Waqf Board : की मुतवल्लियों को चेतावनी, 5 दिसंबर तक नहीं किया ये काम तो देना पड़ेगा भारी जुर्माना

शिया वक्फ बोर्ड ने उम्मीद पोर्टल पर संपत्तियों का विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि 5 दिसंबर निर्धारित की है। इसके अंतर्गत राज्यभर की वक्फ संपत्तियों की सूचनाएं डिजिटलीकरण के माध्यम से एकत्रित की जानी हैं। यह पहल केंद्र सरकार द्वारा सभी वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत मुतवल्लियों को अपनी देखरेख में आने वाली वक्फ संपत्तियों का संपूर्ण विवरण – जैसे भूमि, भवन, किराएदार, आय-व्यय आदि – पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।
अली जैदी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा बल्कि इन संपत्तियों के दुरुपयोग, अवैध कब्जे या अनियमितताओं को रोकने में भी सहायक होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या अभी भी पोर्टल पर दर्ज नहीं की गई है। इस सुस्ती को देखते हुए बोर्ड ने अब सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया है।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि कुछ मुतवल्ली तकनीकी जानकारी के अभाव में पोर्टल पर विवरण अपलोड करने में सक्षम नहीं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, शिया वक्फ बोर्ड ने सहायता के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। जिन मुतवल्लियों या प्रशासकों को तकनीकी सहायता की आवश्यकता है, वे टोल फ्री नंबर 1800110150 पर संपर्क कर सकते हैं या ईमेल support-umeed@gov.in के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लखनऊ स्थित शिया वक्फ बोर्ड कार्यालय में एक विशेष सहायता केंद्र की स्थापना की गई है, जहां वक्फ से जुड़े व्यक्ति जाकर प्रत्यक्ष सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
बोर्ड अध्यक्ष अली जैदी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वक्फ संपत्तियों की रक्षा, बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अगर वक्फ प्रबंधक या मुतवल्ली सहयोग नहीं कर रहे हैं तो इसे लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी की श्रेणी में लिया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ न केवल आर्थिक दंड लगाए जाएंगे बल्कि उनकी नियुक्ति की समीक्षा भी की जा सकती है।

इस संदर्भ में कुछ प्रमुख वक्फ संपत्तियों की स्थिति का भी अवलोकन किया गया। पता चला कि कई प्रमुख वक्फ संपत्तियों का विवरण अब तक पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए अली जैदी ने क्षेत्रीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे स्थानीय स्तर पर निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी मुतवल्ली और वक्फ कमेटियाँ इस कार्य को गंभीरता से लें।
वर्तमान समय में वक्फ संपत्तियों का डिजिटल डाटा तैयार करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। अक्सर वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे या किराएदारी विवाद सामने आते हैं, जिनका हल न्यायालयों या वक्फ ट्रिब्यूनलों के माध्यम से होता है। यदि इन संपत्तियों का व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो जाता है, तो ऐसे विवादों को कम किया जा सकता है और भविष्य में वक्फ बोर्ड अपने संपत्ति प्रबंधन में अधिक सक्षम बन सकता है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि आने वाले समय में उम्मीद पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी के आधार पर वक्फ संपत्तियों के लेखा परीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि वक्फ संपत्तियों की वास्तविक स्थिति क्या है और उनसे मिलने वाली आय का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। इस पहल से वक्फ संपत्तियों का सामाजिक और धार्मिक उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
उम्मीद पोर्टल पर जानकारी दर्ज करना न केवल बोर्ड का दायित्व है, बल्कि यह प्रत्येक मुतवल्ली और प्रबंध कमेटी की जिम्मेदारी है कि वे इस कार्य को समय रहते पूर्ण करें। वक्फ बोर्ड के अनुसार, जिन क्षेत्रों में अब तक यह कार्य अपेक्षा के अनुसार नहीं हुआ है, वहां के संबंधित वक्फ अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि वे जल्द से जल्द कार्य की प्रगति सुनिश्चित करें।
सारांश रूप में, शिया वक्फ बोर्ड की यह पहल वक्फ संपत्तियों के भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बोर्ड की मंशा स्पष्ट है कि वक्फ संपत्तियाँ समाज की अमानत हैं और इनका प्रबंधन जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। उम्मीद पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक तकनीकी आधारित बनाना संभव होगा।
अब यह सभी मुतवल्लियों और प्रबंध कमेटियों की जिम्मेदारी है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं और 5 दिसंबर तक अपनी सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर कार्य को पूर्ण करें। अन्यथा, उन्हें कानूनी और प्रशासकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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