Direct charges : UPI MDR को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण, उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं; ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 कटने का दावा गलत ?

Direct charges : UPI MDR को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण, उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं; ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 कटने का दावा गलत
Direct charges : UPI MDR को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण, उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं; ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 कटने का दावा गलत

नई दिल्ली।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार, UPI के सभी लेन-देन पर कोई नया उपभोक्ता शुल्क लागू नहीं किया जा रहा है। विशेष रूप से व्यक्ति से व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) लेन-देन पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि नए UPI फ्रेमवर्क का P2P लेन-देन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए भेजी जाने वाली राशि पर कोई लेन-देन शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क या अन्य चार्ज नहीं लगाया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, P2P लेन-देन UPI के कुल लेन-देन मूल्य का लगभग 70 प्रतिशत हैं और ये MDR व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के UPI भुगतान MDR से मुक्त रहेंगे। इसके अतिरिक्त, छोटे व्यापारियों के लिए बनाए गए शून्य-MDR प्रावधान के अंतर्गत आने वाले लेन-देन भी शुल्क मुक्त रहेंगे। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस व्यवस्था के कारण लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे

₹5,000 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹25 और ₹50 की बात क्यों उठी?

UPI शुल्क को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि ₹5,000 का भुगतान करने पर ₹25 और ₹10,000 का भुगतान करने पर ₹50 अतिरिक्त देने पड़ेंगे। इस दावे को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह व्यापारी पक्ष से संबंधित भुगतान व्यवस्था में लागू होने वाला शुल्क है।

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसे सरकार या NPCI द्वारा उपभोक्ताओं से टैक्स के रूप में वसूला जाता है। यह भुगतान प्रणाली से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच वितरित होने वाला व्यावसायिक शुल्क है, जिससे भुगतान व्यवस्था के संचालन और उसके विस्तार से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है।

इसलिए ₹5,000 के भुगतान पर ग्राहक के खाते से स्वतः ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 कटने की बात को वर्तमान सरकारी व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। UPI ऐप प्रदाताओं को भी प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने से रोका गया है।

छोटे व्यापारियों के लिए क्या है व्यवस्था?

सरकार ने छोटे व्यापारियों को लेकर भी अलग प्रावधान रखा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी, स्ट्रीट वेंडर और आसपास की छोटी दुकानों जैसी श्रेणियों को शून्य-MDR व्यवस्था का लाभ मिलता रहेगा। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत का बोझ न पड़ने देना है।

इसके अलावा, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार, इन दोनों प्रावधानों के कारण लगभग 96 प्रतिशत P2M लेन-देन पर MDR का प्रभाव नहीं पड़ेगा। MDR केवल निर्दिष्ट बड़े व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा।

MDR क्या है?

Merchant Discount Rate यानी MDR भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से जुड़ी एक व्यावसायिक शुल्क व्यवस्था है। यह किसी सामान्य उपभोक्ता कर की तरह नहीं है। भुगतान प्रणाली में बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और अन्य संबंधित संस्थाएं अलग-अलग भूमिका निभाती हैं तथा MDR से प्राप्त राशि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में संबंधित भागीदारों के बीच वितरित की जाती है।

सरकार ने इसी कारण MDR को Digital Payments Tax के रूप में बताने से इनकार किया है। अगस्त 2026 में वित्त मंत्रालय ने भी कहा था कि भविष्य में MDR लागू होने की स्थिति में यह केवल सीमित व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा और UPI उपयोगकर्ताओं से कोई लेन-देन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

Direct charges : UPI MDR को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण, उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं; ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 कटने का दावा गलत
Direct charges : UPI MDR को लेकर सरकार का स्पष्टीकरण, उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं; ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 कटने का दावा गलत

सरकार ने 96 प्रतिशत का आंकड़ा कैसे बताया?

वित्त मंत्रालय के 15 सितंबर के स्पष्टीकरण के अनुसार, MDR केवल लगभग 4 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। इसके विपरीत लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन या तो ₹2,000 तक की श्रेणी में आते हैं या छोटे व्यापारियों के लिए उपलब्ध शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। इसलिए सरकार का कहना है कि अधिकांश व्यापारी भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।

यह आंकड़ा व्यापारी लेन-देन की संख्या से संबंधित है, इसे सीधे सभी UPI लेन-देन या कुल भुगतान राशि का 96 प्रतिशत नहीं समझना चाहिए। P2P लेन-देन के लिए अलग से सरकार ने पूर्ण शुल्क-मुक्त व्यवस्था स्पष्ट की है।

MDR लागू होने का उद्देश्य

सरकार के अनुसार, UPI का विस्तार लगातार बढ़ रहा है और इसके लिए भुगतान प्रणाली का तकनीकी ढांचा, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन क्षमता मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। अगस्त 2026 में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि भविष्य की MDR व्यवस्था का उद्देश्य UPI को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना और डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

सरकार ने यह भी कहा है कि UPI नागरिकों के लिए निःशुल्क बना रहेगा और रोजमर्रा के लेन-देन पर उपभोक्ताओं से शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस संबंध में सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे UPI शुल्क को लेकर प्रसारित होने वाले अपुष्ट संदेशों पर भरोसा न करें और आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच तथ्य क्या हैं?

UPI MDR को लेकर राजनीतिक नेताओं की ओर से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं की ओर से इस व्यवस्था को लेकर आलोचनात्मक सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा है कि आम उपभोक्ताओं से UPI भुगतान पर कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि P2P UPI भुगतान निःशुल्क रहेंगे, जबकि ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार, MDR केवल निर्दिष्ट बड़े व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा।

इसलिए ₹5,000 पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 सीधे ग्राहक के खाते से कटने की धारणा सरकारी स्पष्टीकरण से मेल नहीं खाती। MDR को उपभोक्ता टैक्स के रूप में प्रस्तुत करना भी सही नहीं है। हालांकि, व्यापारी स्तर पर MDR की व्यवस्था लागू होने से भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में शुल्क का वितरण किस प्रकार होगा और उसका व्यावहारिक प्रभाव अलग-अलग व्यापारियों पर कितना पड़ेगा, यह संबंधित नियमों और उनके कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सरकार की स्थिति स्पष्ट है—UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेगा, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन भी इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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