Request for verification : विश्व प्राकृतिक संरक्षण दिवस पर केन मां की महाआरती, जन्मदिन पर पौधारोपण का संकल्प और 64 लाख पौधों का सार्वजनिक सत्यापन मांग

बांदा, 29 जुलाई 2026। विश्व प्राकृतिक संरक्षण दिवस के अवसर पर जनपद बांदा में केन नदी के पावन तट पर विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा, बांदा तथा गंगा समग्र, बांदा के संयुक्त तत्वावधान में केन मां की भव्य महाआरती का आयोजन श्रद्धा, आस्था और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। संध्या समय दीपों की अलौकिक रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और भजनों के बीच हुई महाआरती ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा, वृक्षारोपण और गौ संरक्षण का संदेश प्रमुख रूप से दिया गया।
महाआरती के उपरांत उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्मदिन के अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएगा तथा उसकी पाँच वर्षों तक नियमित देखभाल करेगा। आयोजकों ने कहा कि केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका संरक्षण और पालन-पोषण भी उतना ही आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन के विशेष अवसरों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ ले तो बांदा जनपद आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के सबसे हरित और स्वच्छ जनपदों में शामिल हो सकता है। वक्ताओं ने कहा कि पौधारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने जिलाधिकारी बांदा से एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा जनपद में 64 लाख पौधों के रोपण का दावा किया गया है। ऐसे में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि ये पौधे किस स्थान पर लगाए गए, किन विभागों द्वारा लगाए गए, किस योजना के अंतर्गत लगाए गए तथा वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है। इसलिए मांग की गई कि 64 लाख पौधों का स्थानवार, विभागवार और योजनावार पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही प्रत्येक पौधे अथवा पौधारोपण स्थल का जियो-टैग, फोटोग्राफ तथा सत्यापन रिपोर्ट भी आगामी 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक पोर्टल या प्रशासनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम नागरिक भी इस अभियान की वास्तविक स्थिति को देख और समझ सकें।
श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर केवल आंकड़े प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है। यदि वास्तव में इतने बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया है तो उसकी पारदर्शिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। लोगों का कहना था कि जनता यह जानना चाहती है कि 64 लाख पौधे वास्तव में धरती पर मौजूद हैं अथवा केवल सरकारी अभिलेखों तक सीमित हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए पौधारोपण संबंधी सभी सूचनाएं सार्वजनिक की जाएं, जिससे लोगों का विश्वास मजबूत हो और भविष्य के अभियान भी अधिक प्रभावी बन सकें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा, बांदा के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने कहा कि केन मां जनपद की जीवनरेखा हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हर व्यक्ति अपनी माता की सेवा और सम्मान करता है, उसी प्रकार प्रकृति, नदियों और वृक्षों की रक्षा भी हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वृक्ष ही जल के स्रोतों को सुरक्षित रखते हैं, शुद्ध वायु प्रदान करते हैं और समस्त जीव-जगत के जीवन का आधार हैं। यदि वृक्ष नहीं बचेंगे तो जल, पर्यावरण और मानव जीवन सभी संकट में पड़ जाएंगे।
महेश कुमार प्रजापति ने अपने संबोधन में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केन नदी के किनारों पर लगातार वृक्षों की कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। साथ ही उन्होंने गौशालाओं में गोवंश की उपेक्षा पर भी चिंता जताई और कहा कि गौ संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पौधारोपण अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि धरातल पर उसके अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते तो उसकी समीक्षा और सत्यापन आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि लगाए गए प्रत्येक पौधे का सत्यापन कर उसका पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को वास्तविक जानकारी मिल सके।
उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि सभी नागरिक एक नई परंपरा की शुरुआत करें, जिसमें जन्मदिन पर केवल केक काटने तक सीमित न रहकर एक पौधा अवश्य लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्मदिन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ देगा तो आने वाले वर्षों में लाखों नए वृक्ष तैयार होंगे और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण स्वतः संभव हो जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन का समापन “जय केन मां, जय गौ माता” के उद्घोष के साथ किया, जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं ने जोरदार समर्थन किया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने केन मां की पूजा-अर्चना कर जनपद में हरियाली, स्वच्छ पर्यावरण, शुद्ध वायु, जल संरक्षण और गौ संरक्षण की कामना की। सभी ने यह संकल्प भी दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर अधिक से अधिक योगदान देंगे तथा समाज को भी इस दिशा में जागरूक करेंगे। आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम केवल आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता पैदा करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।
इस अवसर पर विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा एवं अन्य सामाजिक संगठनों के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से जिला उपाध्यक्ष अनीता गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष आरती सिंह, अंजू गुप्ता, खाटू श्याम सेवा मंडल के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र द्विवेदी, जिला उपाध्यक्ष आलोक प्रजापति, लोहा सिंह, कृष्ण कुमार धुरिया सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण और गौ संरक्षण के अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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