
हापुड़, 25 अगस्त 2026।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने मंगलवार को विकास खंड हापुड़ के अंतर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय अच्छेजा का औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के अचानक विद्यालय पहुंचने से स्कूल प्रशासन में सक्रियता बढ़ गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध शैक्षिक एवं मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सबसे पहले विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति और अध्यापकों की उपस्थिति की जानकारी ली। उन्होंने विद्यालय में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या के सापेक्ष वास्तविक उपस्थिति की स्थिति देखी तथा शिक्षकों की उपस्थिति भी जांची। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बच्चों की शत-प्रतिशत भागीदारी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर बच्चों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, कक्षा में होने वाली शिक्षण गतिविधियों तथा विषयों से संबंधित सवाल-जवाब किए। बच्चों से बातचीत के माध्यम से उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें पढ़ाई में किस प्रकार की जानकारी दी जा रही है और विद्यालय में शिक्षण कार्य किस स्तर पर संचालित हो रहा है।
जिलाधिकारी ने बच्चों की शैक्षिक समझ को परखते हुए उनसे पढ़ाई से संबंधित प्रश्न पूछे। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई करने, शिक्षकों द्वारा दिए गए कार्य को पूरा करने और अपनी जिज्ञासाओं को शिक्षकों के सामने रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी संकोच के प्रश्न पूछ सकें और सीखने के प्रति रुचि विकसित कर सकें।
इसके बाद जिलाधिकारी ने विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मध्यान्ह भोजन का मैन्यू बोर्ड पर प्रदर्शित न होने की स्थिति सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापक को फटकार लगाते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय में बच्चों को निर्धारित मैन्यू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण और समय पर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए तैयार होने वाले भोजन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए।
उन्होंने विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था का भी जायजा लिया। कक्षाओं, परिसर और अन्य स्थानों पर स्वच्छता की स्थिति देखी गई। जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जाए और बच्चों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय के शौचालयों की स्थिति की भी जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने शौचालयों की साफ-सफाई और उपयोग की स्थिति पर ध्यान दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय में बच्चों के लिए स्वच्छ एवं उपयोग योग्य शौचालय उपलब्ध रहना चाहिए और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने विद्यालय में पेयजल व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय में आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और साफ पानी मिलना चाहिए। पेयजल व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी होने पर उसे तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए।

विद्यालय में उपलब्ध शैक्षिक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने पुस्तकों के वितरण की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि विद्यालय के विद्यार्थियों को आवश्यक पाठ्य-पुस्तकों का वितरण शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों के लिए यूनीफॉर्म वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि यूनीफॉर्म से संबंधित कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को विद्यालय से मिलने वाली आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय के शिक्षण स्तर में सुधार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए शिक्षकों को बच्चों की शैक्षिक क्षमता के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनानी चाहिए और कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
जिलाधिकारी ने बच्चों से बातचीत करते हुए उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का प्रयास भी किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है, इसलिए विद्यालय में केवल उपस्थिति ही पर्याप्त नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार भी आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि कक्षा में शिक्षण कार्य को प्रभावी और रुचिकर बनाया जाए। बच्चों को केवल पाठ याद कराने के बजाय विषय को समझने का अवसर दिया जाए। विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया जाए और नियमित रूप से उनकी शैक्षिक प्रगति का आकलन किया जाए।
जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रशासन से यह भी अपेक्षा की कि बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। विद्यालय में स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, भोजन और शिक्षण व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन सभी व्यवस्थाओं का बेहतर संचालन बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान मध्यान्ह भोजन का मैन्यू बोर्ड पर न लगे होने को लेकर जिलाधिकारी की नाराजगी से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय की छोटी-छोटी व्यवस्थाओं पर भी प्रशासन की नजर है। उन्होंने प्रधानाध्यापक को निर्देश दिए कि शासन द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी आवश्यक सूचना को विद्यालय में उचित स्थान पर प्रदर्शित किया जाए।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विद्यालय की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए और जहां भी कमी दिखाई दे, उसे समय रहते दूर किया जाए। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी लगातार निगरानी रखने को कहा।
प्राथमिक विद्यालय अच्छेजा के औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यालय की वास्तविक स्थिति का मौके पर आकलन करना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना रहा। जिलाधिकारी ने मौके पर व्यवस्थाओं को देखकर आवश्यक सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
जिलाधिकारी के निरीक्षण से विद्यालय में शिक्षा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रशासन की गंभीरता भी सामने आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि पुस्तकों एवं यूनीफॉर्म का वितरण शीघ्र पूरा कराया जाए तथा विद्यालय के शिक्षण स्तर में प्रभावी सुधार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
कुल मिलाकर, जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना का प्राथमिक विद्यालय अच्छेजा का औचक निरीक्षण विद्यालय की शैक्षिक एवं मूलभूत व्यवस्थाओं की समीक्षा पर केंद्रित रहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई की जानकारी ली, विद्यालय की उपस्थिति, मध्यान्ह भोजन, साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया तथा कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से दिए गए इन निर्देशों का उद्देश्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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