A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन ?

A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन

A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन
A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन

क्षेत्र में श्रद्धा, सम्मान और स्मृतियों से ओत-प्रोत एक भावुक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पुज्य पिता स्वर्गीय पं. जयभगवान शर्मा जी की प्रथम बरसी के अवसर पर उनकी प्रतिमा की विधिवत स्थापना की गई। यह आयोजन न केवल एक पुत्र द्वारा अपने पिता के प्रति कर्तव्य और सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, परिजनों और शुभचिंतकों ने सहभागिता कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पं. जयभगवान शर्मा जी का आकस्मिक स्वर्गवास दिनांक 16 जनवरी 2025 को हो गया था। उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। वे एक सरल, कर्मठ और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने अपने जीवन में अथक परिश्रम के बल पर न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण किया, बल्कि समाज में भी एक सम्मानजनक स्थान बनाया। उनके एक वर्ष पूर्ण होने पर उनकी बरसी बड़े ही श्रद्धा भाव और धूमधाम से मनाई गई।

स्वर्गीय पं. जयभगवान शर्मा जी का जन्म 18 जून 1949 को हुआ था। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने परिश्रम और ईमानदारी के बल पर आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत एक छोटी सी डेरी से की थी, जहां वे साइकिल पर दूध का कार्य किया करते थे। गांव-गांव और घर-घर जाकर दूध पहुंचाना उनके दैनिक जीवन का हिस्सा था।

समय के साथ जैसे-जैसे उनका अनुभव बढ़ा, वैसे-वैसे उन्होंने अपने कार्य को और विस्तार दिया। साइकिल के बाद उन्होंने एक छोटी बैलगाड़ी खरीदी और दूध के व्यवसाय को आगे बढ़ाया। निरंतर मेहनत, ईमानदारी और ग्राहकों के विश्वास के चलते उनका कार्य धीरे-धीरे बढ़ने लगा। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और निरंतर अपने व्यवसाय को मजबूत करने में लगे रहे। उनका यही संघर्ष आज एक बड़ी सफलता की कहानी के रूप में देखा जाता है।

पं. जयभगवान शर्मा जी केवल एक व्यवसायी ही नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी और जिम्मेदार परिवार प्रमुख भी थे। उन्होंने अपने पुत्रों को संस्कार, मेहनत और ईमानदारी का महत्व सिखाया। उनके पुत्र दिनेश शर्मा जी और मुकेश शर्मा जी ने अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य में हाथ बंटाना शुरू किया। पिता और पुत्रों की यह मेहनत रंग लाई और दूध का व्यवसाय लगातार प्रगति करता चला गया।

आज वही व्यवसाय न केवल परिवार की आजीविका का साधन है, बल्कि अनेक मजदूरों और उनके परिवारों के लिए भी रोज़गार का स्रोत बन चुका है। कई मजदूर आज उनके यहां कार्यरत हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। यह स्वर्गीय पं. जयभगवान शर्मा जी की मेहनत और दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि उनका कार्य आज “आसमान को छूने” की स्थिति में पहुंच गया है। क्षेत्र में उनका नाम बड़े ही हर्ष और सम्मान के साथ लिया जाता है।

A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन
A grand feast was organized : पुज्य पिता की प्रथम बरसी पर प्रतिमा स्थापना, विशाल भंडारे का आयोजन

प्रथम बरसी के अवसर पर उनकी स्मृति में प्रतिमा की स्थापना की गई, जिसे देखकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। यह प्रतिमा न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। प्रतिमा स्थापना के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में सेवा और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

कार्यक्रम के दौरान दिवंगत पं. जयभगवान शर्मा जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया और उनके संघर्ष, सादगी और कर्मठता को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि व्यक्ति ईमानदारी और मेहनत से कार्य करे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। उन्होंने समाज को जो योगदान दिया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

इस अवसर पर परिवार के सदस्य दिनेश शर्मा, मुकेश शर्मा, महेश चंद शर्मा, अमन शर्मा, शिवम शर्मा, कार्तिक शर्मा, हरिओम शर्मा, कपिल शर्मा, सचिन शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में स्वर्गीय पं. जयभगवान शर्मा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम पूरे दिन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने भी परिवार के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में संस्कारों और परंपराओं को जीवित रखते हैं। पं. जयभगवान शर्मा जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनके कर्म, संघर्ष और आदर्श सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहेंगे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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