
हापुड़। जनपद में धान की फसल के वास्तविक उत्पादन का आकलन करने तथा किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना (आईएएस) ने हापुड़ तहसील के एक गांव में पहुंचकर धान की क्रॉप कटिंग कराई। इस दौरान राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम की मौजूदगी में निर्धारित मानकों के अनुसार खेत में खड़ी धान की फसल की कटाई कराकर उपज की पैमाइश की गई। मौके पर धान की पैदावार अच्छी पाई गई।
जिलाधिकारी ने क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल उत्पादन का आकलन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए। उन्होंने कहा कि क्रॉप कटिंग के माध्यम से प्राप्त होने वाले आंकड़े कृषि उत्पादन का वास्तविक आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि फसल की कटाई, उपज की माप और आंकड़ों के संकलन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाए, जिससे शासन को वास्तविक उत्पादन की जानकारी उपलब्ध हो सके।
निर्धारित क्षेत्र में कराई गई धान की कटाई
क्रॉप कटिंग के दौरान जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम के साथ खेत में पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार धान की फसल की कटाई कराई। इसके लिए खेत में 10×10 मीटर का क्षेत्र निर्धारित किया गया। इस क्षेत्र में खड़ी धान की फसल को कटवाकर प्राप्त उपज की पैमाइश कराई गई।
क्रॉप कटिंग के अंतर्गत निर्धारित क्षेत्र से प्राप्त फसल के आधार पर उत्पादन का आकलन किया जाता है। इससे संबंधित क्षेत्र में धान की पैदावार की स्थिति का अनुमान लगाने में सहायता मिलती है। जिलाधिकारी ने इस प्रक्रिया का जायजा लेते हुए अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की और निर्देश दिए कि सभी चरणों को सावधानीपूर्वक पूरा किया जाए।
मौके पर धान की फसल की पैदावार अच्छी पाई गई। जिलाधिकारी ने कहा कि फसल उत्पादन से संबंधित सही आंकड़े तैयार करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए क्रॉप कटिंग के दौरान निर्धारित क्षेत्रफल, फसल की कटाई और उपज के मापन में पूरी सतर्कता बरती जाए। आंकड़ों को वास्तविक स्थिति के अनुरूप दर्ज किया जाए, जिससे भविष्य में कृषि उत्पादन का सही आकलन किया जा सके।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए महत्वपूर्ण है क्रॉप कटिंग
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्रॉप कटिंग का कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जाए। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के सही आंकड़े शासन की कृषि संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण होते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर फसलों की उत्पादकता का आकलन करने में मदद मिलती है।
क्रॉप कटिंग से प्राप्त आंकड़े प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल नुकसान और उपज से संबंधित आकलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो और इसमें वास्तविक उत्पादन को ही दर्ज किया जाए।
उन्होंने राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि क्रॉप कटिंग के दौरान सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। जहां भी फसल की कटाई की जाए, वहां निर्धारित मानकों के अनुरूप उपज का मापन सुनिश्चित किया जाए। इससे किसानों को फसल बीमा योजना के अंतर्गत नियमानुसार लाभ उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि कृषि उत्पादन से संबंधित आंकड़ों के संकलन में पारदर्शिता बनाए रखी जाए, ताकि शासन स्तर पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति प्रदर्शित हो। उन्होंने अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने और किसानों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
पराली न जलाएं किसान, कृषि यंत्रों से करें प्रबंधन
धान की कटाई के दौरान खेतों में बचने वाली पराली के उचित प्रबंधन को लेकर भी जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की। उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को बिल्कुल न जलाएं। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
जिलाधिकारी ने किसानों को सलाह दी कि वे पराली के निस्तारण के लिए कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक तरीकों और उपलब्ध कृषि यंत्रों का उपयोग करें। आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से पराली का उचित प्रबंधन किया जा सकता है। इससे खेतों में फसल अवशेषों को जलाने की आवश्यकता कम होती है और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहना चाहिए और फसल अवशेषों का निस्तारण जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि तकनीकों को अपनाने से खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मदद मिलती है।
किसानों के हित में पारदर्शी व्यवस्था पर जोर
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने स्पष्ट किया कि कृषि उत्पादन के सही आकलन और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। क्रॉप कटिंग के माध्यम से प्राप्त आंकड़े कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करते हैं। इसलिए इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा कराया जाए। फसल की कटाई और उपज की पैमाइश में पारदर्शिता रखी जाए, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके और शासन को सही जानकारी उपलब्ध हो।
26 अक्टूबर को हापुड़ तहसील क्षेत्र में कराई गई धान की क्रॉप कटिंग के दौरान अच्छी पैदावार पाए जाने के साथ ही फसल उत्पादन के आकलन और पराली प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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