Blood Donation : विकास भवन में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया जीवनरक्षा का संकल्प ?

Blood Donation : विकास भवन में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया जीवनरक्षा का संकल्प ?
Blood Donation : विकास भवन में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया जीवनरक्षा का संकल्प ?

हापुड़।

इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के संयोजकत्व एवं चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में बुधवार शाम विकास भवन सभागार में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व से अवगत कराना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में सीपीआर देकर किसी व्यक्ति का जीवन बचाने की आवश्यक जानकारी प्रदान करना था। गोष्ठी में विकास भवन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और समाज सेवा से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विकास अधिकारी श्रीमती साधना दीक्षित उपस्थित रहीं, जबकि परियोजना निदेशक श्री शेषमणि सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। दोनों अतिथियों ने इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान और प्राथमिक चिकित्सा संबंधी जानकारी प्रत्येक नागरिक के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में मानव सेवा की भावना को मजबूत करते हैं और लोगों को दूसरों की सहायता के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने रक्तदान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है। रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे किसी भी प्रकार की शारीरिक कमजोरी नहीं आती। इसके विपरीत नियमित रक्तदान शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय होती है।

डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि एक यूनिट रक्त कई मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों में विभाजित किया जाता है, जिससे चार अलग-अलग मरीजों की सहायता की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसी कारण रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि एक व्यक्ति का छोटा-सा योगदान कई परिवारों की खुशियां बचा सकता है।

उन्होंने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया कि पुरुष और महिलाएं दोनों ही रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान से पहले प्रत्येक दाता की स्वास्थ्य जांच की जाती है। यदि हीमोग्लोबिन का स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है और व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ पाया जाता है, तभी उससे रक्त लिया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाले दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

डॉ. अनुराग ने बताया कि जिला अस्पताल में कई ऐसे मरीज भर्ती होते हैं जिनके परिजन उपलब्ध नहीं होते या आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं कर पाते। ऐसे जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी लगातार जिला अस्पताल के रक्त केंद्र के माध्यम से रक्त उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी भी जरूरतमंद मरीज को रक्त के अभाव में परेशान न होने देना है।

उन्होंने सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे स्वयं नियमित रक्तदान करें तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि समाज में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या बढ़ेगी तो किसी भी मरीज को रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और अनेक लोगों की जान समय पर बचाई जा सकेगी।

रक्तदान जागरूकता गोष्ठी के बाद डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि यदि किसी व्यक्ति का हृदय अचानक काम करना बंद कर दे तो अस्पताल पहुंचाने से पहले सीपीआर देकर उसकी जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि समय पर दिया गया सीपीआर कई मामलों में जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होता है।

Blood Donation : विकास भवन में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया जीवनरक्षा का संकल्प ?
Blood Donation : विकास भवन में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित, अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया जीवनरक्षा का संकल्प ?

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि एक वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति के हृदय गति रुकने की स्थिति में प्रति मिनट लगभग 120 बार छाती की स्टर्नम हड्डी पर उचित दबाव देना चाहिए तथा आठ बार कृत्रिम सांस देकर हृदय और फेफड़ों को सक्रिय रखने का प्रयास करना चाहिए। वहीं एक वर्ष या उससे कम आयु के शिशु के लिए प्रति मिनट लगभग 60 बार दबाव और आठ बार कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा समय पर किया गया सीपीआर मरीज के अस्पताल पहुंचने तक उसके जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. अनुराग ने प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर की सही तकनीक का प्रदर्शन भी किया और उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया। प्रतिभागियों ने बड़ी रुचि के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया और आपातकालीन स्थिति में सही तरीके से प्राथमिक उपचार देने की जानकारी प्राप्त की।

मुख्य अतिथि श्रीमती साधना दीक्षित ने कहा कि रक्तदान और सीपीआर दोनों ही मानव जीवन की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इनकी मूलभूत जानकारी प्राप्त कर ले तो समाज में अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के इस प्रयास की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता बताई।

विशिष्ट अतिथि श्री शेषमणि सिंह ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए ऐसे सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से रक्तदान करने और सीपीआर प्रशिक्षण का उपयोग जरूरत पड़ने पर समाजहित में करने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान जिला अस्पताल रक्त केंद्र से अशोक शुक्ल, जो इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की रक्तसंचरण समिति के संयोजक हैं, ने भी रक्तदान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इस अवसर पर बृजकिशोर जी एवं सुरेश श्रीवास्तव, जो संस्था की प्रबंध समिति के सदस्य हैं, भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग दिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नियमित रक्तदान करने, अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का उपयोग कर मानव जीवन की रक्षा में योगदान देने का संकल्प लिया। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित यह जागरूकता गोष्ठी और प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में सेवा, संवेदनशीलता और मानवता के संदेश को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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