Hindi as the National Language : हिंदी दिवस पर कवयित्रियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए शंखनाद किया ?

Hindi as the National Language : हिंदी दिवस पर कवयित्रियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए शंखनाद किया
Hindi as the National Language : हिंदी दिवस पर कवयित्रियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए शंखनाद किया

पिलखुवा। श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्याधाम के अंतर्राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी कवयित्रियों एवं रचनाकारों ने सहभागिता की और हिंदी भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा तथा समाज में उसकी भूमिका पर अपनी रचनाओं के माध्यम से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर कवयित्रियों ने अपनी आवाज बुलंद की। साहित्यकारों ने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को आपस में जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बीना गोयल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि देश की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी के प्रति सम्मान और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ रीता गुगलानी ने सरस्वती वंदना के साथ किया। सरस्वती वंदना के बाद साहित्यिक कार्यक्रम का विधिवत आगाज हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने हिंदी भाषा की विशेषताओं और उसकी महत्ता को अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने रखा। जैसे-जैसे कविताओं का पाठ हुआ, कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक रंग में रंगता चला गया। रचनाकारों ने हिंदी की गरिमा, भारतीय संस्कृति, साहित्य और भाषा के प्रति प्रेम को केंद्र में रखकर अपनी प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम में श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्याधाम के संस्थापक एवं वरिष्ठ कवि-साहित्यकार अशोक गोयल “चक्रवर्ती” का सभी रचनाकारों को विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी का साहित्यिक संसार अत्यंत व्यापक है और हिंदी ने देश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्ति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अपनी सुंदर रचनाएं भी प्रस्तुत कीं, जिन्हें उपस्थित साहित्यकारों ने सराहा।

साहित्यिक कार्यक्रम का सुंदर संचालन श्रीमती आँचल जैन ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाते हुए विभिन्न रचनाकारों को अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए आमंत्रित किया। संचालन के दौरान हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा गया। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग शहरों से शामिल हुईं कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर साहित्यिक वातावरण को समृद्ध किया।

आमंत्रित मुख्य अतिथि श्रीमती प्रतिभा गर्ग ने भी अपनी अत्यंत सुंदर रचना प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद विभिन्न स्थानों से आईं कवयित्रियों ने क्रमशः अपनी कविताएं और साहित्यिक रचनाएं प्रस्तुत कीं। रचनाओं में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार और साहित्य के विभिन्न रंग देखने को मिले।

कार्यक्रम में कटनी से आँचल जैन, फरीदाबाद से रीता गुगलानी, गाजियाबाद से रजनी सिंह, चंदौसी से आशा बिसारिया, छतरपुर से संध्या श्रीवास्तव ‘सॉंझ’, प्रयागराज से सविता मेहरोत्रा ‘सुगंधा’, मंजू दलाल, मंजरी, डॉ. कु. शशि जायसवाल, सरिता श्रीवास्तव, जबलपुर से रश्मि पांडेय, दिल्ली से सुषमा भंडारी, दिल्ली से ऊषा सूद, आशा शर्मा, बिहार से श्वेता कुमारी चौबे, अहमदाबाद से ज्योत्सना चोपड़ा, डॉ. अनीता देवी सहित अनेक रचनाकार उपस्थित रहीं।

Hindi as the National Language : हिंदी दिवस पर कवयित्रियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए शंखनाद किया
Hindi as the National Language : हिंदी दिवस पर कवयित्रियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए शंखनाद किया

कार्यक्रम में शामिल सभी रचनाकारों ने हिंदी भाषा की महत्ता को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। किसी रचना में हिंदी की साहित्यिक समृद्धि का उल्लेख किया गया तो किसी प्रस्तुति में भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना दिखाई दी। कवयित्रियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विभिन्न शहरों से जुड़े रचनाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक साहित्यिक स्वरूप प्रदान किया।

हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कविताओं का पाठ करना नहीं रहा, बल्कि भाषा के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना को मजबूत करना भी रहा। साहित्यकारों ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी भाषा की समृद्धि उसके साहित्य, रचनाकारों और पाठकों से जुड़ी होती है। हिंदी साहित्य के रचनाकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के विभिन्न विषयों को सामने लाने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग प्रमुख रूप से सामने आई। अंतर्राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बीना गोयल ने इस विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए और हिंदी के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार हिंदी को सम्मान और व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित कवयित्रियों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

साहित्यिक कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से रचनाकारों के जुड़ने से हिंदी साहित्य की विविधता भी सामने आई। अलग-अलग क्षेत्रों और शहरों से आईं कवयित्रियों ने अपनी शैली और विषयों के माध्यम से कार्यक्रम को समृद्ध किया। इससे कार्यक्रम में साहित्यिक संवाद का वातावरण बना रहा। रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए हिंदी भाषा के प्रति अपने जुड़ाव को अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ कवयित्री ऊषा सूद ने समापन किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कवयित्री बीना गोयल ने कार्यक्रम में शामिल सभी आगंतुक रचनाकारों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से रचनाकारों को अपनी बात रखने और हिंदी भाषा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिलता है।

हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित यह साहित्यिक कार्यक्रम हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित रहा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से जुड़ी कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी की महत्ता को स्वर दिया। आयोजन के दौरान हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, साहित्य के प्रति प्रेम और रचनात्मक अभिव्यक्ति का वातावरण बना रहा। कवयित्रियों द्वारा हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आवाज उठाना कार्यक्रम का प्रमुख विषय रहा। कार्यक्रम के समापन के साथ सभी रचनाकारों ने हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने की भावना व्यक्त की।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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