From Kanpur to Unnao : कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की मांग, कानपुर से उन्नाव तक पैदल मार्च ?

From Kanpur to Unnao : कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की मांग, कानपुर से उन्नाव तक पैदल मार्च
From Kanpur to Unnao : कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की मांग, कानपुर से उन्नाव तक पैदल मार्च

कानपुर/उन्नाव। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन ने संघर्ष के चौथे चरण के तहत पैदल मार्च निकाला। संगठन के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और अन्य सक्रिय सदस्यों ने कानपुर के फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा से पैदल मार्च शुरू किया। संगठन की मुख्य मांग माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, विशेष रूप से लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी शिक्षकों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाना है।

संगठन की ओर से बताया गया कि पैदल मार्च निर्धारित रूट पर आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर मगरवारा के पास नेशनल हाईवे के समीप अधिकृत सक्षम अधिकारी एवं तहसीलदार सदर उन्नाव श्री मनीष द्विवेदी ने प्रतिनिधिमंडल से संपर्क कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया। अधिकारी ने संगठन के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री के निर्देशों से अवगत कराया और पैदल मार्च समाप्त करने का अनुरोध किया। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने आपस में विचार-विमर्श किया और फिलहाल पैदल मार्च स्थगित करने की घोषणा कर दी।

शिक्षक दिवस पर हुई घोषणा को लेकर कर्मचारियों की मांग

माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन के प्रादेशिक महामंत्री शिवबहादुर यादव ने विज्ञप्ति जारी कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। संगठन का कहना है कि बाद में इस घोषणा को लागू करने की दिशा में शासनादेश जारी किया गया, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा से अलग रख दिया गया।

संगठन के अनुसार, शासनादेश संख्या 1728/15-8-2026-3091 दिनांक 4 फरवरी 2026 के माध्यम से शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई। संगठन का आरोप है कि शिक्षणेत्तर वर्ग यानी लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है और एसोसिएशन लगातार सरकार के सामने अपनी मांग रख रही है।

शिवबहादुर यादव ने कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विद्यालयों के प्रशासनिक और दैनिक कामकाज में लिपिक तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में संगठन चाहता है कि चिकित्सा सुविधा के मामले में उनके साथ अलग व्यवहार न किया जाए।

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में तय हुआ था संघर्ष कार्यक्रम

एसोसिएशन के प्रादेशिक महामंत्री के अनुसार, कर्मचारियों की मांग को लेकर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था। 21 जून 2026 को हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मांग को लेकर चरणबद्ध संघर्ष कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। संगठन ने इसी कार्यक्रम के तहत आंदोलन को आगे बढ़ाया।

संगठन की ओर से बताया गया कि संघर्ष के पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक विभिन्न माध्यमों से सरकार का ध्यान इस मांग की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया। अंतिम एवं चौथे चरण के तहत 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और सक्रिय सदस्यों के साथ पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया गया।

इसके तहत कानपुर के फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा से पैदल मार्च शुरू किया गया। मार्च शुरू होने से पहले संगठन के संरक्षक मंडल के सदस्यों हरिशचन्द्र दीक्षित, सुरेश शर्मा, राज कुमार श्रीवास्तव और देवेन्द्र सारस्वत ने हरी झंडी दिखाकर प्रतिनिधिमंडल एवं कर्मचारियों को रवाना किया।

From Kanpur to Unnao : कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की मांग, कानपुर से उन्नाव तक पैदल मार्च
From Kanpur to Unnao : कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की मांग, कानपुर से उन्नाव तक पैदल मार्च

गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ पैदल मार्च

फूलबाग से शुरू हुए पैदल मार्च में संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सक्रिय सदस्य शामिल हुए। कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। संगठन द्वारा पहले से निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार मार्च को आगे बढ़ाया जा रहा था।

पैदल मार्च के दौरान कर्मचारियों की मुख्य मांग कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शामिल करने की रही। संगठन का कहना है कि शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी एक ही शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए चिकित्सा सुविधा के मामले में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।

मार्च कानपुर से आगे बढ़ते हुए उन्नाव जनपद के मगरवारा क्षेत्र के पास पहुंचा। यहां नेशनल हाईवे के समीप मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकृत अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल से संपर्क किया।

तहसीलदार सदर उन्नाव ने लिया ज्ञापन

मगरवारा के पास तहसीलदार सदर उन्नाव श्री मनीष द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन संगठन के प्रतिनिधिमंडल से प्राप्त किया। संगठन के अनुसार, अधिकारी ने मुख्यमंत्री के निर्देशों से प्रतिनिधियों को अवगत कराया और उनसे पैदल मार्च समाप्त करने का अनुरोध किया।

अधिकारी द्वारा ज्ञापन प्राप्त किए जाने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने मौके पर ही आपस में विचार-विमर्श किया। चर्चा के बाद संगठन ने पैदल मार्च को आगे नहीं बढ़ाने और उसे फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।

इस प्रकार कानपुर के फूलबाग से शुरू हुआ पैदल मार्च उन्नाव के मगरवारा क्षेत्र के पास पहुंचकर समाप्त कर दिया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि ज्ञापन सरकार तक पहुंचाने के बाद आगे की स्थिति और सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई के आधार पर भविष्य की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में असंतोष

संगठन के प्रादेशिक महामंत्री शिवबहादुर यादव के अनुसार, कैशलेस चिकित्सा सुविधा से शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बाहर रखे जाने से प्रदेशभर के कर्मचारियों में असंतोष है। संगठन का कहना है कि विद्यालयों में लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिक्षकों के साथ मिलकर शिक्षा व्यवस्था के संचालन में योगदान देते हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें और उनके परिवारों को चिकित्सा उपचार के दौरान आर्थिक राहत मिल सकती है। संगठन इसी आधार पर सरकार से मांग कर रहा है कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाया जाए।

संगठन ने शासनादेश में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के शामिल न होने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पदाधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे को कई स्तरों पर उठाया जा चुका है और अब आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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