Questions Raised : सुबह से देर रात तक अवैध शराब बिक्री का खेल, आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

फतेहपुर। जनपद फतेहपुर के हदगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत छिवलहा चौकी क्षेत्र में स्थित एक देशी शराब की दुकान को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। हुसैनगंज रोड स्थित इस दुकान पर निर्धारित समय से पहले और देर रात तक शराब बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके साथ ही ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब दुकानों के संचालन के लिए शासन द्वारा स्पष्ट नियम और समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूद संबंधित दुकान पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि सुबह होते ही दुकान पर शराब बिक्री शुरू हो जाती है, जबकि देर रात 10 बजे के बाद भी ग्राहकों को शराब उपलब्ध कराई जाती है।
लंबे समय से जारी होने का दावा
ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अनुसार यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और कई बार इसकी शिकायत भी की जा चुकी है। बावजूद इसके हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया।
सूत्रों का दावा है कि दुकान पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है और देर रात तक बिक्री जारी रहती है। कई लोगों का कहना है कि निर्धारित समय के बाहर होने वाली बिक्री के कारण आसपास के इलाकों में शांति व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
ओवररेटिंग के आरोप
स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों में सबसे गंभीर मुद्दा शराब की ओवररेटिंग का है। आरोप है कि दुकान पर कई बार ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे लिए जाते हैं।
ग्राहकों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अधिक कीमत को लेकर सवाल उठाता है तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
नियमों की अनदेखी पर सवाल
शराब दुकानों के संचालन के लिए सरकार द्वारा समय सीमा निर्धारित की जाती है ताकि व्यवस्था बनी रहे और कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके। यदि किसी दुकान पर निर्धारित समय से पहले या बाद में बिक्री होती है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह केवल एक दुकान का मामला नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को भी दर्शाता है। लोगों का सवाल है कि आखिर संबंधित विभाग की नजर इस स्थिति पर क्यों नहीं पड़ रही है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे प्रश्न
मामले में सबसे अधिक सवाल आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को क्षेत्र की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और जांच अभियान चलाए जाएं तो सच्चाई सामने आ सकती है। उनका मानना है कि समय-समय पर औचक निरीक्षण न होने के कारण कुछ स्थानों पर नियमों के उल्लंघन की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि शराब की अनियमित बिक्री का असर सामाजिक माहौल पर भी पड़ता है। देर रात तक दुकान खुली रहने से आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कुछ लोगों का कहना है कि रात के समय शराब खरीदने आने वाले लोगों की आवाजाही से क्षेत्र का वातावरण प्रभावित होता है। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी असुविधा होती है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दुकान पर नियमों के विरुद्ध बिक्री हो रही है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
लोगों ने मांग की है कि—
- शराब दुकान के संचालन समय की जांच की जाए।
- ओवररेटिंग की शिकायतों की सत्यता परखी जाए।
- औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।
- नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस धारक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
शासन की मंशा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता और नियंत्रण बनाए रखना होता है। यदि कहीं नियमों का पालन नहीं होता तो इससे शासन की मंशा भी प्रभावित होती है।
ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न होने से लोगों का विश्वास भी कमजोर पड़ सकता है। इसलिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक मानी जाती है।
जांच की जरूरत
मामले में अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आवश्यक है कि प्रशासन तथ्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, वहीं यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
क्षेत्रीय लोगों की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि सभी दुकानों को समान नियमों के तहत संचालित किया जाना चाहिए।
लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और आबकारी विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे।
निष्कर्ष
फतेहपुर जनपद के छिवलहा क्षेत्र में स्थित देशी शराब की दुकान को लेकर उठे सवालों ने आबकारी व्यवस्था और निगरानी तंत्र को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निर्धारित समय से पहले और बाद में शराब बिक्री तथा ओवररेटिंग के आरोपों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। क्षेत्रीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच कराए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। इससे न केवल नियमों का पालन होगा बल्कि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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