
फतेहपुर 24 सितंबर 2026
डेंगू एवं अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव तथा आमजन में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को मलाका में डेंगू बचाव एवं जागरूकता महाभियान चलाया गया। इंडियन रेडक्रास सोसाइटी फतेहपुर, आरोग्य भारती, भारत विकास परिषद तथा दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान और डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजन में आयोजित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
अभियान का आयोजन प्रातः करीब 9 बजे किया गया। इंडियन रेडक्रास सोसाइटी उत्तर प्रदेश के चेयरमैन एवं कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों को डेंगू सहित विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय बताए गए। इसके साथ ही बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल तथा मच्छरों के प्रजनन को रोकने के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उच्च प्राथमिक विद्यालय बक्सपुर के 97 छात्र-छात्राओं, कम्पोजिट विद्यालय बक्सपुर के 163 छात्र-छात्राओं तथा आंगनबाड़ी केंद्र के 15 बच्चों को मिलाकर कुल 275 बच्चों को निःशुल्क होम्योपैथिक औषधि वितरित की गई। आयोजकों के अनुसार यह पहल बच्चों को डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने तथा स्वास्थ्य के प्रति उनकी सजगता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि संक्रामक बीमारियों से बचाव में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि हम अपने घर, विद्यालय और आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें तो अनेक बीमारियों के फैलाव को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे स्वयं स्वच्छता का ध्यान रखने के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों और आसपास रहने वाले लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें।
उन्होंने विशेष रूप से डेंगू के मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि घरों, विद्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में कहीं भी अनावश्यक रूप से पानी एकत्रित नहीं होने देना चाहिए। गमलों, पुराने बर्तनों, टायरों, कूलर, छतों तथा अन्य स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। इसलिए नियमित रूप से ऐसे स्थानों की जांच कर पानी को खाली करना आवश्यक है।
बच्चों को सुरक्षित पेयजल के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। डॉ. अनुराग ने कहा कि पीने के पानी को स्वच्छ रखना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। आवश्यकता पड़ने पर पानी को उबालकर पीना चाहिए और पानी को ढककर रखना चाहिए। दूषित पानी के सेवन से विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए पेयजल की स्वच्छता के प्रति विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अभियान में बच्चों को यह भी समझाया गया कि बीमारी होने के बाद उपचार कराने के साथ-साथ बीमारी से बचाव के उपाय अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। आसपास का वातावरण स्वच्छ रखने, मच्छरों से बचाव के उपाय करने, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने और घर में साफ-सफाई बनाए रखने से मच्छरजनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में बच्चों ने स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना। आयोजकों ने कहा कि विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को जागरूक करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे अपने घर और समाज में स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। जब बच्चे अपने अभिभावकों को पानी जमा न होने देने, आसपास सफाई रखने और मच्छरों से बचाव के बारे में बताते हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और समुदाय पर पड़ता है।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव द्वारा गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी डेंगू बचाव एवं जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाया गया। अभियान का उद्देश्य केवल औषधि वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों और विद्यालय परिवार को रोगों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना भी इसका प्रमुख हिस्सा रहा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में स्वच्छता को लेकर भी चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि विद्यालय में कूड़ा-कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें और पानी को अनावश्यक रूप से जमा न होने दें। कक्षा, परिसर और आसपास की नियमित सफाई पर ध्यान देना चाहिए। बरसात के मौसम में विशेष रूप से ऐसे स्थानों की पहचान करना जरूरी है जहां पानी रुक सकता है।
डेंगू सहित मच्छरजनित रोगों को लेकर जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर भी वक्ताओं ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन के प्रयासों से ही मच्छरजनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों, विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। सामूहिक जागरूकता और सतर्कता से बीमारी के प्रसार को रोकने में सहायता मिल सकती है।
इस अवसर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय बक्सपुर एवं कम्पोजिट विद्यालय बक्सपुर के विद्यालय परिवार का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम में प्रधानाचार्या राधिका मिश्रा, कमलेश कुमार सहित सभी अध्यापक एवं अध्यापिकाएं मौजूद रहे। प्रमुख सहयोगी सुरेश कुमार श्रीवास्तव, प्रबंध समिति सदस्य ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
आयोजकों ने बताया कि सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से चलाए जा रहे ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को रोगों से बचाव के प्रति सजग करना है। बच्चों को केंद्र में रखकर चलाया जाने वाला जागरूकता अभियान परिवारों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों से अपील की गई कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें तथा स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाएं। बच्चों को यह संदेश भी दिया गया कि किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए और स्वयं से दवा लेने से बचना चाहिए।
इस तरह मलाका में आयोजित डेंगू बचाव एवं जागरूकता महाभियान के माध्यम से 275 बच्चों तक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश पहुंचाया गया। निःशुल्क औषधि वितरण के साथ-साथ बच्चों को मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने, स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। सामाजिक संस्थाओं और विद्यालय परिवार की संयुक्त भागीदारी से आयोजित यह अभियान स्वास्थ्य जागरूकता को समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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