Chaos in the family : चित्रकूट के डिप्टी जेलर की अचानक मौत, हार्ट अटैक से रास्ते में तोड़ा दम, परिवार में कोहराम

चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। चित्रकूट जिला जेल में तैनात डिप्टी जेलर प्रमोद कुमार कनैजिया की तबीयत बिगड़ने के बाद रास्ते में ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वे बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और छुट्टी लेकर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक हार्ट अटैक आने से उनकी जान चली गई। इस घटना से न केवल परिवार बल्कि जेल विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
दो वर्षों से चित्रकूट जिला जेल में थे तैनात
मृतक प्रमोद कुमार कनैजिया (55 वर्ष) मूल रूप से इटावा जिले के जसवंतनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत राम ताल गांव के निवासी थे। वे स्वर्गीय ख्याली राम के पुत्र थे और बीते करीब दो वर्षों से चित्रकूट जिला जेल में डिप्टी जेलर के पद पर कार्यरत थे। अपने सरल स्वभाव, अनुशासनप्रियता और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे विभाग में एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे।
15 दिनों से चल रहे थे अस्वस्थ
परिजनों के अनुसार, प्रमोद कुमार पिछले करीब 15 दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। इसके बावजूद वे लगातार ड्यूटी पर जा रहे थे। कुछ दिन पहले ड्यूटी के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई थी और वे जेल कार्यालय में गिर पड़े थे। इसके बाद साथियों और अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श लिया।
हालत में सुधार न होने के कारण उन्होंने रविवार को अवकाश लिया और अपने परिजनों के साथ निजी वाहन से घर लौटने का निर्णय लिया। परिवार को उम्मीद थी कि घर पहुंचकर वे आराम करेंगे और बेहतर इलाज कराया जाएगा, लेकिन किसे पता था कि यह यात्रा उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।
रास्ते में पड़ा हार्ट अटैक
रविवार को प्रमोद कुमार अपने स्वजनों के साथ चित्रकूट से इटावा के लिए निकले थे। यात्रा के दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत और बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, इटावा पहुंचने से पहले ही उन्हें तेज हार्ट अटैक पड़ा। हालत गंभीर होती देख परिजन घबरा गए और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सोमवार सुबह उन्हें जिला अस्पताल इटावा लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

परिवार में मचा कोहराम
प्रमोद कुमार की अचानक हुई मौत की खबर जैसे ही परिवार और रिश्तेदारों तक पहुंची, पूरे गांव और परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी मंजू देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कहती नजर आईं कि अगर समय रहते तबीयत का पूरा इलाज हो गया होता, तो शायद यह दिन न देखना पड़ता।
मृतक अपने पीछे दो बेटे लोकेंद्र प्रताप और हरेंद्र प्रताप तथा एक बेटी अंशिका को छोड़ गए हैं। बच्चों पर पिता की छाया अचानक उठ जाने से परिवार पर भावनात्मक के साथ-साथ आर्थिक संकट भी आ खड़ा हुआ है। रिश्तेदार और परिचित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हुए हैं।
जेल विभाग में शोक की लहर
प्रमोद कुमार की मौत की खबर चित्रकूट जिला जेल और जेल प्रशासन में भी शोक का कारण बन गई। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें एक कर्मठ और जिम्मेदार अधिकारी बताया। सहकर्मियों का कहना है कि प्रमोद कुमार अपने कार्य के प्रति बेहद ईमानदार थे और जेल व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में हमेशा सक्रिय रहते थे।
जेल विभाग के अधिकारियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और इसे विभाग के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। कई अधिकारियों ने कहा कि उनका व्यवहार हमेशा सहयोगात्मक रहा और वे जूनियर स्टाफ का भी पूरा ध्यान रखते थे।
काम के दबाव और स्वास्थ्य पर सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों, खासकर जिम्मेदार पदों पर तैनात अधिकारियों के स्वास्थ्य और कार्यदबाव को लेकर सवाल खड़े करती है। अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी बीमारी के बावजूद ड्यूटी करते रहते हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य की अनदेखी हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। प्रमोद कुमार की मौत भी इसी ओर इशारा करती है कि समय रहते स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
अंतिम संस्कार की तैयारी
परिजनों के अनुसार, पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं के बाद शव को गांव लाया जाएगा, जहां पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में पहले से ही शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन से सहयोग की उम्मीद
परिवार ने प्रशासन से सहयोग की उम्मीद जताई है। चूंकि प्रमोद कुमार एक सरकारी अधिकारी थे, इसलिए परिजन चाहते हैं कि उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएं, ताकि परिवार को कुछ राहत मिल सके।
निष्कर्ष
चित्रकूट के डिप्टी जेलर प्रमोद कुमार कनैजिया की अचानक हुई मौत न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे विभाग और समाज के लिए एक गहरा सदमा है। यह घटना यह भी सिखाती है कि व्यस्त और जिम्मेदार जीवन में स्वास्थ्य की अनदेखी कितनी घातक साबित हो सकती है। एक जिम्मेदार अधिकारी, एक पिता और एक पति का इस तरह असमय चले जाना सभी के लिए पीड़ादायक है। पूरा क्षेत्र और विभाग दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की प्रार्थना कर रहा है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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