
रामपुर, बिलासपुर।
प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा एक महत्वपूर्ण ज्ञापन राज्य मंत्री बल्देव सिंह औलख के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को प्रेषित किया गया। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से आच्छादित किए जाने तथा अन्य ज्वलंत समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर प्रमुख मांग
संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षकों को 4 फरवरी 2026 से कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का शासनादेश जारी किया जा चुका है। परंतु शिक्षणेत्तर वर्ग—जिसमें लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं—को इस सुविधा से वंचित रखा गया है।
कर्मचारियों ने इसे उनके साथ सौतेला व्यवहार बताते हुए कहा कि यह निर्णय अल्पवेतन भोगी एवं निर्बल वर्ग के कर्मचारियों के हितों के विपरीत है। संगठन का कहना है कि पूर्व में कभी भी माध्यमिक शिक्षा विभाग के किसी शासनादेश में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस प्रकार अलग नहीं किया गया था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन्हें इस सुविधा से बाहर रखा जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
पूर्व में भी उठाई जा चुकी है मांग
संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि इस समस्या को लेकर पूर्व में भी कई बार प्रयास किए जा चुके हैं। प्रदेशीय संगठन की कार्यकारिणी द्वारा बैठक में प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार एवं मुख्य सचिव को जनपदवार ज्ञापन प्रेषित किए गए थे।
इसके अतिरिक्त, 14 जुलाई 2026 को प्रांतीय आवाहन पर मुख्यमंत्री एवं शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद 30 जुलाई को पुनः मंडल आयुक्त के माध्यम से भी ज्ञापन प्रेषित किया गया, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं का उल्लेख
ज्ञापन में केवल कैशलेस चिकित्सा सुविधा ही नहीं, बल्कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी उल्लेख किया गया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से आर्थिक, सामाजिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
संघ ने सरकार से अनुरोध किया कि इन सभी ज्वलंत मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं, जिससे कर्मचारियों को राहत मिल सके और वे अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकें।
राज्यमंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
बिलासपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राज्य मंत्री बल्देव सिंह औलख को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारियों ने उनसे आग्रह किया कि वे इस प्रकरण को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें और कैशलेस चिकित्सा सुविधा से शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी आच्छादित कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर चिंता
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा खर्च अत्यधिक बढ़ चुका है। ऐसे में अल्प वेतन पाने वाले शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्थिति में उपचार कराना अत्यंत कठिन हो जाता है। कई बार कर्मचारियों को कर्ज लेकर इलाज कराना पड़ता है, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती होने के समय धन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।
संगठन की मांग—समानता के आधार पर मिले सुविधा
संघ ने स्पष्ट कहा कि जब शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा चुकी है, तो उसी विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने मांग की कि समानता के आधार पर सभी कर्मचारियों को एक समान सुविधा प्रदान की जाए।
प्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस अवसर पर ज्ञापन देने वालों में जिला अध्यक्ष मुनीष कुमार मिश्रा, जिला महामंत्री सोमपाल सिंह, संघर्ष समिति संयोजक एवं प्रभारी राजाराम तथा रजनीश सहित कई कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की।
कर्मचारियों में उम्मीद की किरण
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि सरकार इस गंभीर विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगी। संगठन ने कहा कि यदि कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी जारी किया जाता है तो यह हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे संगठनात्मक स्तर पर आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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