
डिजिटल डेस्क।
देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। मुंबई से लेकर हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान तक भारी बारिश, भूस्खलन, जलभराव और तेज हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है। कई जगह सड़कें बंद हो गई हैं, यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है और बिजली तथा पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों के लिए जारी चेतावनियों ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के हुई भूस्खलन की घटना ने बारिश के बीच बढ़ते खतरे को सामने ला दिया। गौसिया चॉल क्षेत्र में करीब 3:45 बजे पहाड़ी का एक हिस्सा और भारी मलबा तीन मकानों पर जा गिरा। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया गया।
हादसे में तीन बच्चों समेत छह लोगों को अस्पताल में मृत घोषित किया गया, जबकि रमेश यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस तरह हादसे में सात लोगों की जान चली गई। सात अन्य लोग घायल बताए गए हैं, जिनका अस्पताल में उपचार जारी है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मुंबई की मेयर रीतू तावड़े ने भी घटनास्थल का दौरा किया और राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली। मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य में 313 सड़कें बंद बताई गई हैं। कई क्षेत्रों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित है। इसके अलावा 65 पेयजल योजनाओं और 112 ट्रांसफार्मरों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इससे कई इलाकों में बिजली और पानी की व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
जिलावार स्थिति देखें तो मंडी में सबसे अधिक 117 सड़कें बंद हैं। चंबा में 74, कुल्लू में 60, शिमला में 36 और सिरमौर में 13 सड़कें बंद बताई गई हैं। सड़कें बंद होने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई स्थानों पर सड़क बहने, मलबा आने और पहाड़ियों से पत्थर गिरने की घटनाओं ने खतरा बढ़ा दिया है।
राज्य सरकार के अनुसार, 30 जून से अब तक बारिश और मौसम संबंधी आपदाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी अवधि में 911 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बनी हुई है, इसलिए प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
18 अगस्त तक मौसम पर नजर रखने की जरूरत
हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने कई स्थानों पर भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 17 अगस्त तक बारिश को लेकर चेतावनी और 18 अगस्त तक मौसम संबंधी अपडेट जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लगातार बारिश के कारण कमजोर पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। सड़कें बाधित होने के साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखने और आवश्यकता न होने पर जोखिम वाले क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।
ओडिशा में बालासोर और भद्रक के लिए रेड अलर्ट
ओडिशा में भी मौसम का असर तेज दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। बालासोर और भद्रक में गुरुवार सुबह भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। दोनों जिलों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने का अनुमान है।
इसके अलावा जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, अंगुल, क्योंझर, मयूरभंज और ढेंकनाल में अत्यधिक बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई है। आंधी और बिजली गिरने का खतरा देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन से परेशानी
जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में भी भारी बारिश के कारण स्थिति प्रभावित हुई है। किश्तवाड़, कठुआ और पुलवामा में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं। किश्तवाड़ में सड़क का एक हिस्सा बह जाने के कारण गुलाबगढ़-मचैल मार्ग प्रभावित हुआ। इससे इस मार्ग पर आवागमन में परेशानी हुई।
कठुआ में भूस्खलन के कारण बनी-बसोहली मार्ग का टिकरी मोड़ बंद हो गया। वहीं पुलवामा के अवंतिपोरा क्षेत्र में श्रीनगर-अनंतनाग मार्ग पर जलभराव होने के बाद यातायात रोकना पड़ा। लगातार बारिश के बीच प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उत्तराखंड में मद्महेश्वर यात्रा रोकी गई
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भी बारिश और भूस्खलन का असर देखने को मिल रहा है। मौसम की स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए मद्महेश्वर यात्रा को सात अगस्त से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। पहाड़ों में लगातार बारिश के कारण रास्तों पर मलबा आने और सड़कें प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौसम में सुधार होने और रास्तों की स्थिति सामान्य होने के बाद यात्रा को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया जा सकता है।
राजस्थान में भी बारिश से बिगड़े हालात
राजस्थान में मानसून सक्रिय बना हुआ है और कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई है। चित्तौड़गढ़ के बासी में 227 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी है। उदयपुर में उदय सागर बांध का जलस्तर 21 फीट से ऊपर पहुंचने के बाद उसके दो गेट एक-एक फुट खोलकर पानी की निकासी की गई।
कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की मुकुंदरा सुरंग में करीब एक फुट पानी भर गया। पानी भरने के कारण सुरंग को बंद करना पड़ा और यातायात प्रभावित हुआ। जयपुर सहित कई शहरों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने गुरुवार को राजस्थान के सभी जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
कई राज्यों में एक साथ मौसम का बिगड़ा मिजाज
देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ भारी बारिश, भूस्खलन, जलभराव और तेज हवाओं का असर दिखाई देना चिंता का विषय है। खासतौर पर पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ है। मुंबई जैसे महानगर में भी पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा गिरने की घटना ने शहरी इलाकों में बारिश से जुड़ी चुनौतियों को उजागर किया है।
ओडिशा में रेड अलर्ट, जबकि कई राज्यों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी होने के कारण आने वाले दिनों में मौसम पर लगातार नजर रखना जरूरी है। भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की स्थिति तेजी से पैदा हो सकती है।
प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन करना और जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचना जरूरी है। खासकर उन स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जहां पहले से सड़क, बिजली या पेयजल व्यवस्था प्रभावित है।
फिलहाल देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच प्रशासन भी सतर्क है। लोगों की सुरक्षा के लिए राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति कैसी रहती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम संबंधी अपडेट पर ध्यान देना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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