last farewell : देहरादून में बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

देहरादून। असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए एएन-32 सैन्य परिवहन विमान हादसे में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को रविवार को देहरादून में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर उनके सेलाकुई स्थित आवास पर पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम दर्शन के लिए लोगों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
अंतिम यात्रा के दौरान वातावरण “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज-चांद रहेगा, प्रशांत तेरा नाम रहेगा” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। हर आंख नम थी और हर चेहरे पर गर्व और दुख का मिश्रित भाव दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों, सेना के अधिकारियों और परिजनों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।
भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह को सलामी दी। उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किए गए और अंतिम विदाई के समय उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें अंतिम प्रणाम किया। इस दौरान क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त रहा और बड़ी संख्या में नागरिक अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार, स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए एएन-32 विमान हादसे में शहीद हुए थे। यह दुर्घटना वायुसेना के लिए एक बड़ा नुकसान मानी जा रही है, जिसमें कई पहलुओं पर जांच जारी है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए वायुसेना और संबंधित जांच एजेंसियां विस्तृत जांच कर रही हैं।
प्रशांत सिंह अपने पीछे अपने माता-पिता और पत्नी को छोड़ गए हैं। महज तीन वर्ष पूर्व ही उनका विवाह हुआ था। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, उनकी मां और पत्नी का करुण क्रंदन देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। परिवार के सदस्य बार-बार उन्हें निहारते रहे और अंतिम बार उन्हें छूकर विदा किया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि प्रशांत सिंह बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे। उनका सपना था कि वह भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनकर देश की रक्षा करें। अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार किया और देश सेवा का मार्ग चुना।

उनकी चचेरी बहन रितु ने बताया कि प्रशांत हमेशा से ही साहसी और अनुशासित स्वभाव के थे। उन्होंने कहा कि परिवार को उनकी शहादत पर गर्व है, लेकिन इस अपूरणीय क्षति को कभी भरा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी मांग की कि जोरहाट विमान हादसे की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आ सकें।
अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वीर साथी को सलामी दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। पूरे क्षेत्र में देशभक्ति और शोक का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों का कहना था कि प्रशांत सिंह जैसे जांबाज अधिकारी देश की असली ताकत हैं, जिनकी बदौलत देश सुरक्षित रहता है।
प्रशासन की ओर से भी अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे क्षेत्र में ट्रैफिक नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
यह अंतिम विदाई केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे देश का शोक बन गई। प्रशांत सिंह की शहादत ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि देश की रक्षा में हमारे जवान किस तरह अपने प्राणों की आहुति देते हैं।
अंत में परिजनों और उपस्थित लोगों ने उन्हें नम आंखों से विदा करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की और उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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