Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं” ?

Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं”

Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं”
Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं”

ऊर्जा संकट के लंबे दौर से बचने के लिए

  • हर नागरिक को जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग करना होगा: वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान तेल, गैस और उर्वरक सप्लाई बाधित होने से बढ़ी चिंता, ईंधन बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण की अपील
  • उत्तरप्रदेश, संजय साग़र सिंह। वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने दुनिया में बढ़ते युद्ध और गहराते वैश्विक संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव मानवता के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते हालात नहीं बदले गए तो दुनिया की बड़ी आबादी एक बार फिर गरीबी, महंगाई, भुखमरी और बेरोजगारी के दलदल में फंस सकती है।
  • उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में विश्व कई तरह की आपदाओं और संघर्षों से गुजर रहा है। पहले विभिन्न देशों के बीच युद्ध और संघर्ष हुए, वहीं अब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। इसका असर सीधे तौर पर तेल, पेट्रोल, डीजल, गैस, उर्वरक और रासायनिक उत्पादों की वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे अनेक देशों में गंभीर संकट की स्थिति बन गई है।
  • उन्होंने बताया कि इस समय दुनियां एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से महासंकट का रास्ता बेहद नजदीक नजर आ रहा है। खाड़ी में सुलग रही जंग की आग अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने के लिए बेताब हैं। अगर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को तुरंत नहीं रोका गया, तो मानवता ने दशकों में जो कुछ भी हासिल किया है, उस पर पानी फिर जाएगा और दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी दोबारा भुखमरी और गरीबी के दलदल में धंस जाएगी।
  • मुसरफ ख़ान ने कहा कि बड़े और विकसित देश भी इस समय महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और पूरी दुनियां में आम लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट इस कदर बढ़ने वाला है कि दुनिया बहुत जल्द ‘आर्थिक महामंदी’ के दौर में प्रवेश कर जाएगी। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरू मध्य को लेकर है, जिसके खुलने के फिलहाल कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। समंदर में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। इटली, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान सहित विकसित देशों की रातें उड़ चुकी हैं, क्योंकि उनकी पूरी तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह से तहस-नहस हो चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जापान जैसे संपन्न देश को अपनी तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए अपना इमरजेंसी ‘ऑयल रिजर्व’ खोलना पड़ा है। यूरिया और अमोनिया की कीमतों में 65% और ब्यूटेन गैस में 51% से ज्यादा का उछाल आया है। खुद अमेरिका में पेट्रोल-डीजल 44 से 48 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं।
Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं”
Musarraf Khan : वैश्विक संकट पर मुसरफ ख़ान की चिंता: “युद्ध और ऊर्जा संकट दुनिया को फिर गरीबी की ओर धकेल सकते हैं”

उन्होंने यह भी कहा कि

  • अमेरिका और ईरान के बीच हुए खतरनाक तनाव के बाद फिलहाल शांति जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। तेल, गैस, उर्वरक और रासायनिक आपूर्ति में रुकावट के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है। दोनों देश अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में हालात सामान्य होने की उम्मीद अभी कम नजर आती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका पर बहुत ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप की कूटनीति इस समय पूरी तरह से ‘शून्य’ और आत्ममुग्धता का शिकार नजर आ रही है। उन्होंने पूरी दुनियां को महासंकट की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया हैं। इस युद्ध से मिली नाकामी और कुंठा को छिपाने के लिए अब ट्रंप दूसरे देशों को दोष दे रहे हैं। लेक़िन उनकी सनक की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है।
  • उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में यह संकट लंबा खिंचता है तो पूरी दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर पूरी दुनियां की आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक दिखाई देगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के चलते दुनिया के 4.5 करोड़ लोग दाने-दाने को मोहताज हो सकते हैं। वैश्विक बाजार में मचे इस हाहाकार की तपिश अब भारत तक भी पहुंच चुकी है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों के घाटे को पूरा करने और उन्हें मुनाफे में लाने के लिए पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है महंगाई के इसी डर और बदहाली के खिलाफ पूरी दुनियां में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। अगर स्थितियां जल्द सामान्य नहीं हुईं, तो आने वाला समय हर व्यक्ति की जेब पर भारी पड़ने वाला है। आखिर में मुसरफ ख़ान ने ईंधन की बचत करने और विदेशी मुद्रा संरक्षण की दिशा में जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट के लंबे दौर से बचने के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग करना होगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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