Training : जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को हरियाणा के लिए किया रवाना, मोटे अनाज की उन्नत खेती का मिलेगा प्रशिक्षण ?

 

Training : जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को हरियाणा के लिए किया रवाना, मोटे अनाज की उन्नत खेती का मिलेगा प्रशिक्षण ?
Training : जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को हरियाणा के लिए किया रवाना, मोटे अनाज की उन्नत खेती का मिलेगा प्रशिक्षण ?

हापुड़।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जनपद हापुड़ के किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से पांच दिवसीय कृषक एक्सपोजर विजिट एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिलाधिकारी हापुड़ श्रीमती कविता मीना ने किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर हरियाणा के लिए रवाना किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 अगस्त से 24 अगस्त 2026 तक चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा में आयोजित किया जाएगा।

कृषि विभाग, जनपद हापुड़ द्वारा आयोजित इस राज्य से बाहर के प्रशिक्षण एवं कृषक एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य किसानों को मोटे अनाजों की आधुनिक एवं उन्नत खेती की तकनीकों से अवगत कराना है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को खेती की नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन, प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।

इस अवसर पर जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने किसानों के दल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना बेहद आवश्यक है। किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल करनी चाहिए, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके और उनकी आय में वृद्धि हो।

उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों की खेती का महत्व लगातार बढ़ रहा है। कंगनी, कोदो, रागी यानी मंडुआ, बाजरा, ज्वार और सांवा जैसे मोटे अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन फसलों को बढ़ावा देने से एक ओर किसानों को वैकल्पिक एवं लाभकारी फसल विकल्प मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज में पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे हरियाणा में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूरी रुचि के साथ भाग लें और कृषि वैज्ञानिकों से अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में लागू करने का प्रयास किया जाना चाहिए। नई तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में सुधार कर सकते हैं।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को मोटे अनाजों की विभिन्न फसलों से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें कंगनी, कोदो, रागी/मंडुआ, बाजरा, ज्वार और सांवा जैसी फसलों की उन्नत खेती पर विशेष जोर रहेगा। किसानों को इन फसलों की बुवाई, उत्पादन तकनीक, देखभाल तथा बेहतर कृषि प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा प्रशिक्षण में मोटे अनाजों के प्रसंस्करण से जुड़े पहलुओं पर भी किसानों को जानकारी प्रदान की जाएगी। कृषि उत्पादों को बेहतर तरीके से संसाधित करने और उनके उपयोग को बढ़ाने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। इससे कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ने में सहायता मिल सकती है।

Training : जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को हरियाणा के लिए किया रवाना, मोटे अनाज की उन्नत खेती का मिलेगा प्रशिक्षण ?
Training : जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किसानों के दल को हरियाणा के लिए किया रवाना, मोटे अनाज की उन्नत खेती का मिलेगा प्रशिक्षण ?

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से संवाद करने का अवसर भी मिलेगा। किसान अपनी खेती से संबंधित समस्याओं और जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे तथा वैज्ञानिक सुझाव प्राप्त कर सकेंगे।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत मोटे अनाजों को बढ़ावा देने का उद्देश्य खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करना भी है। मोटे अनाजों को कृषि प्रणाली में शामिल करने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है। इससे किसानों को अलग-अलग फसलों के विकल्प मिलते हैं और कृषि क्षेत्र को अधिक विविध बनाने में मदद मिलती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी होनी चाहिए। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई जानकारी और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

कृषक एक्सपोजर विजिट के माध्यम से किसान अन्य क्षेत्रों में अपनाई जा रही कृषि पद्धतियों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकेंगे। इससे उन्हें अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। किसानों के लिए ऐसे कार्यक्रम अनुभव आधारित सीखने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी किसानों को आवश्यक जानकारी दी। किसानों के दल को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हरियाणा रवाना किया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद किसान अपने अनुभवों और प्राप्त तकनीकी जानकारी को अन्य किसानों के साथ भी साझा कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपनिदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी तथा संबंधित विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को गंभीरता से समझने और उसे व्यवहारिक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देने से कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर इन फसलों की मांग और उपयोग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस दिशा में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में भी किसानों को जानकारी मिलने की उम्मीद है।

कृषि क्षेत्र में लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच किसानों के लिए वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक का महत्व बढ़ गया है। मौसम, उत्पादन लागत और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के बीच किसान यदि वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हैं तो खेती को अधिक प्रभावी और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

जिलाधिकारी द्वारा किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किए जाने के साथ ही पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। 20 अगस्त से 24 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में किसान हरियाणा स्थित चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय में उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

जिलाधिकारी ने किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को नई तकनीकों को व्यवहार में अपनाने के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के प्रत्येक सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा कृषि विशेषज्ञों से अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने का आह्वान किया।

कृषि विभाग की यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को नई फसलों और तकनीकों की जानकारी मिलने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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