Strict rules : संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश ?

Strict rules : संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश
Strict rules : संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश

हापुड़। जिले में संचारी रोगों की रोकथाम और लोगों को मच्छरजनित एवं अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों को सक्रिय कर दिया गया है। इसी क्रम में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका, पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने विभागवार कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने सबसे पहले जिले में संचारी रोगों की वर्तमान स्थिति और उनकी रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से क्षेत्रवार अभियान की प्रगति, साफ-सफाई की व्यवस्था, जलभराव वाले स्थानों की स्थिति, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव तथा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किए जाने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाया जाए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और नालियों की सफाई युद्धस्तर पर कराई जाए। विशेष रूप से उन स्थानों को चिन्हित करने पर जोर दिया गया जहां पानी लंबे समय तक जमा रहता है और मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने कहा कि केवल मुख्य मार्गों या प्रमुख स्थानों पर ही सफाई कराने से अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों, मोहल्लों, गलियों और जलभराव वाले स्थानों पर भी नियमित रूप से सफाई और आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने जलभराव को संचारी रोगों के प्रसार से जोड़ते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे स्थानों को चिन्हित कर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था की जाए। साथ ही केवल अस्थायी रूप से पानी निकालने के बजाय जलभराव के मूल कारणों का स्थायी समाधान किया जाए। जहां नालियां बंद हैं, वहां उनकी सफाई कराई जाए और जहां जल निकासी की व्यवस्था में तकनीकी समस्या है, वहां संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद कई स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है, इसलिए जलभराव की समस्या को गंभीरता से लिया जाए।

बैठक में दस्तक अभियान की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घर-घर संपर्क के दौरान बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान की जाए और ऐसे मरीजों की सूची तैयार कर स्वास्थ्य विभाग तक जानकारी पहुंचाई जाए। समय पर संदिग्ध मरीजों की पहचान होने से उन्हें आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्हें लोगों को साफ पानी पीने, आसपास सफाई रखने, घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। साथ ही बुखार या अन्य लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जिले के सभी अस्पतालों में पर्याप्त बेड, दवाइयों और जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में बुखार या अन्य संचारी रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ती है तो स्वास्थ्य विभाग को तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए। अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं के साथ-साथ आवश्यक जांच सुविधाओं को भी व्यवस्थित रखा जाए। आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाए।

बैठक में नगर पालिकाओं और पंचायती राज विभाग की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि नगर निकाय और ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। नालियों की नियमित सफाई, कूड़े का उचित निस्तारण और जलभराव की समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर संबंधित क्षेत्रों में दिखाई देना चाहिए।

Strict rules : संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश
Strict rules : संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि जिन गांवों में जलभराव या गंदगी की समस्या है, वहां स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की जाए। सफाई कर्मियों के माध्यम से नियमित सफाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों को भी अपने घरों और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाए।

शिक्षा विभाग को भी अभियान से जोड़ते हुए जिलाधिकारी ने स्कूलों में विद्यार्थियों को संचारी रोगों से बचाव के उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वच्छता, हाथ धोने, साफ पानी के इस्तेमाल, घर और स्कूल के आसपास पानी जमा न होने देने तथा मच्छरों से बचाव के संबंध में जागरूक किया जाए। बच्चों के माध्यम से जागरूकता का संदेश उनके परिवारों तक भी पहुंच सकता है।

स्कूलों में विद्यार्थियों को यह भी बताया जा सकता है कि यदि परिवार में किसी सदस्य को लगातार बुखार या अन्य बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। इस तरह जागरूकता के माध्यम से बीमारी की रोकथाम और समय पर उपचार की दिशा में लोगों को प्रेरित किया जा सकता है।

बाल विकास विभाग के अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी अभियान के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लोगों को साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए पहले से आवश्यक कदम उठाना अधिक प्रभावी होता है। इसलिए संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां निरोधात्मक गतिविधियां लगातार जारी रखी जाएं।

उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को जहां चिकित्सा संबंधी जिम्मेदारी निभानी है, वहीं नगर पालिका और पंचायतों को सफाई एवं जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ानी होगी और बाल विकास विभाग को घर-घर संपर्क के माध्यम से संदेश पहुंचाना होगा। इन सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से ही अभियान को प्रभावी बनाया जा सकता है।

बैठक में अधिकारियों को क्षेत्र में चल रहे अभियान की नियमित निगरानी करने और आवश्यक कार्रवाई की जानकारी उच्च स्तर तक उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान के दौरान प्राप्त सूचनाओं के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाए और यदि किसी क्षेत्र में बीमारी के मामले बढ़ते हैं तो संबंधित विभाग तत्काल सक्रिय हो।

संचारी रोगों की रोकथाम में आम नागरिकों की भूमिका पर भी बैठक के दौरान जोर दिया गया। लोगों से अपेक्षा की गई कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, नालियों में कूड़ा न डालें और साफ-सफाई बनाए रखें। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए कूलर, गमले, टायर, खुले बर्तन और अन्य स्थानों पर पानी जमा न होने देने की सलाह दी जाती है। बुखार या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय से स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच कराना भी महत्वपूर्ण है।

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस समीक्षा बैठक के माध्यम से जिलाधिकारी कविता मीना ने जिले में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विभागीय जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए अधिकारियों को सक्रियता के साथ काम करने के निर्देश दिए। फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव से लेकर नालियों की सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान, घर-घर दस्तक अभियान, मरीजों की पहचान, अस्पतालों में दवाओं और बेड की उपलब्धता तथा स्कूलों में जागरूकता जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा गया।

जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने के लिए अब संबंधित विभागों को इन निर्देशों के अनुरूप क्षेत्र में कार्रवाई करनी होगी। प्रशासन का उद्देश्य बीमारी फैलने के बाद उपचार करने के साथ-साथ पहले से ही ऐसे कारणों को नियंत्रित करना है, जिनसे संचारी रोगों के फैलने की आशंका रहती है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अभियान की सफलता के लिए विभागीय समन्वय, नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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