
हापुड़।
जनपद हापुड़ के थाना हाफिजपुर क्षेत्र के गांव नान में मुख्य चौराहे पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर सोमवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति चर्चा का विषय बन गई। जानकारी के अनुसार, गांव के कुछ लोग मुख्य चौराहे पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान प्रशासन को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा निर्माण एवं स्थापना संबंधी गतिविधियों की जानकारी ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के मुख्य चौराहे पर कुछ ग्रामीणों द्वारा प्रतिमा स्थापना का कार्य शुरू किया गया था। बताया गया कि इस कार्य के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी। सूचना मिलने के बाद थाना हाफिजपुर के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र चौधरी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे मामले का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित लोगों से प्रतिमा स्थापना के लिए आवश्यक अनुमति और अभिलेखों की जानकारी मांगी।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि किसी भी सार्वजनिक स्थान, मुख्य चौराहे, सड़क अथवा यातायात मार्ग पर किसी धार्मिक प्रतिमा या स्थायी संरचना की स्थापना बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकती। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक स्वीकृति और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में कानून-व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने प्रतिमा स्थापना का कार्य तत्काल रोकने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना था कि जब तक नियमानुसार अनुमति प्राप्त नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण या प्रतिमा स्थापना नहीं की जा सकती। इस दौरान गांव के कई लोग भी मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखी।
बताया गया कि ग्रामीणों ने धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की स्थायी धार्मिक संरचना स्थापित करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं।
थाना प्रभारी देवेंद्र चौधरी ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि यदि वे प्रतिमा स्थापना करना चाहते हैं तो पहले संबंधित सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति सार्वजनिक चौराहे पर प्रतिमा स्थापित करना संभव नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि सामान्यतः सार्वजनिक मार्गों, मुख्य चौराहों और यातायात प्रभावित करने वाले स्थानों पर स्थायी धार्मिक संरचनाओं की स्थापना के संबंध में नियम और दिशा-निर्देश लागू होते हैं। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन विभिन्न पहलुओं—जैसे यातायात व्यवस्था, सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधा और कानून-व्यवस्था—को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है।

प्रशासन ने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि
यदि वे धार्मिक प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं तो किसी मान्यता प्राप्त मंदिर परिसर, धार्मिक स्थल या निजी स्वामित्व वाली भूमि पर नियमानुसार स्थापना कर सकते हैं। इससे धार्मिक गतिविधियां भी सुचारु रूप से संचालित होंगी और सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए रखी। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि सभी पक्षों से बातचीत कर मामले का समाधान नियमों के अनुरूप किया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य या धार्मिक स्थापना करने से पहले संबंधित विभागों से अनुमति लेना आवश्यक होता है। यह व्यवस्था सभी धर्मों और सभी प्रकार की सार्वजनिक संरचनाओं पर समान रूप से लागू होती है। इसका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना को रोकना है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की बात कही, वहीं अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि नियमों के अनुरूप प्रस्तुत किसी भी आवेदन पर विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की स्थायी स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संयम बरतने और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करने का अनुरोध किया। किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और पुलिस ने क्षेत्र में आवश्यक सतर्कता बनाए रखी।
प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धार्मिक प्रतिमा या स्थायी संरचना की स्थापना से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति या समूह बिना अनुमति ऐसा कार्य करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि सभी नागरिकों का दायित्व है कि वे कानून का पालन करें और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
फिलहाल नान गांव का यह मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। संबंधित पक्षों को आवश्यक अनुमति संबंधी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि किसी भी निर्णय में कानून, सार्वजनिक हित और सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि क्षेत्र में शांति, सौहार्द और सामाजिक सद्भाव बना रहे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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