Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज ?

Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज

Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज
Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज

मैहर। मां शारदा मंदिर क्षेत्र और काल भैरव मंदिर परिसर में कथित अवैध कब्जों, पुजारियों की नियुक्ति और दर्शनार्थियों से धन वसूली जैसे गंभीर आरोपों को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता चूड़ामणि बढ़ोलिया और उनके परिवार से जुड़े लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार देवी जी रोड और मां शारदा मंदिर परिसर के ऊपरी प्रांगण में स्थित काल भैरव मंदिर क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध रूप से पूजा-पाठ और पुजारी के रूप में कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि इन गतिविधियों के माध्यम से दर्शनार्थियों से अनधिकृत रूप से दान और दक्षिणा के नाम पर धन संग्रह किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार यह भी दावा किया जा रहा है कि इस मामले से संबंधित एक पक्ष पर जबलपुर हाईकोर्ट में केस चला था, जिसमें वर्ष 2024 में निर्णय उनके खिलाफ आया था। इसके बावजूद कथित रूप से वे अब भी मंदिर परिसर में सक्रिय हैं और पूजा-पाठ तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल हैं। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि हाईकोर्ट का आदेश वास्तव में लागू हो चुका है तो उसके बावजूद मंदिर परिसर में उनकी मौजूदगी और गतिविधियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि यह न्यायालय के आदेशों की अवमानना जैसा मामला हो सकता है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।

आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि मंदिर परिसर के भीतर स्थित छोटे-छोटे देवी मंदिरों में भी कथित रूप से बिना किसी अधिकृत अनुमति के पूजा-पाठ और दान संग्रह की गतिविधियां की जा रही हैं। इससे श्रद्धालुओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति उत्पन्न होने की बात कही जा रही है।

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए।

Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज
Alleged illegal encroachments : मैहर में मंदिर व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों को लेकर उठे गंभीर सवाल, प्रशासन से जांच की मांग तेज

शिकायतकर्ताओं ने मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी भी प्रकार से उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी हो रही है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि मां शारदा मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में वहां किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनधिकृत गतिविधि मंदिर की छवि को प्रभावित कर सकती है। इसलिए मंदिर परिसर में पारदर्शी और वैध व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

दूसरी ओर, आरोपों से जुड़े पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। फिलहाल पूरा मामला आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच उलझा हुआ है और प्रशासनिक स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि इस तरह की कोई शिकायत या न्यायालय आदेश से संबंधित मामला उनके संज्ञान में आता है तो उसकी जांच कराई जाती है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है। हालांकि इस प्रकरण में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी मामले में उच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी है और उसका पालन नहीं हो रहा है, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही का प्रावधान होता है। ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य और न्यायालय के आदेशों की स्पष्टता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

फिलहाल यह मामला मैहर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि कोई अनियमितता है तो उस पर उचित कार्रवाई की जा सके।

कुल मिलाकर यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक प्रबंधन और न्यायालय के आदेशों के पालन से जुड़ा एक संवेदनशील मामला बन गया है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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