All eyes : सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, फतेहपुर जांच पर टिकी सबकी निगाहें ?

All eyes : सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, फतेहपुर जांच पर टिकी सबकी निगाहें

All eyes : सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, फतेहपुर जांच पर टिकी सबकी निगाहें
All eyes : सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, फतेहपुर जांच पर टिकी सबकी निगाहें

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के सहकारिता विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। जनपद फतेहपुर में नई सहकारी समितियों के गठन को लेकर उठे विवाद ने अब शासन स्तर तक हलचल पैदा कर दी है। जिला सहकारी बैंक लिमिटेड फतेहपुर के सभापति एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभुदत्त दीक्षित द्वारा की गई शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में 18 जून को अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (सहकारिता) अशोक कुमार के फतेहपुर पहुंचकर मामले की जांच करने की सूचना है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नई सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और नियमों का पालन किए बिना समितियों को अस्तित्व में लाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि समिति गठन की प्रक्रिया में कथित रूप से आर्थिक लेन-देन और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले का सबसे चर्चित पहलू कथित रूप से प्रति समिति लाखों रुपये की वसूली का आरोप है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से समिति गठन के नाम पर लोगों से भारी धनराशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप यह भी है कि बिना कथित सुविधा शुल्क के फाइलों को आगे बढ़ाने में अनावश्यक विलंब किया जाता था। हालांकि आरोपित पक्ष की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सहकारिता विभाग का उद्देश्य किसानों, ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा उन्हें संस्थागत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि समिति गठन जैसी बुनियादी प्रक्रिया में ही अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो इससे विभाग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यही कारण है कि इस मामले को लेकर जनपद के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों में व्यापक चर्चा हो रही है।

शिकायत में एक अन्य गंभीर मुद्दा भी उठाया गया है, जिसमें विभाग के एक प्रभारी सचिव की सेवा स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से विभाग में कार्यरत है और उसके संबंध में पूर्व में कानूनी विवाद भी रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नियमों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इस विषय पर भी अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट और विभागीय अभिलेखों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

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नई समितियों के गठन को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार जनपद में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में समितियां गठित तो कर दी गईं, लेकिन उन्हें आवश्यक संसाधन, सचिवीय व्यवस्था और प्रशासनिक संरचना उपलब्ध नहीं कराई गई। आरोप है कि कई समितियां केवल कागजी स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रही हैं जबकि जमीनी स्तर पर उनका संचालन अपेक्षित रूप से नहीं हो पा रहा है।

विशेष रूप से सचिवों की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। शिकायत में कहा गया है कि कई समितियों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के आधार पर किया जा रहा है, जिससे कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में विलंब की स्थिति बन रही है। यदि यह स्थिति सही पाई जाती है तो इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।

डिजिटल युग में सहकारी समितियों के संचालन में कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिकायत में दावा किया गया है कि नवगठित समितियों में कंप्यूटर संचालकों की नियुक्ति अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सकी है। इससे डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन सेवाओं और पारदर्शिता से जुड़े प्रयास प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

किसानों से संबंधित मुद्दे भी इस विवाद के केंद्र में हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई किसानों को अभी तक आवश्यक दस्तावेज और पासबुक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। यदि ऐसा है तो किसानों को ऋण, उर्वरक वितरण और अन्य सहकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले जनपद में यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इनके माध्यम से किसानों को उर्वरक, बीज, ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसलिए समिति गठन और संचालन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार की अनियमितता का प्रभाव सीधे किसानों और ग्रामीण समुदाय पर पड़ता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर जांच का निर्णय लिया गया है। 18 जून को प्रस्तावित जांच बैठक में शिकायतकर्ता, विभागीय अधिकारी, बैंक प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों को दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि जांच के दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाएगा।

जनपद में इस जांच को लेकर व्यापक उत्सुकता बनी हुई है। सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोग यह जानना चाहते हैं कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो उनके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी भी जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

फिलहाल यह मामला आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है तथा इसकी निष्पक्ष जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और विभागीय व्यवस्था में वास्तव में किस स्तर तक सुधार की आवश्यकता है। लेकिन इतना तय है कि 18 जून को होने वाली जांच सहकारिता विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होगी, जिस पर न केवल फतेहपुर बल्कि पूरे प्रदेश के सहकारिता क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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