Writers participated : सावन उत्सव पर श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर के साहित्यकार शामिल

पिलखुवा। सावन मास की रिमझिम फुहारों और प्रकृति की हरियाली के बीच साहित्य और संस्कृति के रंगों से सराबोर एक भव्य अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम, जनपद मेरठ इकाई के तत्वावधान में आयोजित इस काव्य संध्या में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिष्ठित कवियों, कवयित्रियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सावन ऋतु, प्रेम, प्रकृति, भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का आयोजन सायं 7 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया गया, जिसमें साहित्य प्रेमियों ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल ‘चक्रवर्ती’ ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सावन मास की सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय साहित्य में सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि प्रेम, विरह, प्रकृति, उल्लास और संवेदनाओं का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपनी काव्य प्रस्तुति में भावपूर्ण पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा— “आया सावन झूम के, पिया मिलन की आस लगी है इन भीगी सी रातों में।” उनकी प्रस्तुति को उपस्थित साहित्यकारों ने सराहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार ऊषा सूद रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवयित्री बीना गोयल ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ आशा विसारिया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। सरस्वती वंदना के साथ ही साहित्यिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और प्रेरणादायक बन गया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अरुणा पवार एवं श्रीमती राम कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। दोनों संचालिकाओं ने अपनी सहज और प्रभावशाली शैली से कार्यक्रम को क्रमबद्ध एवं रोचक बनाए रखा। उन्होंने सभी साहित्यकारों का परिचय कराते हुए उनकी रचनाओं को मंच प्रदान किया और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।
कवि सम्मेलन में देश के अनेक राज्यों से साहित्यकारों ने ऑनलाइन सहभागिता की। सभी कवियों और कवयित्रियों ने सावन ऋतु के स्वागत में अपनी-अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। किसी ने प्रकृति की हरियाली का मनोहारी चित्रण किया तो किसी ने प्रेम और विरह के भावों को शब्दों में पिरोया। कई रचनाओं में भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों का भी सुंदर समावेश देखने को मिला।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रभारी एवं वरिष्ठ कवयित्री बीना गोयल ने अपनी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने सावन की फुहारों और जीवन की मधुर स्मृतियों को अपनी कविता के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनके अलावा किरण अग्रवाल (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश), योगेश वशिष्ठ (अलवर, राजस्थान), डॉ. मनोज फगवाड़ी (फगवाड़ा, पंजाब), डॉ. सुधा शर्मा, सतीश सहज (मेरठ), रामस्वरूप मयूरेश (झारखंड) तथा नीरज सिंह (अमरावती, महाराष्ट्र) ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।

कवि सम्मेलन में चुन्नी रस्तोगी (मेरठ), रीता गुगलानी (फरीदाबाद, हरियाणा), आशा विसारिया (चंदौसी), ममता गुप्ता (बाराबंकी), मोनिका डागा आनंद (चेन्नई), संध्या श्रीवास्तव ‘सांझ’ (छतरपुर, मध्य प्रदेश), रजनी सिंह (गाजियाबाद), गुलाब सिंह (मेरठ) तथा सीमा मुकुंद अग्रवाल (रायपुर, छत्तीसगढ़) ने भी अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को समृद्ध बनाया।
इसके अतिरिक्त सरिका मेहता (मेरठ), सुरेश कुमार बंछोर (भिलाई), किरण कुमारी (भागलपुर), कुसुम लता जानी (मेरठ), अशोक कुमार जानी (मेरठ), प्रेमचंद (मेरठ), मल्लिका डे (शिलांग), सुनीता छाबड़ा, बीना सिंह रागी (भिलाई), शिखा पांडे (सरायपाली, छत्तीसगढ़), रामदेव शर्मा ‘राही’ (छाता, मथुरा), सुशीला जांगड़ा (जींद, हरियाणा), सुरेश कुमार सुलौदिया (हरियाणा) तथा सरिता श्रीवास्तव (जोधपुर, राजस्थान) सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया।
सावन की थीम पर आधारित इस कवि सम्मेलन में प्रेम, विरह, प्रकृति, भक्ति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित विविध रचनाएँ प्रस्तुत की गईं। हल्की-हल्की वर्षा और सावन के मौसम की पृष्ठभूमि ने ऑनलाइन कार्यक्रम को भी विशेष आकर्षण प्रदान किया। साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति में सावन के महत्व और उसकी भावनात्मक गहराई को शब्दों में जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भाषा, साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए देशभर के साहित्यकारों का एक मंच पर आना भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल ‘चक्रवर्ती’ ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज में सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का संचार करता है। उन्होंने सभी साहित्यकारों को भविष्य में भी इसी प्रकार साहित्य सेवा के लिए प्रेरित किया।
अंत में मुख्य अतिथि ऊषा सूद ने सभी कवियों, आयोजकों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि सावन पर आधारित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ने का भी सफल प्रयास साबित हुआ।
इस प्रकार श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम, मेरठ इकाई द्वारा आयोजित यह ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक प्रेरणादायक और यादगार आयोजन बनकर उभरा, जिसमें देशभर के रचनाकारों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा से सावन उत्सव को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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