Sister Darlene : अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भारत पर 100% टैरिफ के समर्थक लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लिन चुनाव हारीं ?

Sister Darlene : अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भारत पर 100% टैरिफ के समर्थक लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लिन चुनाव हारीं
Sister Darlene : अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भारत पर 100% टैरिफ के समर्थक लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लिन चुनाव हारीं

वॉशिंगटन।

अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में हुए सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डॉ. एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया है। इस जीत के साथ दक्षिण कैरोलिना में करीब 28 साल बाद किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतने का इतिहास रचा है। इस चुनाव को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि डार्लिन ग्राहम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं। भाई के निधन के बाद उन्हें उनकी खाली हुई सीनेट सीट पर नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के बावजूद डार्लिन की हार ने रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है।

3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव में डॉ. एनी एंड्रयूज ने डार्लिन ग्राहम को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की। एनी एंड्रयूज पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ हैं और इससे पहले भी चुनावी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। वहीं डार्लिन ग्राहम को अपने भाई की राजनीतिक विरासत और राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन का लाभ मिलने की उम्मीद थी। इसके बावजूद मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में फैसला सुनाया। इस परिणाम ने अमेरिकी राजनीति में दक्षिण कैरोलिना जैसे परंपरागत रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की वापसी का रास्ता खोला है।

लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद बहन को मिली थी सीनेट की सीट

इस चुनाव की पृष्ठभूमि में लिंडसे ग्राहम का निधन भी महत्वपूर्ण रहा। वह दक्षिण कैरोलिना से लंबे समय तक रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली सीनेटर रहे थे। जुलाई 2026 में उनके निधन के बाद राज्य की खाली हुई सीनेट सीट पर उनकी बहन डार्लिन ग्राहम को नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़कर इस सीट पर पूर्ण कार्यकाल हासिल करने की कोशिश की।

डार्लिन ग्राहम को रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन मिला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके पक्ष में प्रचार किया। इसके बावजूद वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज के सामने चुनाव नहीं जीत सकीं। चुनावी नतीजे ने यह संदेश दिया कि किसी बड़े राजनीतिक परिवार से जुड़ाव और शीर्ष नेताओं का समर्थन भी मतदाताओं का विश्वास हासिल करने की गारंटी नहीं है।

भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की नीति से जुड़ा था लिंडसे ग्राहम का नाम

लिंडसे ग्राहम अमेरिका की राजनीति में रूस के खिलाफ सख्त आर्थिक प्रतिबंधों के समर्थक माने जाते थे। रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति का समर्थन किया था। इस नीति के दायरे में भारत जैसे देश भी आ सकते थे, जो रूस से ऊर्जा संसाधनों का आयात करते हैं।

इसी मुद्दे को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में उनके नाम से ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पारित किया गया। यह कानून 18 सितंबर 2026 को लागू हुआ। इसमें रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।

इस कानून के तहत राष्ट्रपति को उन देशों के आयात पर शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है, जो निर्धारित शर्तों के अंतर्गत रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद जारी रखते हैं। इसमें रूस से तेल और गैस के पांच बड़े आयातकों तथा रूसी प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों को लक्षित करने का प्रावधान है।

Sister Darlene : अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भारत पर 100% टैरिफ के समर्थक लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लिन चुनाव हारीं
Sister Darlene : अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, भारत पर 100% टैरिफ के समर्थक लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लिन चुनाव हारीं

क्या भारत पर तत्काल लागू हो गया 100 प्रतिशत टैरिफ?

इस पूरे मामले में भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान होने का अर्थ यह नहीं है कि भारत पर यह शुल्क अपने आप लागू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति को इसके क्रियान्वयन, दर निर्धारित करने और छूट देने के संबंध में अधिकार दिए गए हैं।

16 अक्टूबर 2026 के कार्यकारी आदेश संख्या 14436 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े आयातों पर शुल्क की दरों और संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया। हालांकि, इसी आदेश के चौथे खंड में उन्होंने कानून के तहत निर्धारित शुल्कों के लागू होने पर फिलहाल छूट भी जारी की। यह छूट आगे राष्ट्रपति या संबंधित अधिकारियों के निर्णय तक प्रभावी रह सकती है। इसलिए भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने का दावा करना सही नहीं होगा।

इस कानून का भारत के लिए महत्व इसलिए भी है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से कच्चे तेल का आयात करता है। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका और भारत के बीच पहले भी व्यापारिक और कूटनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन की भविष्य की नीतियों पर भारत की नजर बनी रहना स्वाभाविक है।

ट्रंप के समर्थन के बावजूद क्यों हारीं डार्लिन ग्राहम?

डार्लिन ग्राहम की हार के पीछे कई राजनीतिक कारण सामने आए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन मिला था। रिपब्लिकन पार्टी ने भी उनके पक्ष में संसाधन लगाए। इसके बावजूद मतदाताओं के बीच उनकी राजनीतिक अनुभवहीनता को लेकर सवाल उठे।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, डार्लिन ग्राहम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त जानकारी नहीं होने को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा था। वहीं एनी एंड्रयूज ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, महंगाई, परिवारों की आर्थिक स्थिति और वाशिंगटन में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इससे उन्हें मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में मदद मिली।

एनी एंड्रयूज की जीत को केवल एक सीट पर सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चेतावनी भी मानी जा रही है। दक्षिण कैरोलिना जैसे राज्य में जहां लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव रहा है, वहां डेमोक्रेट उम्मीदवार की जीत ने अमेरिकी राजनीति में बदलते मतदाता रुझानों की ओर ध्यान खींचा है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी रहेगी नजर

लिंडसे ग्राहम की बहन की हार और उनके नाम से बने रूस प्रतिबंध कानून का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक घटनाक्रम हैं, लेकिन दोनों का भारत के संदर्भ में महत्व है। एक ओर अमेरिका में सत्ता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस से भारत के ऊर्जा व्यापार पर अमेरिकी नीतियों का प्रभाव पड़ने की संभावना बनी हुई है।

हालांकि, डार्लिन ग्राहम की चुनावी हार से रूस प्रतिबंध कानून स्वतः समाप्त नहीं होगा। यह कानून अमेरिकी कांग्रेस से पारित होकर लागू हो चुका है और इसका भविष्य अमेरिकी प्रशासन के फैसलों तथा कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर, दक्षिण कैरोलिना में एनी एंड्रयूज की ऐतिहासिक जीत ने अमेरिकी राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। वहीं भारत के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका आगे किस तरह की व्यापारिक नीति अपनाता है। आने वाले समय में वाशिंगटन के फैसले भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से अहम साबित हो सकते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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