Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल ?

Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हाल ही में अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुई आग की घटना के बाद प्रशासन ने प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों और अवैध क्लीनिकों के विरुद्ध व्यापक अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना, अवैध निर्माणों की पहचान करना और जनसुरक्षा को मजबूत करना बताया गया। हालांकि, शहर के कई पुराने और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों को लेकर स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि इन इलाकों में स्थित कथित अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों और बेसमेंट निर्माणों पर अपेक्षित स्तर की कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजधानी के अमीनाबाद, लाटूश रोड, गुइन रोड, गणेशगंज, रकाबगंज, यहियागंज, नादन महल रोड, नाका, चारबाग, चौक और नख्खास जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अनेक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन बने हुए हैं। इनमें से कुछ भवनों के संबंध में लंबे समय से यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि उनका निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं हुआ या उनमें बेसमेंट का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है, इसलिए यहां सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।

विशेष रूप से अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट का उल्लेख करते हुए कई लोगों ने चिंता जताई है कि यहां स्थित कुछ व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों के संबंध में पूर्व में अनियमित निर्माण की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जाता है कि कुछ मामलों में संबंधित प्राधिकरणों द्वारा कार्रवाई या ध्वस्तीकरण के आदेश भी जारी किए गए थे, लेकिन उन पर प्रभावी अमल नहीं हो पाया। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों की ओर से होना आवश्यक है।

नागरिकों का कहना है कि यदि कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है, तो वही मानक सभी प्रकार के व्यावसायिक भवनों और बाजारों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए। उनका मानना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी क्षेत्र या प्रतिष्ठान को जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में बने बेसमेंट अग्नि सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील होते हैं। यदि बेसमेंट का उपयोग नियमों के विपरीत गोदाम, दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है और वहां पर्याप्त निकासी मार्ग, अग्निशमन उपकरण तथा वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं होती, तो किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि भवन निर्माण उपविधियों और अग्नि सुरक्षा मानकों में बेसमेंट के उपयोग के लिए स्पष्ट प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने बाजारों में संकरी गलियां, अत्यधिक भीड़, अनियोजित पार्किंग, बिजली के तारों का जाल और सीमित प्रवेश-निकास मार्ग किसी भी आपदा की स्थिति में जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे क्षेत्रों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, भवनों की संरचनात्मक जांच, फायर एनओसी की समीक्षा तथा आपातकालीन निकासी व्यवस्था का परीक्षण समय-समय पर किया जाना चाहिए।

Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
Serious questions : राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों में अवैध कॉम्प्लेक्सों पर कार्रवाई की मांग, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय व्यापारिक संगठनों का भी मानना है कि सुरक्षा के प्रश्न को केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जहां भवनों में कमियां हैं, वहां निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें दूर कराने, अग्निशमन उपकरण स्थापित कराने, आपातकालीन निकास सुनिश्चित करने तथा भवन स्वामियों और व्यापारियों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करने की भी आवश्यकता है। उनका कहना है कि सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशे जाने चाहिए।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि राजधानी के सभी प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक परिसरों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। जिन भवनों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाए और जिन भवनों में सुरक्षा संबंधी कमियां हों, उन्हें निर्धारित समय के भीतर दूर कराया जाए। उनका यह भी कहना है कि कार्रवाई केवल शिकायतों या घटनाओं के बाद नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण व्यवस्था के माध्यम से होनी चाहिए।

कई लोगों का यह भी मत है कि यदि किसी भवन के विरुद्ध पूर्व में कोई प्रशासनिक आदेश जारी हुआ है, तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि लोगों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। पारदर्शिता से न केवल प्रशासनिक कार्यवाही पर विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भवन स्वामियों और नागरिकों को भी नियमों के पालन के प्रति प्रेरणा मिलेगी।

शहर के सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया है कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से एक विशेष अभियान चलाकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का सुरक्षा ऑडिट कराएं। इस अभियान में भवनों की वैधता, अग्नि सुरक्षा उपकरण, निकासी मार्ग, विद्युत सुरक्षा, बेसमेंट उपयोग तथा संरचनात्मक सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं की जांच की जाए।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा करने के बजाय समय रहते जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना अधिक प्रभावी और जनहितकारी होगा। इससे जनहानि की संभावना कम होगी और नागरिकों में सुरक्षा के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।

राजधानी जैसे बड़े महानगर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच सुरक्षित भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। नागरिकों की अपेक्षा है कि प्रशासन सभी क्षेत्रों में समान मानकों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करे तथा भीड़भाड़ वाले बाजारों में संभावित जोखिमों को कम करने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए। यदि समय रहते आवश्यक सुधार किए जाते हैं, तो भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शहर को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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