Claim check : फतेहपुर: साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के संचालन पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग ?

Claim check : फतेहपुर: साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के संचालन पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
Claim check : फतेहपुर: साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के संचालन पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

फतेहपुर।

जनपद के विजयीपुर विकासखंड अंतर्गत किशनपुर थाना क्षेत्र में मजरे रामपुर टूटाहवापुर के हनुमंत नगर चौराहे के पास कथित रूप से संचालित साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रतिष्ठान के संचालन, आवश्यक पंजीकरण और वहां मरीजों का उपचार किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और अब तक की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित प्रतिष्ठान की वैधानिक स्थिति की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए।

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, प्रतिष्ठान पर मेडिकल स्टोर और क्लीनिक दोनों तरह की गतिविधियां संचालित होने की चर्चा है। हालांकि, प्रतिष्ठान के पास आवश्यक पंजीकरण और अनुमति है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच और मौके का निरीक्षण किया जाना आवश्यक है।

बिना बोर्ड और पंजीकरण के संचालन का आरोप

साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक को लेकर प्रमुख सवाल यह है कि क्या संबंधित प्रतिष्ठान के पास दवाओं की बिक्री और चिकित्सा सेवाएं संचालित करने के लिए आवश्यक लाइसेंस एवं पंजीकरण उपलब्ध हैं। स्थानीय लोगों की ओर से प्रतिष्ठान पर स्पष्ट बोर्ड न होने और उसके संचालन की वैधानिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि किसी स्थान पर मेडिकल स्टोर के साथ मरीजों का उपचार भी किया जा रहा है, तो दोनों गतिविधियों से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। दवाओं की बिक्री के लिए लागू लाइसेंसिंग शर्तों और क्लीनिक में चिकित्सा सेवाएं देने के लिए आवश्यक पंजीकरण की जांच संबंधित विभागों को करनी चाहिए।

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उपलब्ध तथ्यों का सत्यापन करें। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान के दस्तावेज, दवाओं की बिक्री से संबंधित अनुमति, उपचार करने वाले व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता और पंजीकरण की स्थिति की जांच की जा सकती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

शटर बंद कर बाहर उपचार करने के आरोप

स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की आशंका के बीच मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक का शटर बंद रखा जाता है और मरीजों का उपचार बाहर बैठकर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्थिति का सत्यापन करे और वास्तविक तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करे।

यदि प्रतिष्ठान के संचालन के तरीके में कोई अनियमितता है, तो उसका पता लगाने के लिए केवल मौखिक शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्यक्ष निरीक्षण और दस्तावेजी जांच की जानी चाहिए। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वहां किस प्रकार की चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं और क्या वे निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं।

स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल भी है कि यदि पहले शिकायतें की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई। क्या संबंधित अधिकारियों ने प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण हुआ, तो उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आया? इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक बयान से ही मिल सकता है।

Claim check : फतेहपुर: साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के संचालन पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
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बच्चों के उपचार और हाइड्रोसील ऑपरेशन के आरोप

साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक को लेकर बच्चों से लेकर विभिन्न बीमारियों के उपचार और हाइड्रोसील ऑपरेशन किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन मरीजों की सुरक्षा से जुड़े दावों की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए।

यदि संबंधित प्रतिष्ठान पर ऑपरेशन या अन्य ऐसी चिकित्सा प्रक्रियाएं किए जाने की शिकायत है, जिनके लिए विशेष योग्यता, पंजीकरण और उपयुक्त चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होती है, तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए। जांच के दौरान यह पता लगाया जाना चाहिए कि उपचार करने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता है या नहीं और संबंधित सेवाएं देने के लिए जरूरी अनुमति उपलब्ध है या नहीं।

विशेष रूप से बच्चों के उपचार और शल्य चिकित्सा से जुड़े मामलों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

संरक्षण के आरोपों की भी होनी चाहिए जांच

मामले में स्थानीय स्तर पर एक कथित पत्रकार के संरक्षण में प्रतिष्ठान का संचालन किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है। ऐसे में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रशासन को तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जांच करनी चाहिए।

यदि किसी प्रकार के दबाव या संरक्षण के कारण नियमानुसार कार्रवाई प्रभावित होने की शिकायत है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। कानून के तहत सभी के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी भी व्यक्ति की पहचान या प्रभाव के आधार पर जांच और कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी और सीएमओ से निष्पक्ष जांच की मांग

अब इस मामले में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित प्रतिष्ठान का निरीक्षण कर उसके पंजीकरण, लाइसेंस, चिकित्सकीय योग्यता और वहां दी जा रही सेवाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि प्रतिष्ठान मेडिकल स्टोर के रूप में पंजीकृत है, क्लीनिक के रूप में संचालित है या वहां दोनों प्रकार की गतिविधियां की जा रही हैं। प्रत्येक गतिविधि के लिए लागू नियमों और आवश्यक अनुमतियों का सत्यापन किया जाना चाहिए।

जनहित से जुड़े प्रमुख सवाल

  • क्या साहू मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के पास आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण हैं?

  • वहां उपचार करने वाले व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और पंजीकरण की जांच हुई है या नहीं?

  • बच्चों के उपचार और हाइड्रोसील ऑपरेशन संबंधी आरोपों की जांच कब होगी?

  • क्या स्वास्थ्य विभाग ने पहले मिली शिकायतों पर निरीक्षण या कोई कार्रवाई की है?

  • यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे?

  • संरक्षण संबंधी आरोपों की सत्यता जांचने के लिए प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?

फिलहाल, मामले में संबंधित प्रतिष्ठान का पक्ष और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। इसलिए आरोपों को जांच के अधीन मानते हुए निष्पक्ष सत्यापन जरूरी है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग कब निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करता है और यदि कोई अनियमितता मिलती है, तो नियमानुसार क्या कार्रवाई की जाती है। जनहित का तकाजा है कि जांच पारदर्शी हो, तथ्य सार्वजनिक किए जाएं और मरीजों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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