Gautam Buddh Nagar suspended : योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ा एक्शन, जिला आबकारी अधिकारी गौतमबुद्ध नगर निलंबित

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के स्पष्ट निर्देशों के बाद की गई है।
जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार पर मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग (निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बिक्री) की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से न लेने और अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने का आरोप था। जांच में उन्हें इन शिकायतों के मामलों में दोषी पाया गया, जिसके बाद सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया।
ओवररेटिंग की शिकायतों पर सरकार का सख्त रुख
प्रदेश सरकार को लंबे समय से गौतमबुद्ध नगर जनपद की मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रही थीं। आम नागरिकों और उपभोक्ताओं द्वारा बार-बार यह शिकायत की जा रही थी कि शराब की दुकानों पर सरकारी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जा रही है।
इन शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सरकार के स्तर पर जब इन मामलों की समीक्षा की गई तो पाया गया कि जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार द्वारा न तो दुकानों पर नियमित निरीक्षण किया गया और न ही शिकायतों के निस्तारण में कोई ठोस कदम उठाया गया।
आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर हुई कार्रवाई
आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जिला आबकारी अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रहे हैं और मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग रोकने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मंत्री नितिन अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से सुबोध कुमार को निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संदेश
योगी सरकार की यह कार्रवाई प्रदेश में यह स्पष्ट संदेश देती है कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और जनता के शोषण के मामलों में सरकार किसी भी अधिकारी को नहीं छोड़ेगी, चाहे वह किसी भी स्तर का क्यों न हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह बार-बार कहा गया है कि जनता से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। आबकारी विभाग सीधे राजस्व और आम जनता से जुड़ा हुआ विभाग है, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अनियमितता सरकार की सख्त निगरानी में रहती है।

मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग पर पहले भी रही शिकायतें
गौतमबुद्ध नगर सहित प्रदेश के कई जिलों से समय-समय पर मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार उपभोक्ताओं ने सोशल मीडिया, हेल्पलाइन और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें भी दी थीं।
सरकार द्वारा यह स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि प्रत्येक मदिरा दुकान पर निर्धारित मूल्य सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य है और किसी भी उपभोक्ता से अधिक कीमत वसूलना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद यदि अधिकारी लापरवाही बरतते हैं, तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाती है।
निलंबन के बाद विभागीय जांच की तैयारी
सुबोध कुमार के निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि ओवररेटिंग के मामलों में कहीं अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता तो नहीं है।
यदि जांच में और भी गंभीर तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का साफ कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
जनता में सरकार के फैसले का स्वागत
इस कार्रवाई के बाद आम जनता और उपभोक्ताओं में सरकार के फैसले को लेकर संतोष और विश्वास देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सख्त कदम उठाए जाते रहे, तो मदिरा दुकानों में होने वाली मनमानी और ओवररेटिंग पर निश्चित रूप से अंकुश लगेगा।
कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी योगी सरकार की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा है कि इससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और भ्रष्ट तत्वों में डर पैदा होगा।
आबकारी विभाग को दिए गए सख्त निर्देश
निलंबन की कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि सभी जिलों में मदिरा दुकानों की नियमित और औचक जांच की जाए। इसके साथ ही ओवररेटिंग की शिकायतों के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबरों और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल को और अधिक सक्रिय किया जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि किसी जिले से इस तरह की शिकायतें मिलती हैं, तो संबंधित जिला आबकारी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला
मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग केवल आर्थिक शोषण का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। अधिक कीमत वसूले जाने से विवाद, झगड़े और कानून व्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
इसी कारण योगी सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और आबकारी विभाग को पूरी पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दे रही है।
निष्कर्ष
गौतमबुद्ध नगर के जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार का निलंबन यह साबित करता है कि योगी सरकार अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी तरह अमल कर रही है। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर की गई यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करेगी, बल्कि आम जनता में सरकार के प्रति भरोसा भी बढ़ाएगी।
यह फैसला प्रदेश के अन्य अधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि वे अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतेंगे या जनता के हितों की अनदेखी करेंगे, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार का यह कदम यह संदेश देता है कि भ्रष्टाचार और मनमानी के लिए उत्तर प्रदेश में अब कोई जगह नहीं है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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