Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज ?

Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज

Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज
Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज

हापुड़। जनपद हापुड़ के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र स्थित चौकी कुचेसर चौपला में संचालित निजी पैथोलॉजी लैबों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ दिन पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हापुड़ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में अनियमितताएं पाए जाने के बाद दो लैबों को सील किया गया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से महज चार से पांच दिन बाद ही ये लैबें दोबारा संचालित होने लगीं। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी लैब को अनियमितताओं के कारण सील किया गया था, तो फिर इतनी जल्दी उसके दोबारा संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई। लोगों का सवाल है कि क्या संबंधित कमियों को दूर कर लिया गया था, क्या आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी, या फिर किसी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत के कारण यह संभव हुआ। इन सवालों के जवाब अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

बताया जा रहा है कि कुचेसर चौपला क्षेत्र में कई निजी लैब संचालित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खून और अन्य चिकित्सकीय जांच कराने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी लैब के संचालन में नियमों का पालन नहीं किया जाता या आवश्यक मानकों की अनदेखी होती है, तो इसका सीधा प्रभाव मरीजों के उपचार पर पड़ सकता है। चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट किसी भी बीमारी के निदान और उपचार का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए पैथोलॉजी लैबों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान कुछ लैबों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद दो लैबों को सील किया गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सील हटाने की प्रक्रिया कब और किन कारणों से पूरी की गई। लोगों का कहना है कि यदि कमियां दूर किए बिना लैबों को दोबारा संचालित होने दिया गया है, तो यह जनस्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

क्षेत्रवासियों ने आशंका व्यक्त की कि यदि किसी मरीज को गलत जांच रिपोर्ट मिलती है, तो उसके आधार पर गलत उपचार शुरू हो सकता है, जिससे रोगी के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही की कोई भी संभावना अत्यंत संवेदनशील होती है और ऐसे मामलों में विभागीय निगरानी पूरी तरह प्रभावी होनी चाहिए।

अभिभावकों और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जिन लैबों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, उनके संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि उन्हें दोबारा संचालन की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई और क्या सभी निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया।

Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज
Questions Raised : हापुड़ में सील लैबों के दोबारा खुलने पर उठे सवाल, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग हुई तेज

लोगों ने यह भी मांग की है कि जिले में संचालित सभी निजी पैथोलॉजी लैबों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए। यदि किसी लैब में लाइसेंस, उपकरण, योग्य तकनीकी स्टाफ, गुणवत्ता नियंत्रण या अन्य नियमों से संबंधित कोई कमी पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि नियमित निरीक्षण से मरीजों का विश्वास भी बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जब इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो कथित तौर पर यह जवाब मिला कि “पहले मिलो, तब बताएंगे।” इस कथित प्रतिक्रिया के बाद लोगों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस विषय में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी लैबों की नियमित जांच, मान्यता, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। सही जांच रिपोर्ट ही प्रभावी चिकित्सा का आधार होती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि वह सभी लैबों के संचालन पर सतत निगरानी रखे और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई करे।

समाचार लिखे जाने तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि संबंधित लैबों को दोबारा संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई या उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति क्या है। यदि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि सभी पक्षों की जानकारी जनता के सामने आ सके।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों में निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।

YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q

YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews

Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/

Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c

अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।

आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता

 

Check Also

Made an appeal : मारपीट मुकदमे के बाद समझौते का दबाव और जान से मारने की धमकी, पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार

Made an appeal : मारपीट मुकदमे के बाद समझौते का दबाव और जान से मारने की धमकी, पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार ?

Made an appeal : मारपीट मुकदमे के बाद समझौते का दबाव और जान से मारने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *