Made history : ओडिशा के जुड़वां भाइयों ने JEE Mains में किया कमाल: समान परसेंटाइल हासिल कर बनाया इतिहास

JEE Mains 2026 सेशन 1 के परिणामों में ओडिशा के महरूफ और मसरूर अहमद खान, जो कि जुड़वां भाई हैं, ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से सबको चौंका दिया। दोनों भाइयों ने एक ही परसेंटाइल हासिल किया, जो न केवल उनकी कड़ी मेहनत बल्कि आपसी प्रेरणा और संतुलित प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। यह घटना छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
जुड़वां भाइयों की पृष्ठभूमि
महरूफ और मसरूर खान का परिवार ओडिशा में रहता है। दोनों भाइयों ने कोटा में अपने माता-पिता की सहमति से पढ़ाई की, जो भारत में अग्रणी कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है। कोटा में रहकर उन्होंने समय का प्रभावी उपयोग, अध्ययन की नियमित दिनचर्या और रणनीतिक योजना अपनाई।
भाइयों ने बताया कि उनके बीच हमेशा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रही, जो उन्हें लगातार प्रेरित करती रही। कोई भी विषय कठिनाई में नहीं फंसा, बल्कि दोनों एक-दूसरे के कमजोर क्षेत्रों को समझकर साथ में सुधार करते रहे। उनका कहना था कि “एक-दूसरे की प्रगति देखकर हमारा आत्मविश्वास और बढ़ता था, और कठिन विषयों में मदद भी तुरंत मिल जाती थी।”
JEE Mains में सफलता का रहस्य
महरूफ और मसरूर का कहना है कि सफलता का सबसे बड़ा राज है अनुशासन और सही रणनीति। उन्होंने बताया कि:
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रूटीन और समय प्रबंधन: दोनों भाइयों ने दिन की शुरुआत प्रैक्टिस सेट्स से की और समय प्रबंधन को सर्वोपरि रखा।
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स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: वे हमेशा एक-दूसरे को प्रेरित करते, बिना दबाव बनाए।
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संकट प्रबंधन और मानसिक तैयारी: कठिनाइयों और परीक्षा के तनाव से निपटने के लिए ध्यान, योग और छोटे ब्रेक का पालन किया।
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टेक्निकल सहायता और कोचिंग: कोटा की कोचिंग संस्थाओं से मिली मार्गदर्शन ने उन्हें JEE के पैटर्न और ट्रेंड्स के अनुसार तैयारी करने में मदद की।
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समीक्षा और सुधार: हर टेस्ट के बाद दोनों भाइयों ने आपस में बैठकर गलतियों और कमजोरियों का विश्लेषण किया और सुधार किया।
महरूफ और मसरूर का कहना है कि यह सफलता सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि परिवार, कोचिंग और मित्रों की सहायता से संभव हुई।
समान परसेंटाइल की अनोखी उपलब्धि
दोनों भाइयों ने JEE Mains 2026 सेशन 1 में समान परसेंटाइल हासिल किया, जो कि राष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ उपलब्धि है। यह साबित करता है कि एक समान वातावरण, समान अवसर और समान प्रेरणा से जुड़वां भाई या बहन भी समान प्रदर्शन कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सफलता से छात्रों को यह संदेश मिलता है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, योजना और सहयोगी अध्ययन किसी भी परीक्षा में उत्कृष्ट परिणाम दिला सकता है।

माता-पिता और परिवार की भूमिका
भाइयों ने बताया कि उनके माता-पिता ने हमेशा शांत और सहायक वातावरण बनाए रखा। माता-पिता की यह नीति कि “सफलता और असफलता दोनों में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए,” उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रही। उनकी मां ने कोटा में भाइयों के साथ रहकर सुरक्षित और नियमित जीवन सुनिश्चित किया, जिससे दोनों अपने अध्ययन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सके।
प्रेरणा और संदेश
महरूफ और मसरूर की कहानी सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सारे छात्रों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह बताया कि परीक्षा की तैयारी केवल रटना या घंटों बैठना नहीं है, बल्कि समझ, रणनीति, मानसिक संतुलन और सहयोग का समग्र मिश्रण है।
उनका संदेश है:
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“एक-दूसरे से सीखें, प्रतिस्पर्धा में तनाव न लें।”
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“सफलता केवल अंक या परसेंटाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की भावना शामिल है।”
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“परिवार और मार्गदर्शकों का सहयोग हमेशा मूल्यवान होता है।”
भविष्य की दिशा
महरूफ और मसरूर का अगला कदम उच्च शिक्षा और इंजीनियरिंग में विशेष क्षेत्रों में करियर बनाना है। उनका कहना है कि वे दोनों तकनीकी ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं। उनकी योजना है कि वे इनोवेशन और रिसर्च के माध्यम से समाज और देश की सेवा कर सकें।
विशेष रूप से जुड़वां होने के नाते, दोनों का लक्ष्य है कि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर और प्रतिस्पर्धा में भी सहयोग बनाकर अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करें।
निष्कर्ष
महरूफ और मसरूर खान की कहानी यह दर्शाती है कि समान अवसर, सहयोग और प्रेरणा किसी भी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफलता दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, मानसिक संतुलन और परिवार का सहयोग किसी भी छात्र को असाधारण परिणाम हासिल करने में मदद कर सकता है।
इस जुड़वां जोड़ी की उपलब्धि न केवल ओडिशा के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए प्रेरणास्पद उदाहरण बन गई है। यह सफलता यह भी दर्शाती है कि अगर सही दिशा, सही मार्गदर्शन और आपसी सहयोग हो, तो कोई भी छात्र चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में समान उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है।
महरूफ और मसरूर की कहानी साबित करती है कि संघर्ष, धैर्य और प्रेरणा ही किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल करने की असली कुंजी है। उनके प्रयास और उपलब्धि आने वाले वर्षों में कई छात्रों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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