Weapons surrendered : ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर AK-47 सहित हथियार सौंपे ?

Weapons surrendered : ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर AK-47 सहित हथियार सौंपे

Weapons surrendered : ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर AK-47 सहित हथियार सौंपे ?
Weapons surrendered : ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर AK-47 सहित हथियार सौंपे ?

मलकानगिरी (ओडिशा)

ओडिशा में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही सख्त और प्रभावी कार्रवाई के बीच एक बड़ी सफलता सामने आई है। ओडिशा के नक्सल प्रभावित जिले मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 1.84 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह सभी नक्सली ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे इलाकों में लंबे समय से सक्रिय थे और कई गंभीर एवं हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में संगठन के सशस्त्र कैडर, कमांडर स्तर के सदस्य और सक्रिय सहयोगी शामिल हैं। इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान AK-47, INSAS राइफल, SLR, देशी हथियार, विस्फोटक सामग्री और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद सुरक्षा बलों के हवाले किया। यह घटना नक्सल नेटवर्क के कमजोर पड़ने और सरकार की आत्मसमर्पण नीति की सफलता का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इलाकों में थे सक्रिय

जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली ओडिशा के मलकानगिरी जिले तथा छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय थे। यह इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। इन नक्सलियों पर सुरक्षा बलों पर हमले, सड़क निर्माण कार्यों में बाधा, विस्फोट, जबरन वसूली और ग्रामीणों को धमकाने जैसे कई आरोप थे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन 22 नक्सलियों में से कई पर लाखों रुपये का व्यक्तिगत इनाम घोषित था। कुछ वरिष्ठ नक्सली कैडर पर 20 से 25 लाख रुपये तक का इनाम था। कुल मिलाकर इन सभी पर घोषित इनामी राशि 1 करोड़ 84 लाख रुपये थी।

दबाव, विकास और आत्मसमर्पण नीति का असर

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लगातार सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं का विस्तार, और राज्य सरकार की पुनर्वास व आत्मसमर्पण नीति के चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि लगातार दबाव, जंगलों में कठिन जीवन, संगठन के भीतर मतभेद और स्थानीय लोगों का समर्थन खत्म होना उनके इस निर्णय के प्रमुख कारण रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें एक नया जीवन शुरू करने की उम्मीद दी

Weapons surrendered : ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर AK-47 सहित हथियार सौंपे ?
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सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि

पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए यह आत्मसमर्पण एक रणनीतिक सफलता मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हथियारों के साथ आत्मसमर्पण से नक्सलियों की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों का बाहर आना क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है।

मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सहायता दी जाएगी। इसमें आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर शामिल हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

कई हिंसक घटनाओं में संलिप्तता

सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कई बड़े नक्सली हमलों की योजना और क्रियान्वयन में शामिल रहे हैं। इनमें सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले, सड़क निर्माण कार्यों में विस्फोट, मोबाइल टावर जलाना और ग्रामीणों से जबरन वसूली जैसी घटनाएं शामिल हैं। हालांकि आत्मसमर्पण के बाद अब इनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया सरकार की नीति के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।

ओडिशा-छत्तीसगढ़ समन्वय का परिणाम

यह सफलता ओडिशा और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और खुफिया जानकारी साझा करने का भी परिणाम मानी जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों, सर्च ऑपरेशनों और निगरानी से नक्सलियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि इसी तरह विकास, सुरक्षा और संवाद की नीति जारी रही तो नक्सलवाद पर और भी मजबूत प्रहार संभव है।

समाज की मुख्यधारा में लौटने का संदेश

इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर संवाद और विकास का मार्ग ही भविष्य है। सरकार और प्रशासन ने भी दोहराया है कि जो लोग हथियार छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं।

इस प्रकार, ओडिशा के मलकानगिरी में 22 नक्सलियों का आत्मसमर्पण न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक कदम माना जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि निरंतर प्रयास, विकास और मानवीय दृष्टिकोण से उग्रवाद की जड़ों को कमजोर किया जा सकता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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