
हापुड़, 03 नवंबर 2026। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी एवं अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को सरस्वती मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा-हापुड़ में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), उत्तर प्रदेश के अंतर्गत जिला स्तरीय एबीडीएम सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना (आईएएस) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का मुख्य विषय “जनपद के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम में सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकरण” रहा। सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने, मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने तथा सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के उद्देश्यों और इसके अंतर्गत संचालित विभिन्न सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से आम नागरिकों को चिकित्सा सेवाओं का लाभ पहले से अधिक आसानी और पारदर्शिता के साथ मिल सकेगा। सम्मेलन के दौरान आभा (ABHA) आईडी निर्माण, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन तथा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने अपने संबोधन में कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है। इसके माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू होने से नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों को बार-बार पुराने मेडिकल दस्तावेज साथ लेकर चलने की आवश्यकता कम होगी और चिकित्सकों को मरीज की पूर्व चिकित्सा संबंधी जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के माध्यम से मरीज के उपचार की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाई जा सकती है। सरकारी एवं निजी अस्पतालों के बीच स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का बेहतर समन्वय होने से मरीजों को उपचार के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक का उपयोग प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। ऐसे में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सम्मेलन में आभा आईडी यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह प्रत्येक नागरिक के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के रूप में कार्य करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में व्यवस्थित रखने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। मरीज की सहमति के आधार पर उसके स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को संबंधित स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। इससे चिकित्सकों को मरीज के पूर्व उपचार, जांच रिपोर्ट और अन्य चिकित्सा संबंधी जानकारियों को समझने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया गया कि इसके माध्यम से पंजीकृत चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की डिजिटल पहचान एवं विवरण उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

वहीं हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन के अंतर्गत सरकारी और निजी अस्पतालों, क्लीनिकों तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इससे स्वास्थ्य संस्थानों की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में सहायता मिलती है। जिलाधिकारी ने जनपद के सभी निजी अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों एवं चिकित्सकों से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भागीदारी भी बेहद आवश्यक है। जब जनपद के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता डिजिटल व्यवस्था से जुड़ेंगे, तभी एक मजबूत और प्रभावी डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों एवं चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधियों से इस दिशा में गंभीरता से प्रयास करने का आह्वान किया। सम्मेलन में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स की उपयोगिता पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से मरीजों की जांच रिपोर्ट, उपचार संबंधी विवरण और चिकित्सा इतिहास को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे मरीज को दूसरे अस्पताल में उपचार कराने की स्थिति में भी अपनी पुरानी रिपोर्ट और चिकित्सा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में सुविधा हो सकती है। हालांकि, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के उपयोग में मरीज की सहमति, व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण करना नहीं है, बल्कि देश में एक ऐसा एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा विकसित करना है, जिसमें नागरिकों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य संस्थानों को तकनीक के माध्यम से बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, उपचार प्रक्रिया को सुगम बनाने और स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। जनपद हापुड़ में आयोजित इस जिला स्तरीय सम्मेलन को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन के माध्यम से सरकारी एवं निजी चिकित्सा संस्थानों को एक साझा डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने तथा आम नागरिकों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों एवं संबंधित प्रतिनिधियों से अपेक्षा की गई कि वे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के उद्देश्यों को समझते हुए इसके क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे, ताकि जनपद के नागरिकों को भविष्य में अधिक सुलभ, व्यवस्थित और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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