Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल ?

Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल

Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल
Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल

लेखपालों की मौजूदगी पर उठे सवाल, सरकारी कमरों में सन्नाटा तो निजी ठिकानों पर चहल-पहल शिकायतों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, अब डीएम के औचक निरीक्षण और कार्रवाई की मांग तेज

फतेहपुर। प्रदेश सरकार लगातार राजस्व सेवाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के दावे कर रही है, लेकिन सदर तहसील की जमीनी तस्वीर इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। तहसील परिसर में आने वाले फरियादियों और स्थानीय लोगों की मानें तो कई लेखपाल अपने निर्धारित कार्यालयों में कम और जनसेवा केंद्रों या अन्य निजी स्थानों पर अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो वरासत, खसरा, दायरा, सीमांकन, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व कार्यों के लिए तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।मंगलवार को तहसील परिसर में किए गए अवलोकन के दौरान कई कार्यालयों में अपेक्षित गतिविधियां दिखाई नहीं दीं। दूरदराज से आए कई फरियादियों ने बताया कि संबंधित लेखपालों से मिलने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई मामलों में पूरा दिन बीत जाने के बाद भी काम नहीं हो पाता। इससे लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जनसेवा केंद्रों के आसपास लेखपालों की नियमित मौजूदगी रहती है और राजस्व संबंधी कई प्रक्रियाओं का संचालन भी वहीं से होता है। लोगों का कहना है कि सरकारी भवनों और कार्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन यदि जनता को अपने कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के बजाय अन्य स्थानों पर जाना पड़े तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जाएगी।सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई राजस्व कार्यों में अनावश्यक देरी की जाती है और लोगों को बार-बार दौड़ाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने तहसील की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। लोगों का कहना है कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो फिर सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं हो रही है।सूत्रों के अनुसार, तहसील क्षेत्र में कुछ ऐसे स्थान भी चर्चा में हैं जहां कथित रूप से राजस्व कार्यों से जुड़े लोगों की नियमित बैठकी होती है। यहां तक कि कुछ लेखपालों द्वारा निजी कार्यालय संचालित किए जाने की भी चर्चाएं हैं। यदि इन चर्चाओं में सच्चाई है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न माना जाएगा।

Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल
Complainant in distress : सदर तहसील में ‘जनसेवा केंद्र मॉडल’ पर चल रही राजस्व व्यवस्था? कार्यालय खाली, फरियादी बेहाल

ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी अब तेज हो रही है।उधर तहसील परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। निरीक्षण के दौरान परिसर के कई हिस्सों में गंदगी दिखाई दी। प्रथम और द्वितीय तल के कुछ हिस्सों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। प्रतिदिन बड़ी संख्या में फरियादियों और अधिकारियों की आवाजाही के बावजूद यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद शिकायतों का सिलसिला क्यों नहीं थम रहा? यदि लेखपाल अपने निर्धारित कार्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित हैं तो जनता को उन्हें खोजने के लिए भटकना क्यों पड़ रहा है? यदि शिकायतें निराधार हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा?अब जनता की निगाहें जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी सदर पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि तहसील परिसर का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। साथ ही कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्य निष्पादन और शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।फोन बजता रहा, जवाब नहीं मिला…
सदर तहसील की व्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर उपजिलाधिकारी सदर तथा जिलाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। ऐसे में अब लोगों को प्रशासनिक कार्रवाई और ठोस सुधारात्मक कदमों का इंतजार है।फिलहाल सदर तहसील की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में ऐसी व्यवस्था स्थापित हो पाती है जहां आम नागरिक को अपने वैध कार्यों के लिए बार-बार भटकना न पड़े।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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