Appearance Day : श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस ?

Appearance Day : श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस ?
Appearance Day : श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस ?

गढ़मुक्तेश्वर। नगर के श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में महर्षि वाल्मीकि जी की पावन जयंती एवं प्रकट दिवस श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। सर्व समाज के लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने, समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने तथा आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शनिदेव के स्तंभ एवं पंचमुखी हनुमान जी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया गया। श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन, उनके विचारों और समाज को दिए गए योगदान को याद किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि महापुरुषों की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल उनके जीवन को याद करना ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना भी है।

इस अवसर पर श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर के अध्यक्ष पंकज लोधी ने अपने संबोधन में महर्षि वाल्मीकि जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी केवल किसी एक समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के गौरव हैं। उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना करके पूरी दुनिया को सत्य, मर्यादा, त्याग, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं।

पंकज लोधी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि मनुष्य अपने विचारों, कर्मों और आचरण से समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है। उनके द्वारा रचित रामायण भारतीय संस्कृति, आदर्श जीवन, पारिवारिक मूल्यों और कर्तव्यनिष्ठा की महत्वपूर्ण धरोहर है। इसमें वर्णित आदर्श आज भी लोगों को सत्य का साथ देने, मर्यादा का पालन करने और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती एवं प्रकट दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना है। समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करना, एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी लोगों से आह्वान किया कि वे महापुरुषों के सम्मान के साथ-साथ उनके बताए मार्ग पर भी चलें, ताकि समाज में समानता, सहयोग और सद्भाव का वातावरण कायम हो सके।

Appearance Day : श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस ?
Appearance Day : श्री कृष्ण श्याम सुंदर शनिधाम मंदिर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस ?

सामाजिक समरसता और भाईचारे का दिया संदेश

कार्यक्रम में सर्व समाज की सहभागिता ने सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार समाज को जोड़ने और लोगों के बीच प्रेम की भावना बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं। महापुरुषों की शिक्षाओं को अपनाकर समाज में फैली कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती तभी संभव है, जब सभी वर्गों के लोग एक-दूसरे का सम्मान करें और मिल-जुलकर आगे बढ़ें। महर्षि वाल्मीकि जी की शिक्षाएं हमें मानवता, नैतिकता और कर्तव्य के प्रति जागरूक करती हैं। उनके जीवन और रचनाओं से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकता है।

श्रद्धालुओं ने यह भी संकल्प लिया कि वे समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और एकता की भावना को बनाए रखने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण रहा। महर्षि वाल्मीकि जी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के साथ ही लोगों ने उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के महान विचारों से प्रेरणा ले सकें।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने की सहभागिता

महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं प्रकट दिवस के अवसर पर गढ़मुक्तेश्वर बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर नितिन कुमार, सौरभ कुमार, रोहित वाल्मीकि, गोकुल सिंघल, डॉ. नीरज चौहान, उमेश लोधी, डॉ. नेपाल सिंह, जय सिंह राणा, मनीष सभासद, जगबीर चौहान, नरेंद्र कुमार शर्मा, भगवत प्रजापति, अशोक वाल्मीकि, देवेंद्र, बबलू सहगल, रविंद्र प्रकाश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सभी ने महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन किया और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में एकता, समानता, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया गया।

अंत में महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन एवं शिक्षाओं को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महापुरुषों के विचार तभी सार्थक होते हैं, जब उन्हें व्यवहार में अपनाया जाए। उनके आदर्शों को अपनाकर ही एक ऐसे समाज का निर्माण किया जा सकता है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले और सभी लोग आपसी सहयोग एवं भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत कर सकें।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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