
फतेहपुर। मानव सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के उद्देश्य से इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर की ओर से लगातार सेवा कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मेडिकल कॉलेज फतेहपुर में भर्ती एक जरूरतमंद मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। रक्त की कमी से जूझ रहे 61 वर्षीय मरीज रामधनी को चिकित्सक की सलाह पर एक यूनिट ए पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। मरीज के परिवार के पास रक्तदान करने वाला कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था। ऐसे में मरीज की मदद के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया गया। उनके प्रयास और मेडिकल कॉलेज के रक्तकेंद्र की तत्परता से मरीज के लिए आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया गया।
इस पहल से जरूरतमंद मरीज को उपचार में सहायता मिली। घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समय पर रक्त उपलब्ध होना गंभीर परिस्थितियों में मरीज के उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रक्तदान और जरूरतमंदों की सहायता के लिए सामाजिक संस्थाओं, चिकित्सकों तथा रक्तकेंद्र के कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय मानव जीवन की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
हीमोग्लोबिन कम होने पर चिकित्सक ने दी रक्त चढ़ाने की सलाह
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामधनी उम्र 61 वर्ष, पुत्र मंगली प्रसाद, निवासी खरसोला, थाना थरियांव, जनपद फतेहपुर मेडिकल कॉलेज फतेहपुर में भर्ती थे। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उनकी स्थिति का आकलन किया। मरीज का हीमोग्लोबिन कम होने के कारण चिकित्सक ने उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई।
चिकित्सकीय सलाह मिलने के बाद मरीज और उनके परिजनों के सामने रक्त की व्यवस्था करने की चुनौती थी। उनके पास ऐसा कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था, जो जरूरत के समय रक्तदान कर सके। अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था कई बार कठिन हो जाती है, खासकर तब जब परिवार के सदस्य तत्काल रक्तदाता उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होते।
ऐसी परिस्थिति में मरीज की सहायता के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया गया। मरीज की आवश्यकता की जानकारी मिलने पर उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और रक्त उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के संबंधित विभाग से संपर्क स्थापित किया।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से किया संपर्क
मरीज की सहायता के लिए डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने मेडिकल कॉलेज फतेहपुर के रक्तकेंद्र एवं पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वरद वर्धन बिसेन को मरीज की स्थिति और रक्त की आवश्यकता के बारे में अवगत कराया। उन्होंने मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया।
मरीज की आवश्यकता को देखते हुए प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन ने रक्तकेंद्र में तैनात टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद रक्तकेंद्र की ओर से मरीज के लिए ए पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तत्परता महत्वपूर्ण रही। मरीज को आवश्यक रक्त उपलब्ध कराने के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से जरूरत के समय सहायता मिल सकी।
इस अवसर पर रक्तकेंद्र से अशोक शुक्ल, गोविंद प्रसाद सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा। सभी संबंधित लोगों के सहयोग से रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई।
जरूरतमंदों की सहायता करना ही मानव सेवा का उद्देश्य
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और कठिन परिस्थितियों में मानवता की सेवा के लिए आगे आना है। रक्त की आवश्यकता वाले मरीजों को सहयोग उपलब्ध कराना इसी सेवा भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के माध्यम से मरीज की समस्या संबंधित विभाग तक पहुंची और रक्तकेंद्र के सहयोग से आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया गया। इस तरह की पहल उन परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनती है, जो अस्पताल में उपचार के दौरान रक्त की व्यवस्था करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं।
रक्त की आवश्यकता केवल दुर्घटनाओं में घायल लोगों को ही नहीं पड़ती, बल्कि विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, गंभीर एनीमिया से पीड़ित व्यक्तियों और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में भी रक्त चढ़ाने की जरूरत हो सकती है। ऐसे में रक्तदाताओं और रक्तकेंद्रों की उपलब्धता के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की सक्रियता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
रामधनी को रक्त उपलब्ध कराने की यह पहल इसी मानवीय भावना का उदाहरण है। इससे यह संदेश मिलता है कि जरूरत के समय सही जानकारी, त्वरित संपर्क और आपसी सहयोग से किसी मरीज की सहायता की जा सकती है।

रक्तदान से बचाई जा सकती है अनमोल जिंदगी
रक्तदान एक महत्वपूर्ण सामाजिक सेवा है। रक्त का उपयोग विभिन्न चिकित्सकीय परिस्थितियों में मरीजों के उपचार के लिए किया जाता है। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों, बड़ी सर्जरी कराने वाले मरीजों और कुछ गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को रक्त या रक्त के विभिन्न घटकों की आवश्यकता पड़ सकती है।
रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए जरूरतमंद मरीजों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान विशेष महत्व रखता है। रक्तदान करने वाले स्वस्थ व्यक्तियों की भागीदारी से रक्तकेंद्रों में पर्याप्त रक्त उपलब्ध रखने में मदद मिलती है और जरूरत के समय मरीजों को सहायता मिल सकती है।
आमतौर पर 18 से 65 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं, हालांकि रक्तदान के लिए अंतिम पात्रता व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, हीमोग्लोबिन स्तर, वजन और अन्य निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के आधार पर तय की जाती है। इसलिए रक्तदान करने से पहले संबंधित रक्तकेंद्र के चिकित्सकीय कर्मचारियों द्वारा जांच कराना आवश्यक है।
रक्तदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना भी जरूरी है। चिकित्सकीय मानकों के अनुसार रक्तदान करने से सामान्यतः स्वस्थ व्यक्ति को स्थायी कमजोरी नहीं होती। रक्तदान के बाद उचित आराम, तरल पदार्थों का सेवन और रक्तकेंद्र के कर्मचारियों की सलाह का पालन करना चाहिए।
युवाओं से रक्तदान के प्रति जागरूक होने की अपील
रामधनी को रक्त उपलब्ध कराने की घटना समाज के लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देती है। युवाओं और स्वस्थ नागरिकों को स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को समझना चाहिए तथा अपनी पात्रता के अनुसार रक्तदान शिविरों में भाग लेना चाहिए।
रक्तदान के लिए लोगों को आगे आने के साथ-साथ नियमित अंतराल पर रक्तदान की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी अधिकृत रक्तकेंद्र या मान्यता प्राप्त रक्तदान शिविर से संपर्क कर सकते हैं। रक्तदान से पहले स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही देना और चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।
सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन और शैक्षणिक संस्थान जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को रक्तदान के महत्व के बारे में जानकारी दे सकते हैं। इससे स्वैच्छिक रक्तदाताओं का नेटवर्क मजबूत करने और जरूरतमंद मरीजों तक सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सेवा और सहयोग की भावना का संदेश
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मेडिकल कॉलेज फतेहपुर में भर्ती रामधनी को ए पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराने की पहल ने मानव सेवा और आपसी सहयोग की भावना को उजागर किया। मरीज के पास रक्तदाता उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने संबंधित विभाग से संपर्क किया। इसके बाद प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन के निर्देश पर टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल और रक्तकेंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग किया।
यह घटना बताती है कि रक्त की जरूरत के समय सामाजिक संस्थाओं, चिकित्सा विभाग और आम नागरिकों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक स्वस्थ लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने से भविष्य में भी जरूरतमंद मरीजों की सहायता की जा सकती है।
रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए किसी जरूरतमंद को जीवन बचाने वाले उपचार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ और पात्र व्यक्ति को रक्तदान के महत्व को समझते हुए इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी पर विचार करना चाहिए।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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