Defender of Democracy : संविधान हत्या दिवस पर लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का सम्मान, आपातकाल के काले अध्याय को किया गया याद

बाँदा। लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 का दिन भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद अध्याय माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रतिवर्ष “संविधान हत्या दिवस” के रूप में स्मरण किया जाता है। इसी क्रम में बाँदा स्थित अवस्थी पार्क में संविधान हत्या दिवस की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मानित कर उनके संघर्ष और योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद तथा निवर्तमान क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा मोर्चा प्रकाश पाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के सम्मान के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों ने लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को अंगवस्त्र, माला, नारियल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में जिले के अनेक लोकतंत्र सेनानियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
मुख्य अतिथि प्रकाश पाल ने अपने संबोधन में कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह दिन है, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता के स्वार्थ और अहंकार में पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया। उन्होंने कहा कि उस समय हजारों विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र के समर्थकों को जेलों में डाल दिया गया। नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर कठोर सेंसरशिप लगा दी गई। उन्होंने कहा कि संसद और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं को भी सीमित कर दिया गया था। उनके अनुसार, 21 महीनों तक चले इस दौर में देश के लोकतंत्र को गंभीर चुनौती मिली, लेकिन लोकतंत्र रक्षक सेनानियों ने साहस और दृढ़ता के साथ संघर्ष करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।
प्रकाश पाल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने अधिकारों और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों का त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के उस दौर की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र और संविधान की महत्ता को समझा जा सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती से ही उसका वास्तविक स्वरूप कायम रहता है।
जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि 21 मार्च 1977 तक चले आपातकाल के दौरान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुँची थी। उन्होंने कहा कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी तथा मीडिया की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह कालखंड भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का समय था, जिसे आज भी देश का इतिहास एक काले अध्याय के रूप में याद करता है।
रामकेश निषाद ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता होती है और जनता के अधिकारों की रक्षा करना हर सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संविधान देश का सर्वोच्च दस्तावेज है और इसकी गरिमा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के संघर्ष को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनके त्याग और साहस से आने वाली पीढ़ियों को सीख लेने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी ज्ञात और अज्ञात सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए संविधान की मूल भावना और नागरिक अधिकारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वक्ताओं ने लोकतंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की प्रगति और विकास तभी संभव है, जब संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान किया जाए।
इस अवसर पर लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें अंगवस्त्र, माला, नारियल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके संघर्ष और योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले सेनानियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को याद किया।
कार्यक्रम में भाजपा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता, अखिलेश श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष इंद्रपाल पटेल, पूर्व विधायक राजकरन कबीर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल, अयोध्या सिंह पटेल, निखिल सक्सेना, वंदना गुप्ता, विनोद जैन, ममता मिश्रा, उत्तम सक्सेना, अमित सेठ भोलू, दुर्गा चौरसिया, आनंदी साहू, राजेश गुप्ता रज्जन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी जगतवीर सिंह, ब्रजमोहन गुप्ता, दशरथ प्रसाद और शिवमोहन गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
समापन अवसर पर सभी वक्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए समर्पित सभी सेनानियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संविधान की गरिमा बनाए रखने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों की सहभागिता रही, जिन्होंने लोकतंत्र के मूल्यों को सशक्त बनाए रखने का संदेश दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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