
पलिया।
क्षेत्र में लगातार बनी हुई बिजली संकट की समस्या को लेकर किसानों और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी क्रम में संगठन के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर पलिया पावर हाउस के लिए रवाना हुए। संगठन ने बिजली आपूर्ति में सुधार, किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं के समाधान तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। संगठन के सदस्यों ने “जय जवान, जय किसान”, “जय श्री चौहान” और “किसान एकता जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ पावर हाउस की ओर कूच किया।
आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण खेती-किसानी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। धान, गन्ना, सब्जियों और अन्य फसलों की सिंचाई समय पर नहीं हो पा रही है। लगातार बिजली कटौती के कारण खेतों में लगे ट्यूबवेल बंद पड़े हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई तो फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा।
संगठन के नेतृत्वकर्ताओं ने कहा कि बिजली केवल किसानों की आवश्यकता नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की मूलभूत जरूरत है। बिजली की कमी से पेयजल आपूर्ति, छोटे उद्योग, व्यापार, विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा घरेलू जीवन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को नियमित और निर्धारित समय के अनुसार बिजली मिलनी चाहिए ताकि आम जनजीवन सामान्य बना रहे।
पलिया पावर हाउस की ओर प्रस्थान करते समय संगठन के कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि प्रशासन और बिजली विभाग का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कदम उठाता है तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, लेकिन यदि समस्याएं लगातार बनी रहती हैं तो लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल किसानों ने बताया कि कई गांवों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं होने से सिंचाई की पूरी योजना प्रभावित हो जाती है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से फसलें सूखने की स्थिति में आ जाती हैं। इसके अलावा बार-बार ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और तकनीकी खराबियों के कारण विद्युत उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।
संगठन के प्रतिनिधियों ने मांग की कि विद्युत विभाग तत्काल पावर हाउस की तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा करे। जहां आवश्यकता हो वहां अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएं, जर्जर विद्युत तार बदले जाएं, ओवरलोड फीडरों का भार कम किया जाए तथा खराब उपकरणों की समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि अस्थायी समाधान के बजाय स्थायी व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।

आंदोलन के दौरान किसानों ने यह भी कहा कि
सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन यदि किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलेगी तो इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए विद्युत आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अन्न उत्पादन करने वाले किसानों को यदि समय पर बिजली जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिलेगी तो कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्य किया जाए।
पलिया पावर हाउस पहुंचने पर संगठन के प्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराने की तैयारी की। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति की वर्तमान स्थिति, तकनीकी कमियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और शीघ्र समाधान की मांग की जाएगी। किसानों ने उम्मीद जताई कि विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।
आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण, संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर किसान हितों की रक्षा तथा बेहतर बिजली व्यवस्था की मांग दोहराई। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन बनाए रखा गया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए है। यदि विभाग समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर बिजली आपूर्ति में सुधार करता है तो क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान “जय जवान, जय किसान”, “जय श्री चौहान” और “किसान एकता जिंदाबाद” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। इन नारों के माध्यम से किसानों ने एकता, संगठन और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। संगठन के नेताओं ने कहा कि किसानों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
फिलहाल किसानों की निगाहें बिजली विभाग और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो क्षेत्र में बिजली व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बढ़ेगी। वहीं संगठन ने स्पष्ट किया है कि किसानों और ग्रामीणों के हितों से जुड़े मुद्दों पर वह भविष्य में भी सक्रिय रहेगा तथा आवश्यक होने पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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