A decisive battle : महापौर और MIC सदस्यों ने आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ खोला मोर्चा, तबादले की मांग पर आरपार की लड़ाई ?

A decisive battle : महापौर और MIC सदस्यों ने आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ खोला मोर्चा, तबादले की मांग पर आरपार की लड़ाई
A decisive battle : महापौर और MIC सदस्यों ने आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ खोला मोर्चा, तबादले की मांग पर आरपार की लड़ाई

सागर।

नगर निगम सागर में महापौर और नगर निगम आयुक्त के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। महापौर संगीता सुशील तिवारी सहित मेयर इन काउंसिल (MIC) के सदस्यों ने नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री की कार्यप्रणाली को लेकर संभागायुक्त दिलीप कुमार से शिकायत की है। महापौर ने आयुक्त पर एमआईसी द्वारा लिए गए जनहितैषी फैसलों को लंबित रखने, समय-सीमा में उनका पालन नहीं करने और विकास कार्यों में अपेक्षित गति नहीं आने के आरोप लगाए हैं।

महापौर और एमआईसी सदस्यों ने संभागायुक्त को पत्र सौंपकर आयुक्त के खिलाफ शासन स्तर पर कार्रवाई करने के साथ ही उनका तत्काल प्रभाव से तबादला किए जाने की मांग की है। इस शिकायत के बाद नगर निगम की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

एमआईसी के फैसलों को नजरअंदाज करने का आरोप

मंगलवार को महापौर संगीता सुशील तिवारी ने संभागायुक्त दिलीप कुमार से मुलाकात कर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। महापौर की ओर से सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि एमआईसी द्वारा जनहित में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों को निर्धारित समय-सीमा में लागू नहीं किया जा रहा है।

महापौर का आरोप है कि एमआईसी की बैठकों में लिए गए फैसलों के संबंध में समय पर प्रतिवेदन और अनुपालन की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे नगर निगम के कामकाज पर असर पड़ रहा है और जनहित से जुड़े कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री करीब ढाई साल से सागर नगर निगम में पदस्थ हैं। उनके कार्यकाल के दौरान एमआईसी द्वारा लिए गए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित हैं। महापौर का कहना है कि इन प्रस्तावों का समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन नहीं होने के कारण शहर के विकास से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

विकास कार्य और शासन की योजनाओं पर भी उठाए सवाल

महापौर और एमआईसी सदस्यों ने आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है। शिकायत में शासन की योजनाओं, विकास कार्यों और वित्तीय अनुशासन पर भी असर पड़ने का उल्लेख किया गया है।

महापौर का कहना है कि नगर निगम में एमआईसी की बैठकों में जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पारित किए जाते हैं। इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जरूरी होती है। यदि निर्णय समय पर लागू नहीं होंगे तो उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।

इसी वजह से महापौर और एमआईसी सदस्यों ने संभागायुक्त से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

30 सितंबर की समीक्षा बैठक के बाद बढ़ा विवाद

नगर निगम में एमआईसी द्वारा लिए गए फैसलों की समीक्षा के लिए 30 सितंबर 2026 को एक बैठक आयोजित की गई थी। महापौर के अनुसार बैठक में लंबित मामलों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान कई ऐसे विषय सामने आए जिन पर लंबे समय से कार्रवाई लंबित बताई गई।

महापौर का आरोप है कि समीक्षा बैठक के दौरान भी कई मामलों में नगर निगम आयुक्त की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद एमआईसी ने लंबित निर्णयों को लेकर नाराजगी जताई।

महापौर के अनुसार समीक्षा बैठक के बाद भी एमआईसी के निर्णयों का प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया। इसके चलते आयुक्त की कार्यप्रणाली के प्रति असंतोष व्यक्त किया गया और उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी भी संभागायुक्त को दी गई।

A decisive battle : महापौर और MIC सदस्यों ने आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ खोला मोर्चा, तबादले की मांग पर आरपार की लड़ाई
A decisive battle : महापौर और MIC सदस्यों ने आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ खोला मोर्चा, तबादले की मांग पर आरपार की लड़ाई

पहले भी सामने आ चुका है विरोध

यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम के महापौर और एमआईसी सदस्यों ने आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी एमआईसी की बैठकों और नगर निगम के कामकाज को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं।

महापौर पक्ष का कहना है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा लिए गए फैसलों का प्रशासनिक स्तर पर समय पर पालन होना जरूरी है। यदि प्रस्तावों को लंबे समय तक लंबित रखा जाएगा तो इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी और जनता से जुड़े कामों में देरी होगी।

इसी मुद्दे को लेकर अब महापौर और एमआईसी सदस्यों ने मामले को संभाग स्तर तक पहुंचाया है।

आयुक्त बोले- शिकायत की जानकारी नहीं मिली

वहीं नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि संभागायुक्त से उनके खिलाफ किस तरह की शिकायत की गई है।

आयुक्त ने कहा कि जब संभागायुक्त कार्यालय की ओर से शिकायत के संबंध में उनसे जवाब मांगा जाएगा, तब वह नियमों के अनुसार अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

इस बयान के बाद अब गेंद संभागायुक्त के पाले में है। यदि शिकायत के आधार पर जवाब मांगा जाता है तो आयुक्त को महापौर और एमआईसी द्वारा लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखना होगा।

तत्काल तबादले की मांग

महापौर संगीता सुशील तिवारी ने संभागायुक्त से नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री के खिलाफ शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आयुक्त का तत्काल प्रभाव से तबादला किए जाने का अनुरोध किया है।

महापौर का कहना है कि सागर नगर निगम में जनहित से जुड़े कार्यों की गति बनाए रखने और एमआईसी के निर्णयों का समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।

उन्होंने आयुक्त की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए शासन से कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

महापौर और एमआईसी सदस्यों की ओर से संभागायुक्त को शिकायत दिए जाने के बाद नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि शिकायत में केवल किसी एक प्रस्ताव या एक मामले का उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि एमआईसी के कई निर्णयों के लंबित रहने और उनके अनुपालन में देरी का मुद्दा उठाया गया है।

अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संभागायुक्त कार्यालय इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। क्या आयुक्त से पूरे मामले में जवाब मांगा जाएगा या शासन स्तर पर कोई अन्य कार्रवाई की जाएगी, यह भी आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल महापौर और एमआईसी ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए आयुक्त के तबादले की मांग रख दी है। वहीं आयुक्त ने शिकायत की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद नियमों के अनुसार जवाब देने की बात कही है। ऐसे में नगर निगम सागर में महापौर और आयुक्त के बीच चल रहा विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

ये लोग रहे मौजूद

संभागायुक्त से मुलाकात के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता एवं महापौर प्रतिनिधि डॉ. सुशील तिवारी, एमआईसी सदस्य अनूप उर्मिल, रुपेश यादव, राजकुमार पटेल, धमेंद्र खटीक, पार्षद प्रतिनिधि नरेश यादव, सोमेश जड़िया, शैलेष जैन और प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट रिशांक तिवारी मौजूद रहे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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