोग विशेष अनुमति पर ही होता है। ध्वज संहिता (Flag Code) : 2002 से पहले आम नागरिकों को अपने घरों पर झंडा फहराने की अनुमति केवल विशेष दिनों पर ही थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर इसे आसान बना दिया गया है। सर्वोच्च स्थान : भारत का सबसे ऊंचा तिरंगा सीमा चौकियों और ऐतिहासिक स्मारकों पर फहराया जाता है, जो मीलों दूर से दिखाई देता है अशोक चक्र : तिरंगे के बीच में स्थित नीले रंग के चक्र में 24 तीलियां होती हैं, जो दिन के 24 घंटों और निरंतर प्रगति का प्रतीक हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।
YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q
YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews
Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/
Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_cZ
अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।
आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता