What a foundation : जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो तेरी और मेरी क्या बुनियाद  ?

What a foundation : जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो तेरी और मेरी क्या बुनियाद 
What a foundation : जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो तेरी और मेरी क्या बुनियाद

श्री रामचंद्र जी ने त्रेतायुग में सुग्रीव के भाई बाली को मारा उसका बदला द्वापर युगमे श्री कृष्ण रूपमे श्री रामचंद्र जी और शिकारी रूपमे बाली… श्री कृष्ण जी के पैर की तलुवे में चमकते पदम् को शिकारी ने हिरन की आँख समझ कर बिषाक्त तीर मारा… जिसकी वजह से कृष्ण जी की मृत्यु हुई…जब शिकारी ने कृष्ण जी से गलती की माफ़ी मांगी तब कृष्ण जी ने सभी बाते बताकर कहा की तेरा और मेरा हिसाब चुकता हुवा…
जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो…तेरी और मेरी क्या बुनियाद है..??
मर्यादा परुषोत्तम श्री रामचंद्र जी चौदह बर्ष जंगल में पशुपंछि के साथ रहे.. माता सीता मांसाहारी रावण के कैद में रहे.. उन्होंने बासी फल,फूल खाकर अपना गुजारा किया लेकिन उन्होंने कभी किसी जिव को मरकर नहीं खाया…!!
श्री कृष्ण जी बचपन से ही पशुपंछि के साथ रहे लेकिन उन्होंने ने भी मांस नहीं खाया… जिसने सबरी के जूठे बेर खाया,सुदामा को सच्चा मित्र बनाया हम उसी का नाम लेकर इतने कुकर्म करते है…. फिर भी में सनातनी हिन्दू कहाता हु….लानत है मुझपर…!!

What a foundation : जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो तेरी और मेरी क्या बुनियाद 
What a foundation : जब भगवान् बिष्णु को भी अदला का बदला चुकाना पड़ता है तो तेरी और मेरी क्या बुनियाद

मरे माँ-बाप को घर से दूर कही जंगल में ले जाकर जला देते है, और बिना नहाए कुछ खाते नहीं….फिर किसी मुर्दे जिव को घर लाकर उसका मांस बनाकर खाते है और यारो,दोस्तों से उस मांस की महिमा भी सुनाते है…. वाह रे मेरी खोटी नियत…!!
त्रेता,द्वापर युगोमे जब भक्तो को मांसाहारी राक्षस सताया करते थे तब भगवान् बिष्णु ही खुद या अपने किसी दूत को भेजकर उस राक्षस का बद्ध करते थे और आज हिन्दू बिष्णु जी के भक्त खुद राक्षस बन चूका है,फिर कैसे में खुदको सनातनी हिन्दू कहु..??
ये कोई माता की भक्ति नहीं… ये सिर्फ अपनी जिव की स्वाद को पूरा करने के लिए चलाया गया पाखंड है…आरे इंसान कुछ तो इंसानियत के लक्षण रख अपनी ऊँगली थोडा सा कट जाने पर दर्द से बेहाल हो जाते है पर जिसकी जीवित रहते ही पूरी गर्दन कटे उसको कितना दर्द होता होगा…??
कबीर साहेब की वाणी है:- बकरी पात को खात है,ताको काढ़ि खाल..!
जो बकरी को खात है,उसका क्या होगा हवाल..!!
अर्थ:- इस काल की दुनिया में बकरी घास,पात खाकर अपनी गुजारा करते है, फिर भी उस बेगुनाह बकरी को मरने के बाद खाल उधेरा जाता है,फिर तू तो बकरी को ही खा रहा है फिर तेरी क्या दुर्गति होगी..??
जो नर गोस्त को खात है,प्रत्यक्ष राक्षस जान..!
#क्या_मै_हिन्दू_हूँ..?

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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