Was asking for money : मेरठ: संविदा बिजलीकर्मी सरफराज रिश्वत लेते गिरफ्तार, मीटर उतारने के नाम पर 6 हजार रुपए मांग रहा था

उत्तर प्रदेश के मेरठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें एंटी करप्शन टीम ने संविदा बिजलीकर्मी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह घटना लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के विकासपुरी बिजलीघर के पास हुई, जहाँ कर्मचारी मीटर बदलने/उतारने के नाम पर घूस मांग रहा था और अवैध धन ले रहा था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर नौचंदी थाने ले जाकर उसके खिलाफ **वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
📌 क्या हुआ — पूरा मामला
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने की एंटी करप्शन शाखा को एक शिकायत मिली कि एक बिजली विभाग में तैनात संविदा कर्मी मीटर उतारने/बदलने के नाम पर उपभोक्ताओं से पैसे मांग रहा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने घर का पुराना बिजली मीटर बदलवाने के लिए कई बार अधिकारियों के पास आवेदन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में जब वह विकासपुरी बिजलीघर पहुँचा, तो वहां उसे कर्मचारी सरफराज मिला, जिसने मीटर बदलने के लिए पहले 13,000 रुपये रिश्वत की मांग की। बाद में सौदा साझा समझौते के तहत छह हजार रुपये में तय हुआ।
शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और जब शिकायतकर्ता ने सरफराज को नकद 6,000 रुपये रिश्वत के रूप में दिए, उसी समय टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद की गई।
👮♂️ आरोपी की पहचान और तैनाती
पुलिस ने आरोपी की पहचान सरफराज पुत्र अब्दुल वाहिद के तौर पर की है, जो किदवई नगर का निवासी है और बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी के रूप में तैनात था। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
📉 भ्रष्टाचार की प्रकृति
यह मामला महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि संविदा कर्मचारी सरकारी विभाग की वर्दी पहने आम जनता को सेवा देने वाला है, लेकिन शर्त यह है कि वह नियमों और कानूनों के तहत ही सेवा प्रदान करे। मीटर बदलने, स्थापित करने या उतारने जैसी प्रक्रिया में प्रक्रिया और शुल्क पहले से निर्धारित होते हैं, और इन्हीं के बजाय अवसरवादिता का लाभ उठाकर घूस लेना गंभीर भ्रष्टाचार माना जाता है।
ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार न सिर्फ उपभोक्ताओं को मानसिक और आर्थिक दबाव में डालता है, बल्कि सरकारी विभागों की छवि को भी धूमिल करता है। आम जनता जब सरकारी कर्मचारियों से सेवा प्राप्त करने के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होती है, तो यह सेवा‑प्रदायी कार्यप्रणाली में गंभीर विसंगति और घोटाले का संकेत देता है।
🛑 विभागीय जांच और कार्रवाई
मेरठ पुलिस की एंटी करप्शन टीम ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए कर्मचारी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नौचंदी थाने में मामला दर्ज किया। पुलिस आगे यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी ने इसके अलावा भी कई अन्य उपभोक्ताओं से अवैध धन लिया था, और उसका नेटवर्क किस तरह से काम करता था।
पुलिस ने बताया कि इस तरह के घूसखोरी के खिलाफ सख्त कानून हैं, और ऐसे कर्मचारियों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दंडित किया जा सकता है।
📊 भ्रष्टाचार रोकने की चुनौती
बिजली सम्बन्धी विभागों में रिश्वतखोरी के मामले एक आम समस्या बनते जा रहे हैं — जहाँ कर्मचारियों के पास ग्राहकों से अवैध धन मांगने और लेने की शक्तियाँ हो सकती हैं, वहीं शिकायतकर्ताओं को शिकायत दर्ज कराने और सबूत जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में अक्सर शिकायतकर्ता को एंटी करप्शन टीम या विजिलेंस विभाग की सहायता लेनी होती है।
ऐसा ही एक मामला कुछ समय पहले सहारनपुर में भी सामने आया था, जहाँ एक संविदा बिजलीकर्मी को ट्यूबवेल कनेक्शन के नाम पर रिश्वत मांगते हुए गिरफ्तार किया गया था। ऐसे लगातार मामले यह संकेत देते हैं कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को रोकने के लिए निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है।

🧠 जनता की प्रतिक्रिया
उपभोक्ता और आम जनता की प्रतिक्रिया इस प्रकार के मामलों को लेकर कड़ी है। बहुत से लोगों का मानना है कि बिना सबूत के अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, और जब तक एंटी करप्शन टीम या विजिलेंस विभाग की विशेष कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे कर्मचारी खुलेआम रिश्वत लेते रहते हैं। कुछ उपभोक्ता यह भी कहते हैं कि शिकायत के बाद भी विभागीय जांच धीमी होती है, जिससे भ्रष्ट कर्मियों को कार्य जारी रखने का समय मिलता है।
यह मामला आम जनता में यह संदेश भी भेजता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना और शिकायत दर्ज कराना ही पहला कदम है, जो आगे की कार्रवाई को संभव बनाता है।
🧾 निष्कर्ष
मेरठ में संविदा बिजलीकर्मी सरफराज को 6,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार करना यह साफ संदेश देता है कि भ्रष्टाचार से सरकार और पुलिस निश्चित रूप से निपटना चाहती हैं। लेकिन इस तरह के मामलों को रोकने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित निगरानी का संपूर्ण ढांचा होना आवश्यक है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि जब उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराते हैं और एंटी करप्शन टीम सटीक तरीके से कार्रवाई करती है, तो भ्रष्टाचार का सफाया संभव है। ऐसे मामलों में पंचायती स्तर के कर्मचारी हों या संविदा बिजलीकर्मी — उन्हें कानून के दायरे में लाना ही जारी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अवैध लालच लेने से पहले सोचे और कानून की भयभीत शक्ति को याद रखे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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