Awareness campaign : जल बचाओ, जीवन बचाओ का संदेश: छात्रों ने ली जल संरक्षण शपथ, सीपीआर प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित ?

Awareness campaign : जल बचाओ, जीवन बचाओ का संदेश: छात्रों ने ली जल संरक्षण शपथ, सीपीआर प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित

Awareness campaign : जल बचाओ, जीवन बचाओ का संदेश: छात्रों ने ली जल संरक्षण शपथ, सीपीआर प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित
Awareness campaign : जल बचाओ, जीवन बचाओ का संदेश: छात्रों ने ली जल संरक्षण शपथ, सीपीआर प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित

फतेहपुर।जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प” के प्रेरणादायी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार, 03 अगस्त 2026 को सरस्वती शिशु मंदिर चौक में एक व्यापक जल संरक्षण जागरूकता महाअभियान, सीपीआर (CPR) प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव हेतु होमियोपैथिक औषधि वितरण अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती, दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान तथा डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का नेतृत्व आरोग्य भारती कानपुर प्रांत के पर्यावरण प्रमुख, इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन एवं उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित नागरिकों को जल संरक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वच्छता तथा आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूक करते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत जल संरक्षण के महत्व पर आयोजित जागरूकता सत्र से हुई। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जल प्रकृति का सबसे अनमोल संसाधन है और इसके बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, नदियां और तालाब सूख रहे हैं तथा पानी की बढ़ती बर्बादी भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यदि समय रहते जल संरक्षण को जनआंदोलन नहीं बनाया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में जल बचाने के सरल और प्रभावी उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. अनुराग ने बच्चों को घरों में वाटर बेल लगाने, आरओ (RO) से निकलने वाले व्यर्थ पानी को एकत्र कर पौधों की सिंचाई, साफ-सफाई और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पानी की एक-एक बूंद अमूल्य है और यदि प्रत्येक परिवार छोटी-छोटी सावधानियां अपनाए तो लाखों लीटर पानी की बचत की जा सकती है।

उन्होंने बच्चों से कहा कि वे केवल स्वयं ही जल संरक्षण न करें बल्कि अपने माता-पिता, पड़ोसियों और मित्रों को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जब बच्चे किसी अच्छे संदेश को अपनाते हैं तो उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई। सभी ने संकल्प लिया कि वे पानी की अनावश्यक बर्बादी नहीं करेंगे, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देंगे, जल स्रोतों को स्वच्छ रखेंगे तथा अधिक से अधिक लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। शपथ ग्रहण के दौरान पूरा वातावरण “जल है तो कल है” जैसे नारों से गूंज उठा।

इसके बाद कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण चरण सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण रहा। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को बताया कि किसी भी व्यक्ति का हृदय अचानक कार्य करना बंद कर दे तो प्रारंभिक कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते सही तकनीक से सीपीआर दिया जाए तो किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है।

Awareness campaign : जल बचाओ, जीवन बचाओ का संदेश: छात्रों ने ली जल संरक्षण शपथ, सीपीआर प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित
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उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि एक वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति की हृदयगति रुकने की स्थिति में निर्धारित विधि के अनुसार छाती पर दबाव और कृत्रिम श्वास देकर जीवन बचाने का प्रयास किया जाता है। वहीं एक वर्ष से कम आयु के शिशु के लिए अलग तकनीक अपनाई जाती है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से भी सीपीआर की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे सही तरीके से प्राथमिक सहायता प्रदान कर सकें।

डॉ. अनुराग ने कहा कि सड़क दुर्घटना, हृदयाघात, बिजली का झटका, पानी में डूबना या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में यदि आसपास मौजूद लोग सीपीआर का प्रशिक्षण प्राप्त किए हों तो कई अनमोल जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यालयों में नियमित रूप से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के तीसरे चरण में बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव पर विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. अनुराग ने कहा कि वर्षा ऋतु में जलजनित और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए साफ पानी पीना, स्वच्छ भोजन करना, आसपास सफाई बनाए रखना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भोजन करने से पहले तथा शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना कई संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। उन्होंने बच्चों से विद्यालय और घर दोनों स्थानों पर स्वच्छता अपनाने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 140 विद्यार्थियों को बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से होमियोपैथिक औषधियों का वितरण किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी दी गई।

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती वर्षा शुक्ला ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और सीपीआर जैसे विषय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा की भावना विकसित करते हैं।

विद्यालय के शिक्षक विनोद श्रीवास्तव एवं वंशराज जी सहित अन्य शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को जल संरक्षण और स्वच्छता के संदेश को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जल संरक्षण, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव सेवा जैसे विषय समाज के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़े हुए हैं। यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करे तो जल संकट, स्वास्थ्य समस्याओं और पर्यावरण प्रदूषण जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

यह जागरूकता महाअभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक प्रेरक पहल साबित हुआ। विद्यार्थियों ने जल संरक्षण का संकल्प लिया, जीवन रक्षक सीपीआर तकनीक सीखी, स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं और स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत बनाने का वादा किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि “जल संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और मानव सेवा—यही सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव हैं।”

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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