
लखनऊ।
विधानसभा लखनऊ के कक्ष संख्या 48 में 13 अगस्त 2026 को शाम 5:30 बजे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं विमुक्त जातियों से संबंधित विधानमंडल दल की कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कमेटी के सभापति, विधायकगण एवं अन्य सदस्य, पूर्व राज्य मंत्री एवं विधायक नगीन/नगीना मनोज पारस सहित संबंधित विभागीय अधिकारी और उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई और विशेष रूप से निजी महाविद्यालयों में आरक्षण के अनुपालन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में संचालित निजी महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन की स्थिति पर जानकारी ली गई। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आने की बात कही गई कि प्रदेश में संचालित बड़ी संख्या में निजी कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। इस पर कमेटी के सदस्यों ने गंभीर नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आरक्षण से संबंधित प्रावधानों का सभी संबंधित संस्थानों में प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। कमेटी की ओर से कहा गया कि आरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पात्र अभ्यर्थियों को इसका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों को निजी कॉलेजों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
निजी कॉलेजों में आरक्षण के अनुपालन पर चर्चा
बैठक का प्रमुख मुद्दा प्रदेश के निजी कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर रहा। सदस्यों ने अधिकारियों से यह जानकारी प्राप्त की कि निजी महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य संबंधित वर्गों के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का किस स्तर तक पालन किया जा रहा है।
समीक्षा के दौरान यदि किसी संस्थान में निर्धारित नियमों के अनुरूप आरक्षण का पालन नहीं हो रहा है तो उसे तत्काल चिन्हित करने और आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया। कमेटी ने अधिकारियों से कहा कि सभी संबंधित संस्थानों की स्थिति का परीक्षण किया जाए और जहां कमियां पाई जाएं, वहां उन्हें दूर कराया जाए।
बैठक में अधिकारियों को आरक्षण व्यवस्था को जल्द से जल्द पूर्ण रूप से लागू कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित विभाग इस मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था की निगरानी करें।
अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर
आरक्षण की समीक्षा के दौरान अधिकारियों के समक्ष यह विषय प्रमुखता से रखा गया कि सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि किसी संस्था में नियमों के विपरीत स्थिति पाई जाती है तो उसके संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैठक में इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए। सदस्यों ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और विमुक्त जातियों के अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
कमेटी ने आरक्षण व्यवस्था की नियमित समीक्षा और निगरानी की आवश्यकता पर भी बल दिया। सदस्यों का कहना था कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित वर्गों को अवसर उपलब्ध कराना है। इसलिए संबंधित वर्गों को उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
विधायक मनोज पारस ने उठाए क्षेत्रीय विकास के मुद्दे
बैठक के दौरान विधायक मनोज पारस ने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े उच्च शिक्षा और कृषि शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दों को भी समिति के समक्ष रखा। उन्होंने नगीना क्षेत्र में एक राजकीय डिग्री कॉलेज स्थापित किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राजकीय डिग्री कॉलेज की आवश्यकता है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थियों को दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की परेशानी कम होगी और अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
विधायक की ओर से शहर नगीना में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव पूर्व में भी समिति के समक्ष रखा जा चुका है। बैठक में इस मांग को पुनः प्रमुखता से रखा गया और क्षेत्र की शैक्षिक आवश्यकताओं को देखते हुए इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया गया।

किरतपुर में राजकीय डिग्री कॉलेज की मांग
विधायक मनोज पारस ने किरतपुर में भी एक राजकीय डिग्री कॉलेज स्थापित किए जाने का मुद्दा समिति के सामने रखा। उनका कहना है कि क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संस्थानों की आवश्यकता है। राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना से स्थानीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
उन्होंने इस संबंध में सरकार और संबंधित विभाग से आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की। क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार को युवाओं के भविष्य और क्षेत्र के विकास से जोड़ते हुए उन्होंने दोनों स्थानों पर राजकीय डिग्री कॉलेज की आवश्यकता बताई।
नगीना में एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय का प्रस्ताव
विधायक मनोज पारस ने नगीना की कताई मिल और कृषि फार्म की जमीन को मिलाकर वहां एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी समिति के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कृषि शिक्षा और अनुसंधान की संभावनाओं को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
उनके अनुसार इस प्रकार की संस्था स्थापित होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कृषि से जुड़े अनुसंधान, तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
कृषि प्रधान क्षेत्रों में उच्च स्तरीय कृषि शिक्षा संस्थान स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार और शिक्षा के नए अवसर मिलने की संभावना रहती है। इसी उद्देश्य से नगीना क्षेत्र में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया।
आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग
बैठक में आरक्षण व्यवस्था को लेकर विधायक और कमेटी के अन्य सदस्यों ने अपनी चिंता व्यक्त की। सदस्यों का कहना था कि आरक्षण से संबंधित नियमों का सभी संबंधित संस्थानों में प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। इसके लिए अधिकारियों को संस्थानों की निगरानी और समीक्षा की प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान राजनीतिक स्तर पर भी आरक्षण के मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। विपक्षी सदस्यों की ओर से भाजपा सरकार के कार्यकाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी की गईं। हालांकि आरक्षण व्यवस्था के वास्तविक अनुपालन और आगे की कार्रवाई के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आधिकारिक स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट और निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
कमेटी की बैठक का उद्देश्य संबंधित वर्गों के अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करना रहा। अधिकारियों से कहा गया कि जहां भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए।
उच्च शिक्षा के विस्तार पर भी जोर
बैठक में आरक्षण के साथ-साथ उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण विषय सामने आए। नगीना और किरतपुर में राजकीय डिग्री कॉलेज तथा नगीना में कृषि विश्वविद्यालय की मांग को क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखा गया।
यदि इन प्रस्तावों पर आगे कार्रवाई होती है तो इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिल सकते हैं। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बैठक के अंत में अधिकारियों से आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन को लेकर जल्द कार्रवाई करने तथा संबंधित संस्थानों की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। वहीं विधायक मनोज पारस द्वारा रखे गए उच्च शिक्षा और कृषि शिक्षा से संबंधित प्रस्तावों पर भी संबंधित स्तर पर विचार किए जाने की अपेक्षा जताई गई।
इस बैठक के माध्यम से एक ओर जहां निजी कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, वहीं दूसरी ओर नगीना और किरतपुर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की मांग भी सामने आई। अब देखना होगा कि अधिकारियों की समीक्षा और समिति के निर्देशों के बाद आरक्षण व्यवस्था में कितना सुधार होता है तथा राजकीय डिग्री कॉलेज और कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े प्रस्तावों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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