Vaishno Devi Yatra : वैष्णो देवी यात्रा में नए नियम लागू, RFID समय सीमा तय, दर्शन बाद 24 घंटे में वापसी अनिवार्य

नए साल के अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित पवित्र श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष दिसंबर के अंतिम दिनों और जनवरी की शुरुआत में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिससे भवन क्षेत्र, यात्रा मार्ग और कटरा बेस कैंप पर अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रियों की सुरक्षा, सुव्यवस्थित दर्शन और बेहतर भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए यात्रा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
श्राइन बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान होने वाली अव्यवस्था, जाम और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है। पिछले वर्षों में यह देखा गया था कि श्रद्धालु RFID कार्ड प्राप्त करने के बाद किसी भी समय यात्रा शुरू कर देते थे और दर्शन के बाद कई-कई दिनों तक भवन क्षेत्र में ही रुक जाते थे। इससे न केवल भीड़भाड़ बढ़ती थी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में भी कठिनाई उत्पन्न होती थी। नए नियमों के माध्यम से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया है।
संशोधित नियमों के अनुसार अब श्रद्धालुओं को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन कार्ड (RFID कार्ड) प्राप्त करने के 10 घंटे के भीतर यात्रा प्रारंभ करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय के भीतर यात्रा शुरू नहीं की जाती है, तो कार्ड अमान्य माना जा सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा की योजना बनाकर ही श्रद्धालु आगे बढ़ें और अनावश्यक भीड़ एकत्र न हो। पहले यह व्यवस्था नहीं थी और श्रद्धालु कई बार कार्ड लेने के बाद घंटों या दिनों तक यात्रा शुरू नहीं करते थे, जिससे ट्रैक पर भीड़ का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता था।
इसके अलावा, दर्शन पूर्ण करने के बाद श्रद्धालुओं को अधिकतम 24 घंटे के भीतर कटरा बेस कैंप लौटना होगा। पहले श्रद्धालु भवन क्षेत्र में कई दिन तक रुक जाते थे, जिससे सीमित स्थान में भीड़ बढ़ जाती थी और अन्य यात्रियों को दर्शन में कठिनाई होती थी। नए नियमों से भवन क्षेत्र में भीड़ नियंत्रित रहेगी और सभी श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन का अवसर मिल सकेगा।
श्राइन बोर्ड ने चढ़ाई और उतराई दोनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा बलों, स्वयंसेवकों और चिकित्सा दलों की तैनाती को भी मजबूत किया गया है। सीसीटीवी कैमरों, कंट्रोल रूम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आपदा प्रबंधन टीमें भी अलर्ट मोड पर रखी गई हैं।

कटरा से माता वैष्णो देवी भवन तक की दूरी लगभग 13 किलोमीटर है। यह यात्रा श्रद्धालु अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार पैदल, घोड़े, पिट्ठू, बैटरी कार या हेलीकॉप्टर से कर सकते हैं। एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को पैदल चढ़ाई में लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है, जबकि उतराई में भी लगभग इतना ही समय लग जाता है। आम दिनों में पूरी यात्रा 24 से 36 घंटे के भीतर पूरी हो जाती है, लेकिन नए साल, नवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर भारी भीड़ के कारण यात्रा में अधिक समय लग सकता है।
श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी शारीरिक तैयारी, मौसम की जानकारी और नियमों को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा की योजना बनाएं। ठंड के मौसम में तापमान काफी गिर जाता है, इसलिए गर्म कपड़े, आवश्यक दवाइयां और पर्याप्त पानी साथ रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, बुजुर्ग श्रद्धालुओं, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
नए नियमों से जहां एक ओर भीड़ प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा भी सुनिश्चित होगी। नियंत्रित समय-सीमा के तहत यात्रा होने से ट्रैक पर जाम की स्थिति कम होगी, दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी और आपातकालीन सेवाओं को समय पर सहायता पहुंचाने में आसानी होगी। श्रद्धालुओं को भी कम इंतजार में दर्शन का लाभ मिलेगा।
श्राइन बोर्ड का मानना है कि ये बदलाव अस्थायी नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। बढ़ती श्रद्धालु संख्या और सीमित संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसे नियम आवश्यक हो गए हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
अंततः, नए साल के पावन अवसर पर माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे श्राइन बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, प्रशासन का सहयोग करें और अपनी यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धापूर्ण बनाएं। नियमों का पालन न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि लाखों अन्य श्रद्धालुओं की सुविधा और सुचारू दर्शन व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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