STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा ?

STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा

STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा ?
STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा ?

लखनऊ/बिजनौर –

  • उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों को गुमराह कर दबाव बनाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस विभाग समेत अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने मोबाइल नंबर से कॉल कर खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) का डिप्टी डायरेक्टर बताने वाला व्यक्ति आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम ने इस फर्जी आईबी अधिकारी मनोज चौहान को बिजनौर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
  • प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी मनोज चौहान लंबे समय से खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डिप्टी डायरेक्टर बताकर पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों को फोन कर रहा था। वह अपने कथित पद और प्रभाव का हवाला देकर न केवल अधिकारियों पर दबाव बनाता था, बल्कि अपने निजी और तथाकथित “जनहित” के काम भी निकलवाने की कोशिश करता था। कई मामलों में उसने अधिकारियों को यह तक कह दिया कि उसका सीधा संपर्क लखनऊ और दिल्ली के उच्च अधिकारियों से है, जिससे अधिकारी भ्रमित हो जाते थे।
  • एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, मनोज चौहान की गतिविधियों को लेकर काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं। कुछ अधिकारियों को उसके फोन कॉल पर शक हुआ, क्योंकि उसकी बातचीत में कई तकनीकी और प्रशासनिक बातें सही नहीं बैठ रही थीं। इसके बाद मामले की गोपनीय जांच शुरू की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी का इंटेलिजेंस ब्यूरो या किसी भी खुफिया एजेंसी से कोई लेना-देना नहीं है। वह पूरी तरह से फर्जी पहचान के सहारे अपना रौब जमाने की कोशिश कर रहा था।
  • जांच के दौरान एसटीएफ ने आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट्स की भी पड़ताल की। इन रिकॉर्ड्स से यह सामने आया कि मनोज चौहान ने कई जिलों के पुलिस अधिकारियों, थानों और यहां तक कि अन्य प्रशासनिक विभागों के अफसरों से भी संपर्क किया था। वह अक्सर “ऊपर से आदेश” या “सीनियर लेवल का निर्देश” होने की बात कहकर अधिकारियों को मानसिक दबाव में लेने की कोशिश करता था। कुछ मामलों में उसने तबादले, जांच को प्रभावित करने और निजी विवादों में हस्तक्षेप कराने की भी कोशिश की
STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा ?
STF arrested him : आईबी डिप्टी डायरेक्टर बनकर बनाने वाला फर्जी मनोज चौहान बिजनौर से एसटीएफ ने पकड़ा ?

उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम ने पुख्ता सबूत जुटाने के बाद

  • बिजनौर में दबिश दी और मनोज चौहान को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय आरोपी खुद को निर्दोष बताता रहा और कहता रहा कि वह सिर्फ “मदद” करता था, लेकिन जांच एजेंसियों के पास उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद थे। गिरफ्तारी के बाद उसे संबंधित थाने लाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
  • एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि कहीं आरोपी के साथ कोई और व्यक्ति या गिरोह तो शामिल नहीं है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने अब तक कितने अधिकारियों को फोन किया, किन-किन मामलों में दबाव बनाया और क्या किसी अधिकारी ने उसके दबाव में आकर कोई गलत या गैरकानूनी काम किया। यदि ऐसा पाया गया, तो उस एंगल से भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
  • इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि फर्जी पहचान के सहारे लोग किस तरह से सिस्टम का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी संवेदनशील संस्था का नाम लेकर अधिकारियों को भ्रमित करना न सिर्फ गंभीर अपराध है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला भी बन सकता है। इसी कारण से एसटीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस केस को बेहद गंभीरता से ले रही हैं।
  • प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस गिरफ्तारी के बाद सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी केंद्रीय या खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करे, तो उसकी तुरंत पुष्टि की जाए और संदिग्ध स्थिति में उच्च अधिकारियों या पुलिस को सूचना दी जाए। बिना सत्यापन के किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार न किया जाए।
  • फिलहाल आरोपी मनोज चौहान को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है। उस पर फर्जी पहचान अपनाने, सरकारी काम में बाधा डालने, अधिकारियों को धमकाने और धोखाधड़ी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
  • इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे हैं और चाहे कोई कितना भी शातिर क्यों न हो, अंततः उसे अपने किए की कीमत चुकानी पड़ती है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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