
मुंबई।
दिवंगत दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग वाला कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों नेताओं की कथित सार्वजनिक टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और हर्जाना अदा करने की मांग की गई है। दोनों नेताओं को इन मांगों पर जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उनकी बेटी की मौत की नए सिरे से जांच कराने के लिए चलाए जा रहे कानूनी प्रयासों को राजनीतिक मकसद से जोड़कर पेश किया गया। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा और उनकी बेटी के मामले में न्याय की मांग को नुकसान पहुंचा है। कानूनी नोटिस के अनुसार, सतीश सालियान ने अपने प्रयासों को अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट कराने और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जांच आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में बताया है।
नोटिस में कथित आपत्तिजनक बयानों को वापस लेने के साथ-साथ बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, माफी को प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों के जरिए सार्वजनिक करने की मांग भी नोटिस में शामिल है। सतीश सालियान की ओर से कहा गया है कि यदि तय अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
यह कानूनी नोटिस ऐसे समय आया है जब दिशा सालियान की जून 2020 में हुई मौत से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई ने यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की है। मामले में कई लोगों के नाम और भूमिकाएं जांच के दायरे में होने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की जांच और तथ्यों का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना बाकी है।
दिशा सालियान की मौत वर्ष 2020 में मुंबई में हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। उनकी मौत के बाद से ही मामले को लेकर अलग-अलग दावे और सवाल सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे हैं। समय-समय पर इस मामले की जांच को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आती रही है। अब सीबीआई की एफआईआर और सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के कानूनी नोटिस के बाद मामला फिर चर्चा में है।
आदित्य ठाकरे ने हाल में सोशल मीडिया पर दिशा सालियान से किसी तरह की व्यक्तिगत पहचान या मुलाकात से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें मामले से जोड़ने के प्रयास राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार हैं। उन्होंने अपने खिलाफ चल रही बातों को लेकर आपत्ति जताई है और कहा है कि मामले की आधिकारिक जांच को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। उनकी ओर से लगाए गए इन आरोपों और सतीश सालियान की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
सतीश सालियान लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र और नए सिरे से जांच की मांग करते रहे हैं। उनके पक्ष की ओर से मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी जांच का विषय है। सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब जांच एजेंसी मामले से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

कानूनी नोटिस का एक महत्वपूर्ण पहलू 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग है। सतीश सालियान का कहना है कि कथित टिप्पणियों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और उनकी न्याय की मांग प्रभावित हुई। मानहानि संबंधी कानूनी कार्रवाई में संबंधित पक्ष अपने दावों के समर्थन में कानूनी आधार और सामग्री प्रस्तुत करते हैं। नोटिस भेजा जाना अदालत द्वारा किसी आरोप को सही ठहराया जाना नहीं है। यदि विवाद आगे अदालत तक जाता है तो दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
नोटिस में सात दिन की समयसीमा दिए जाने की बात सामने आई है। इस अवधि में आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख की ओर से क्या जवाब दिया जाता है, इस पर भी नजर रहेगी। यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद का समाधान नहीं होता है तो सतीश सालियान की ओर से आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला कानूनी नोटिस, राजनीतिक बयानों और सीबीआई जांच—तीनों स्तरों पर आगे बढ़ रहा है।
दिशा सालियान मामले में सामने आ रहे घटनाक्रम को देखते हुए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपों और सिद्ध तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखा जाए। सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर जांच की मांग की है और इसी क्रम में उन्होंने दोनों नेताओं को मानहानि का नोटिस भेजा है। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान से किसी परिचय से इनकार करते हुए अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। अनिल देशमुख से जुड़े कथित बयानों को लेकर भी अब कानूनी नोटिस में आपत्ति दर्ज कराई गई है।
अब आगे की स्थिति सीबीआई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जाने वाले साक्ष्य, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं 500 करोड़ रुपये के हर्जाने वाले नोटिस पर दोनों नेताओं का जवाब भी इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। फिलहाल मामले से जुड़े सभी गंभीर आरोप जांच के अधीन हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार करना आवश्यक है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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