Akhilesh’s offer for a foreign tour : 100 विधायक लाओ मुख्यमंत्री बन जाओ’, CM योगी के विदेश दौरे पर अखिलेश का ऑफर

योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे से पहले सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी तापमान बढ़ा दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दोनों डिप्टी सीएम—केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक—को खुला “ऑफर” देते हुए कहा कि “100 विधायक लेकर आओ, मुख्यमंत्री बन जाओ।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से विदेश दौरे पर जा रहे हैं। विपक्ष ने इस दौरे को लेकर पहले भी सवाल उठाए हैं, लेकिन अखिलेश यादव के इस ताजा बयान ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान बीजेपी के भीतर कथित अंतर्विरोधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य या बृजेश पाठक अपने साथ 100 विधायक ले आएं, तो उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।
उनका यह बयान सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल के अंदरूनी समीकरणों पर निशाना माना जा रहा है। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि बीजेपी में नेतृत्व को लेकर असंतोष है और कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने अखिलेश यादव के बयान को “हास्यास्पद” और “दिवास्वप्न” करार दिया। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी पूरी तरह एकजुट है और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार मजबूती से काम कर रही है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की ओर से भी संकेत मिले कि पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है और विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान बीजेपी के भीतर संभावित असंतोष की अटकलों को हवा देने की रणनीति हो सकती है।
विदेश दौरे का राजनीतिक संदर्भ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विदेश दौरा निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस दौरे से राज्य में विदेशी निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि राज्य में पहले से किए गए निवेश समझौतों का पूरा क्रियान्वयन नहीं हुआ है। ऐसे में विदेश दौरे को लेकर सियासत होना स्वाभाविक है।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य की जमीनी समस्याओं—बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था—पर ध्यान देने की बजाय सरकार विदेशी दौरों में व्यस्त है।

‘100 विधायक’ बयान का राजनीतिक अर्थ
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटें हैं। बहुमत के लिए 202 विधायकों की आवश्यकता होती है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में “100 विधायक” का बयान एक प्रतीकात्मक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी के भीतर संभावित गुटबाजी की ओर संकेत करता है। हालांकि अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बड़ा मतभेद सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान 2024 और 2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति भी हो सकता है।
सपा की रणनीति
अखिलेश यादव लगातार बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे सामाजिक न्याय, पिछड़ों और दलितों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग से आते हैं, जबकि बृजेश पाठक ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अखिलेश का यह बयान सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सपा आगामी चुनावों के लिए जातीय और सामाजिक संतुलन की रणनीति पर काम कर रही है, और यह बयान उसी दिशा में एक संकेत हो सकता है।
क्या बदलेगा राजनीतिक समीकरण?
फिलहाल बीजेपी सरकार स्थिर दिखाई दे रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में से एक हैं।
लेकिन अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। आने वाले दिनों में बीजेपी के भीतर की गतिविधियों और बयानों पर नजर रहेगी।
अगर विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता है, तो यह सियासी चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है। हालांकि सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश है कि नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम या विवाद नहीं है।
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे से पहले अखिलेश यादव का “100 विधायक लाओ, मुख्यमंत्री बन जाओ” वाला बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया है।
जहां एक ओर बीजेपी इसे विपक्ष की हताशा बता रही है, वहीं सपा इसे सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष का संकेत बता रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर यूपी की सियासत में कोई नया मोड़ लेकर आता है। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से पहले ही राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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