Mandatory to do : कर्नाटक : बिना सहमति के निजी फोटो और वीडियो शेयर करने के मामलों में FIR दर्ज करना अनिवार्य

बेंगलुरु । कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को राज्य भर की पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि वे किसी व्यक्ति की निजी या अंतरंग तस्वीरें और वीडियो उनकी सहमति के बिना प्रकाशित या प्रसारित करने के सभी मामलों में बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज करें। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पुलिस को ब्लैकमेल, सेक्सटॉर्शन और रिवेंज पोर्नोग्राफी जैसे साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है, जिसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी मामले के फैसले में की थी।
मंत्री ने कहा, “ऐसे संवेदनशील मामलों में जो भी पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करेगा या ‘पहले से सहमति’ जैसे गलत आधार का हवाला देकर पंजीकरण में देरी करेगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
खड़गे ने सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज पुलिस महानिरीक्षकों (आईजीपी) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कर्नाटक का हर पुलिस स्टेशन इन नए निर्देशों को सख्ती से लागू करे।
मंत्री के निर्देशों के बाद, कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक एम.ए. सलीम ने राज्य भर में एक समान कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए ‘स्टैंडिंग ऑर्डर 1061’ के तहत विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
दिशानिर्देशों के अनुसार, फोटो या वीडियो लेने की सहमति का मतलब उसे प्रकाशित या प्रसारित करने की सहमति नहीं है।
भले ही पीड़ित ने शुरू में किसी तस्वीर या वीडियो की रिकॉर्डिंग के लिए सहमति दी हो, लेकिन स्पष्ट सहमति के बिना उसे साझा करना या फैलाना एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

यह स्पष्टीकरण भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 77 के स्पष्टीकरण 2 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों पर आधारित है। दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये कानून जेंडर-न्यूट्रल (लिंग-तटस्थ) हैं।
पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे ब्लैकमेल वीडियो, सेक्सटॉर्शन और रिवेंज पोर्नोग्राफी से संबंधित शिकायतें मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करें।
अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया गया है कि वे इस आधार पर शिकायत दर्ज करने से इनकार न करें या देरी न करें कि पीड़ित ने पहले तस्वीरों या वीडियो की रिकॉर्डिंग के लिए सहमति दी थी।
पुलिस को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से गैर-कानूनी सामग्री को तुरंत हटाने या ब्लॉक करने के लिए ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यवर्तियों को तुरंत नोटिस जारी करें। अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया है।
पीड़ितों की सुरक्षा के लिए, आदेश में उनकी पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखने का निर्देश दिया गया है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं और जहां भी संभव हो, महिला पीड़ितों की शिकायतें महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज की जानी चाहिए।
जांच अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जांच के दौरान तकनीकी सहायता के लिए सीआई़डी साइबर डिवीजन के साथ समन्वय करें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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