The Path of Life : स्वयं सहायता समूह से दिलकश जहां को मिली नई पहचान, हुनर ने बदली जिंदगी की राह ?

The Path of Life : स्वयं सहायता समूह से दिलकश जहां को मिली नई पहचान, हुनर ने बदली जिंदगी की राह
The Path of Life : स्वयं सहायता समूह से दिलकश जहां को मिली नई पहचान, हुनर ने बदली जिंदगी की राह

हापुड़, 11 सितंबर 2026। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई राह दिखाई है। हापुड़ विकासखंड की ग्राम पंचायत सलाई निवासी 28 वर्षीय दिलकश जहां भी ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी का उदाहरण हैं, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

एमए और एलएलबी तक शिक्षा प्राप्त कर चुकीं दिलकश जहां समूह से जुड़ने से पहले एक विद्यार्थी थीं। उस समय वह अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहती थीं। पढ़ाई पूरी करने के बावजूद उनके सामने यह सवाल था कि वह ऐसा क्या कार्य करें, जिससे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग करने के साथ-साथ समाज में सम्मान और पहचान हासिल कर सकें। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनके मन में कई बार यह विचार आता था कि गरीबी से बाहर निकलने के लिए उन्हें किसी अवसर की आवश्यकता है।

दिलकश जहां के अनुसार, उन्हें जिस अवसर की तलाश थी, वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से मिला। स्वयं सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत साबित हुआ। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन आएगा।

उन्होंने बताया कि एक दिन ग्राम पंचायत में आईसीआरपी दीदियों के साथ ब्लॉक से ब्लॉक मिशन प्रबंधक मनीष कुमार और वीरेन्द्र कुमार पहुंचे थे। बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्र की गरीब एवं वंचित महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही थी। दिलकश जहां ने भी बैठक में दी जा रही जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना। उन्हें लगा कि स्वयं सहायता समूह उनके लिए आगे बढ़ने का एक बेहतर माध्यम हो सकता है। इसके बाद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया।

दिलकश जहां वर्तमान में खुशी स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उनका समूह गरिमा महिला प्रेरणा संकुल समिति, जसरूपनगर से जुड़ा हुआ है। समूह में कुल 11 सदस्य हैं और सभी सदस्य मिलकर हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी तैयार करने का कार्य करती हैं। इस काम ने समूह की महिलाओं को रोजगार का अवसर देने के साथ उनके हुनर को बाजार तक पहुंचाने का माध्यम भी उपलब्ध कराया है।

समूह से जुड़ने के बाद दिलकश जहां ने स्वयं सहायता समूह से एक लाख रुपये की धनराशि लेकर हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी के कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने समूह की अन्य सदस्यों के साथ मिलकर आभूषण तैयार करने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों को बाजार में पहचान मिलने लगी और समूह की महिलाएं स्थानीय स्तर के साथ-साथ जिले और अन्य प्रदेशों में आयोजित होने वाले सरस मेलों में भी भाग लेने लगीं।

दिलकश जहां स्वयं भी विभिन्न सरस मेलों में प्रतिभाग करती हैं। इन मेलों में समूह द्वारा तैयार की गई हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी के स्टॉल लगाए जाते हैं और उत्पादों की बिक्री की जाती है। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। समूह की ओर से तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री से प्रतिवर्ष लगभग तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी होने की जानकारी दी गई है। इससे समूह की सभी सदस्य महिलाएं उत्साहित हैं और अपने काम को और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

दिलकश जहां बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका जीवन काफी अलग था। वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं और उन्हें लगता था कि आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कोई अवसर मिलना जरूरी है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला, बल्कि घर से बाहर निकलकर बैठकों में भाग लेने और अन्य महिलाओं के साथ संवाद करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा।

वह समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय बैठकों में भाग लेने लगीं। इन बैठकों ने उन्हें अपने विचार व्यक्त करने और दूसरे लोगों के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया। धीरे-धीरे उनकी जीवनशैली में भी बदलाव आया। समूह की महिलाओं के बीच आपसी सहयोग की भावना मजबूत हुई। किसी सदस्य के सामने समस्या आने पर अन्य महिलाएं उसके साथ खड़ी होतीं और मिलकर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करतीं।

इस तरह स्वयं सहायता समूह ने उनके लिए केवल आर्थिक गतिविधि का माध्यम बनने के बजाय सामाजिक बदलाव का रास्ता भी खोला। समूह की महिलाओं के बीच सहयोग और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की भावना ने उन्हें मजबूत बनाया। आर्थिक विकास के साथ उनके सामाजिक विकास को भी नई गति मिली।

आज दिलकश जहां के परिवार की वार्षिक आय लगभग चार से पांच लाख रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। परिवार की आर्थिक स्थिति में आए इस सुधार ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। जिस भविष्य को लेकर वह कभी चिंतित रहती थीं, आज उसी भविष्य को लेकर उनके भीतर नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई देता है।

The Path of Life : स्वयं सहायता समूह से दिलकश जहां को मिली नई पहचान, हुनर ने बदली जिंदगी की राह
The Path of Life : स्वयं सहायता समूह से दिलकश जहां को मिली नई पहचान, हुनर ने बदली जिंदगी की राह

दिलकश जहां की कहानी की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक 11 मार्च 2024 को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच का संचालन करने का अवसर मिलना भी है। वह इसे अपने जीवन का ऐसा अवसर मानती हैं, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री के मंच का संचालन करने का अवसर मिलेगा।

दिलकश जहां के अनुसार, एक समय ऐसा था जब उन्हें अपने ही क्षेत्र से बाहर बहुत कम लोग जानते थे। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न मंचों पर काम करने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिले। सरस मेलों में भागीदारी और सामाजिक गतिविधियों ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मंच संचालन का अवसर मिलने के बाद उनकी पहचान और व्यापक हुई।

वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और मिशन से जुड़े अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम नहीं किया, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि गरीब और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयासों से महिलाओं में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है।

दिलकश जहां की कहानी यह दर्शाती है कि सही अवसर, मेहनत और सामूहिक प्रयास के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार और बाजार से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है और परिवारों की आय बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण बनती है।

हापुड़ की दिलकश जहां आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करती हैं। विद्यार्थी जीवन की चिंता से लेकर स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनने और फिर अपने हुनर के माध्यम से पहचान बनाने तक का उनका सफर यह संदेश देता है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकती हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर दिलकश जहां ने हैंडमेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी के माध्यम से अपने समूह की महिलाओं को आर्थिक गतिविधि से जोड़ा और अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दिया। साथ ही विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सामाजिक पहचान भी बनाई। उनकी यह उपलब्धि स्वयं सहायता समूहों की उस सोच को मजबूत करती है, जिसमें महिलाओं को केवल सहायता प्रदान करने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने पर जोर दिया जाता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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