Use of drones : ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका का ईरान पर हमला, पहली बार LUCAS ‘फिदायीन’ ड्रोन का इस्तेमाल

अमेरिका ने कथित रूप से ईरान के खिलाफ एक विशेष सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अपनी नई ड्रोन युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कम लागत वाले LUCAS ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ का पहली बार इस्तेमाल किया। इस हमले को रणनीतिक हलकों में इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसे ईरान की ही शैली—कम लागत, उच्च प्रभाव और आत्मघाती (फिदायीन) ड्रोन रणनीति—का जवाब बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम के जरिए अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) के क्षेत्र में भी अब नए स्तर पर पहुंच चुका है।
ईरान लंबे समय से कम लागत वाले ड्रोन और ‘वन-वे अटैक’ प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए जाना जाता रहा है। विशेष रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) और उससे जुड़े नेटवर्क पर क्षेत्रीय संघर्षों में ऐसे ड्रोन के उपयोग के आरोप लगते रहे हैं। मध्य-पूर्व में ईरान समर्थित समूहों द्वारा ड्रोन हमलों की घटनाओं ने पारंपरिक सैन्य शक्तियों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। ऐसे में अमेरिका द्वारा LUCAS ड्रोन का उपयोग एक सामरिक और तकनीकी संदेश दोनों माना जा रहा है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत कथित कार्रवाई में अमेरिका ने ऐसे ड्रोन का उपयोग किया जो कम लागत में तैयार किए गए, लेकिन सटीक लक्ष्यभेदन क्षमता से लैस थे। LUCAS (Low-Cost Unmanned Combat Aerial System) को विशेष रूप से ‘वन-वे अटैक’ मिशन के लिए विकसित किया गया है। यह ड्रोन लक्ष्य तक पहुंचकर स्वयं विस्फोट करता है, जिससे इसे पारंपरिक मिसाइल की तुलना में सस्ता और लचीला विकल्प माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे ड्रोन बड़े पैमाने पर तैनात किए जा सकते हैं, जिससे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ता है।
अमेरिका पहले भी उन्नत ड्रोन तकनीक के लिए जाना जाता रहा है, जैसे कि MQ-9 Reaper, जो निगरानी और सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल होता है। हालांकि, LUCAS जैसे कम लागत वाले ‘कामीकाज़े’ ड्रोन का उपयोग यह दर्शाता है कि अमेरिकी रणनीति अब केवल महंगे और अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बड़े पैमाने पर, कम लागत वाले और उच्च जोखिम वाले अभियानों के लिए भी तैयार है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की उस रणनीति का जवाब है जिसमें उसने वर्षों से क्षेत्रीय संघर्षों में ड्रोन और मिसाइलों के जरिए दबाव बनाने की नीति अपनाई है। अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए यह आवश्यक हो गया था कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें जो लागत प्रभावी होने के साथ-साथ तेजी से तैनात की जा सके। LUCAS ड्रोन की खासियत इसकी मॉड्यूलर डिजाइन, तेज उत्पादन क्षमता और सटीक लक्ष्य प्रणाली बताई जा रही है।

इस अभियान के बाद वैश्विक स्तर पर ड्रोन युद्ध की बदलती प्रकृति पर चर्चा तेज हो गई है। आधुनिक युद्ध अब केवल टैंकों, लड़ाकू विमानों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा। ड्रोन तकनीक ने युद्ध के मैदान को पूरी तरह बदल दिया है। कम लागत वाले ‘वन-वे अटैक’ ड्रोन किसी भी देश की पारंपरिक वायु रक्षा प्रणाली को चुनौती दे सकते हैं, क्योंकि उन्हें बड़ी संख्या में एक साथ छोड़ा जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए हर लक्ष्य को रोक पाना मुश्किल हो जाता है।
ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। ऐसे में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अमेरिका अब केवल रक्षात्मक नीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर समान शैली में जवाब देने के लिए तैयार है।
हालांकि, इस तरह के हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ड्रोन युद्ध की यह होड़ तेज हुई तो मध्य-पूर्व में सैन्य संतुलन और अधिक जटिल हो सकता है। कम लागत वाले आत्मघाती ड्रोन तकनीक के प्रसार से गैर-राज्य तत्वों के हाथों में भी घातक क्षमता पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के लिए यह अभियान तकनीकी परीक्षण के साथ-साथ रणनीतिक प्रदर्शन भी माना जा रहा है। यदि LUCAS प्रणाली प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में इसे बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सकता है। इससे युद्ध की प्रकृति और अधिक तकनीक-आधारित और स्वचालित हो सकती है।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और LUCAS ‘फिदायीन’ ड्रोन का उपयोग आधुनिक सैन्य रणनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में ड्रोन युद्ध वैश्विक सुरक्षा समीकरण का केंद्रीय तत्व बन सकता है, जहां लागत, तकनीक और गति—तीनों निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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